Jayprakash Narayan, जयंतीः गोडसे, कश्मीर और शेख अब्दुल्ला पर #जयप्रकाश नारायण रखते थे ये विचार

जयंतीः गोडसे, कश्मीर और शेख अब्दुल्ला पर #जयप्रकाश नारायण रखते थे ये विचार

Jayprakash Narayan, जयंतीः गोडसे, कश्मीर और शेख अब्दुल्ला पर #जयप्रकाश नारायण रखते थे ये विचार
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
वर्तमान राजनीति में कश्मीर, अब्दुल्ला परिवार और महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे हर चाय की चर्चा में शामिल रहते हैं. तीनों मुद्दों पर विवाद नया नहीं है. देश के प्रखर समाजवादी नेता और कांग्रेस की चूलें हिला देने वाले जननेता जय प्रकाश नारायण भी इन पर खुलकर अपनी बात रखते थे. आज उनकी 117वीं जयंती है. उनका जन्म 11 अक्टूबर, 1902 को बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गांव में हुआ था. उन्होंने इंदिरा गांधी की नीतियों के विरोध में ऐसा आंदोलन खड़ा किया, जिससे देश की राजनीति धारा ही बदल गई.
जेपी के इस आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लोग भी बकायदा शामिल हुए, लेकिन जेपी और आरएसएस के संबंध हमेशा एक जैसे रहे हों, ऐसा भी नहीं है. एक वक्त ऐसा भी आया था जब जेपी ने इंदिरा गांधी को खत लिखकर कहा कि आरएसएस मुझे उसी तरह का गद्दार समझता है जिस तरह से नाथूराम गोडसे महात्मा गांधी को गद्दार समझता था.

इंदिरा को कश्मीर मुद्दे पर लिखा पत्र

लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी को कश्मीर मुद्दे पर पत्र लिखा था. इस पत्र में उन्होंने इंदिरा गांधी से शेख अब्दुलाह की रिहाई के संबंध में कश्मीर समस्या का जिक्र करते हुए कहा था, ‘मैं ये भी नहीं सोचता हूं कि वे (कश्मीरी) देश के गद्दार हैं. नाथूराम गोडसे ने सोचा था कि गांधी जी गद्दार थे. आरएसएस समझता है कि जयप्रकाश गद्दार हैं. गोडसे एक व्यक्ति था, जबकि आरएसएस एक निजी संगठन है.’
पत्र में उन्होंने आगे जिक्र करते हुए कहा कि एक लोकतांत्रिक सरकार लोगों का प्रतिनिधित्व करती है और इसके कुछ सिद्धांत होते हैं, जिसके अनुरूप वह कार्य करती है. भारत सरकार किसी को गद्दार नहीं करार दे सकती, जब तक पूरी कानूनी प्रक्रिया से ये साबित न हो जाए कि वह गद्दार है. अगर सरकार ऐसा करने में अपने को असमर्थ पाती है, तब डीआईआर का प्रयोग करना और लगातार प्रयोग करना कायरतापूर्ण है, उस समय भी जब देश की सुरक्षा को कोई खतरा महसूस न हो.
जय प्रकाश नारायण लिखते हैं कि कश्मीर ने दुनिया भर में भारत की छवि को जितना धूमिल किया है, उतना किसी और मसले ने नहीं किया है. रूस समेत दुनिया का कोई ऐसा देश नहीं है, जो हमारी कश्मीर संबंधी नीतियों की तारीफ करता हो, यद्यपि उनमें से कुछ देश अपने कुछ वाजिब कारणों से हमें समर्थन देते हैं. जेपी ने खत में लिखा, ‘मैं शेख अब्दुलाह की रिहाई की मांग इसलिए नहीं कर रहा हूं क्योंकि वे मेरे दोस्त हैं या मैं नागरिक स्वतंत्रता से सरोकार रखता हूं. इस संदर्भ में मेरी प्राथमिक रुचि कश्मीर समस्या के समाधान खोजने की दिशा में है. जैसा कि मैं देख पाता हूं कि अगर इस समस्या का कोई समाधान संभव है, तो वह शेख अब्दुल्ला के सहयोग से ही संभव है.’

‘शेख अब्दुल्ला की बिना शर्त रिहाई हो’

उन्होंने आगे लिखा, ‘हालांकि मैं इस बारे में पूर्ण रूप से आश्‍वस्त नहीं हूं, लेकिन कोई भी ऐसा नहीं कह सकता है. जो विचार मेरे सामने हैं, वे स्पष्ट रूप से शेख अब्दुल्ला की बिना शर्त रिहाई के पक्ष में हैं. उसमें जोखिम हो सकता है, लेकिन यह जोखिम तो हर बड़े राजनीतिक और सैनिक निर्णय में लेना होता है. वास्तव में, यह जोखिम मानव के अधिकतर निर्णयों में रहता है, यहां तक कि जब दो लोग शादी करने का निर्णय लेते हैं, तब भी रहता है.’ वह आगे कहते हैं, ‘सबसे पहले, कुछ लोगों ने, जिनमें छिपे हुए वामपंथी और सभी हिंदू राष्ट्रवादी शामिल हैं, ने जयप्रकाश नारायण की एक खास छवि प्रस्तुत की, जिसमें उन्हें एक बेवकूफ आदर्शवादी और छिपे हुए गद्दार के रूप में पेश किया गया. ‘

‘मेरी गलत छवि बनाई गई’

उन्होंने आगे लिखा, ‘वे उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर अपनी बात साबित करने की कोशिश करते हैं. उदाहरण के लिए, ऐसा मान लिया जाता है कि मैं नगाओं के लिए नगालैंड और पाकिस्तानियों को कश्मीर सौंपने की वकालत करता हूं. लेकिन ऐसा मैंने कभी नहीं कहा. यहां तक कि अक्साई चीन के मामले में, मैंने एक लीज (एक अंतरराष्ट्रीय मान्यताप्राप्त लेन-देन, जिस पर हाल में भारत-नेपाल समझौते में भारत ने सहमति दी है) का सुझाव दिया था. लेकिन मेरी एक गलत छवि बनाकर पेश की गई, जिससे दूसरों के लिए आलोचना करना आसान हो गया.’

 

 


Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *