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जैश-ए-मोहम्मद सरगना मौलाना मसूद अजहर के मरने की आ रही हैं खबरें, सुरक्षा एजेंसियों को भरोसा नहीं

जैश-ए-मोहम्मद सरगना मौलाना मसूद अजहर के मरने की आ रही हैं खबरें, सुरक्षा एजेंसियों को भरोसा नहीं
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमले के कारण भारत के निशाने पर आए जैश-ए-मोहम्मद के सरगना  मौलाना मसूद अजहर की मौत को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. पाकिस्तान से आ रही खबरों के अनुसार आतंकी सरगना की मौत का दावा किया जा रहा है. हालांकि, यह आशंका भी जताई जा रही है कि पाकिस्तान मौलाना मसूद अजहर की मौत की अफवाहें फैलाकर भारतीय कूटनीति के कारण दुनियाभर के देशों से पड़ रहे दबावों को जल्द रोका जाए. साथ ही इससे भारत का ध्यान भटकाने की पाकिस्तानी साजिश भी हो सकती है. हालांकि, भारतीय एजेंसियों की ओर से ऐसी कोई पुष्टि अभी नहीं हुई है.
पाकिस्तान से आ रही खबरों में जेईएम सरगना मसूद अजहर की मौत को लेकर एक वजह यह बताई जा रही है कि 26 फरवरी को भारतीय वायु सेना के बालाकोट स्थित आतंकी प्रशिक्षण शिविर पर हुए हमले में वह भी घायल हो गया था. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई है. दूसरी वजह में उसकी मौत का कारण बीमारी बताया जा रहा है. चर्चा है कि किडनी या लीवर फेल होने के कारण भी उसकी मौत हो सकती है. हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पुलवामा हमले के बाद बने दबाव से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए यह पाकिस्तान की नई चाल भी हो सकती है.
सुरक्षा एजेसिंयों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मसूद अजहर के बारे में पाकिस्तान से कई तरह की सूचनाएं आ रही हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर किसी की पुष्टि नहीं हुई है. गौरतलब है कि बालाकोट पर एयर स्ट्राइक के दो दिन बाद एक मार्च को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अजहर मसूद के पाकिस्तान में होने की बात पहली बार स्वीकार की थी. हालांकि, उनका कहना था कि वह गंभीर रूप से बीमार है और चलने-फिरने के लिए तरस रहा है.
खुफिया अफसरों का कहना है कि एक आशंका यह हो सकती है कि एयर स्ट्राइक में सचमुच में आतंकी सरगना गंभीर रूप से घायल हो गया हो, इसे सीधे तौर पर नकारा भी नहीं जा सकता है. वैसे भारतीय हमले में मसूद अजहर की मौत होने की खबरें सच हुईं तो तय है कि इससे पाकिस्तान पोषित आतंकियों के मनोबल पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. वह भारत में खुलकर कोई कदम उठाने से हिचकेंगे.
अफसरों का तर्क है कि हमले में उसके घायल होने की बात को छिपाकर यह भ्रम भी फैलाए जाने की आशंका हो सकती है कि अजहर मसूद का किडनी फेल हो गया है और वह डायलिसिस पर है. इसके साथ ही लीवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीडि़त होने की बात कही गई, भारतीय एजेंसियों का मानना है कि मसूद अजहर की बीमारी और मौत की खबर पाकिस्तानी चाल भी हो सकती है. वजह, भारतीय कूटनीति के सक्रिय होने के बाद मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के लिए ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पेश किया है. यह भी माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पड़ रहे दबावों को देखते हुए इस बार चीन वीटो करने से खुद को बचाने के लिए भी कोई हथकंडा अपना सकता है.
