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#इसरो बताएगा पाक आतंकियों का हाल, इंटेलीजेंस उपग्रह #एमिसैट के साथ 28 विदेशी नैनो उपग्रह लॉच

#इसरो बताएगा पाक आतंकियों का हाल, इंटेलीजेंस उपग्रह #एमिसैट के साथ 28 विदेशी नैनो उपग्रह लॉच
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
पिछले सप्ताह अंतरक्षित में दुनिया की चौथी ताकत होने का प्रदर्शन कर चुका भारत सोमवार को फिर अंतरिक्ष में नया इतिहास रचने की ओर कदम बढ़ा दिया है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) सोमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सुबह 9.27 पर भारतीय रॉकेट पोलर सैटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