ऐसे में मसूद अजहर की मौत की झूठी खबर फैलाकर पाकिस्तान एक साथ कई निशाने साधने की कोशिश कर सकता है. जैश ए मोहम्मद को पहली ही पाकिस्तान ने प्रतिबंधित सूची में डाल रखा है. इससे मसूद पर कार्रवाई का दबाव भी पाकिस्तान पर से हट जाएगा. अफसर बताते हैं कि पाकिस्तान ओसामा बिन लादेन को लेकर भी इसी तरह का झूठ पहले बोल चुका है. 9/11 हमले के बाद अमेरिका ने जब ओसामा बिन लादेन की खोज शुरू की तो पाकिस्तान की ओर झूठ फैलाया गया कि लादेन किडनी की गंभीर बीमारी से पीडि़त है और तोरा-बोरा की पहाडि़यों में कहीं छिपा है.
यही नहीं, तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने तो आधिकारिक रूप से यह तक कहकर मामले को छिपाने की कोशिश की कि गंभीर बीमारी के कारण लादेन की मौत की भी आशंका है, लेकिन इसके कई सालों बाद सच्चाई सामने आई कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान सेना के मुख्यालय के नजदीक बिल्कुल स्वस्थ और सुरक्षित अपनी बीबी और बच्चों के साथ रह रहा था.
मौलाना मसूद अजहर कौन है
जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख अजहर ओसामा बिन लादेन का करीबी रह चुका है, जो कई अफ्रीकी देशों में आतंक का प्रेरक रहा है. कई पाकिस्तानी मौलवियों को ब्रिटेन की मस्जिदों में धार्मिक प्रवचन के जरिए जिहाद के लिए प्रेरित किया. बताते हैं कि 50 वर्षीय प्रभावशाली और मास्टरमाइंड आतंकी का प्रभाव इतना बड़ा था कि जब वह 31 दिसंबर, 1999 को कंधार में अपहृत इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 को मुक्त करने के बदले में भारत द्वारा रिहा किया गया तो ओसामा बिन लादेन ने उसी रात भोज की मेजबानी की. भोज में लादेन ने याद दिलाया कि 1993 में उसने और अजहर ने पहली बार एक साथ काम किया था.
1979-1989 में सोवियत-अफगान युद्ध में घायल होने के बाद उसे आतंकी संगठन हरकत-उल-अंसार के प्रेरणा विभाग के प्रमुख के रूप में चुना गया था. 1990 की शुरुआत में अजहर हरकत-उल-अंसार का महासचिव बना और संगठन में भर्ती करने, धन जुटाने और इस्लामाबाद के संदेश को फैलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्थानों का दौरा किया. बताते हैं कि वह जाम्बिया, अबूधाबी, सऊदी अरब, मंगोलिया, यूनाइटेड किंगडम और अल्बानिया भी गया था. वह 1993 में सोमालिया के एक अलकायदा सहयोगी से मिलने के लिए केन्या गया और अगस्त 1993 में अजहर ने जिहाद के संदेश के साथ, निधि-स्थापना और भर्ती यात्रा के लिए ब्रिटेन में प्रवेश किया.
1994 में अजहर को जम्मू-कश्मीर में जिहाद का प्रचार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.  अजहर की ब्रि‍टिश भर्तियों में से आतंकी समूह हरकत-उल-अंसार (HuA) के सदस्य के रूप में उमर शेख ने उसकी रिहाई के लिए 1994 में भारत में चार पश्चिमी पर्यटकों का अपहरण कर लिया था. अजहर की रिहाई के लिए 1995 में फिर से पांच पश्चिमी पर्यटकों का अपहरण कर लिया गया और अंततः उन्‍हें भी मार डाला गया.
अजहर की रिहाई के लगभग तुरंत बाद जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया गया और इसने अप्रैल 2000 में जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर में बादामी बाग छावनी पर आत्‍मघाती हमला किया गया था. 24 वर्षीय आत्‍मघाती हमलावर आसिफ सादिक था जो अजहर की शुरुआती भर्ती और बर्मिंघम के छात्रों में से एक था.
अजहर ने ब्रिटेन में उन लोगों के साथ संपर्क बनाया, जिन्होंने आतंकी संगठनों में प्रशिक्षण के लिए भूखंड और रसद सहायता प्रदान की. जनवरी 1993 में अजहर ने भारत में अफगानी घुसपैठ बढ़ाने के लिए एक आतंकी नेता सज्जाद अफगानी के साथ बांग्लादेश का दौरा किया. अजहर हरकत-उल-मुजाहिदीन या हरकत-उल-अंसार का हिस्सा था, जब उसे 1994 में भारत में नफरत फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

 

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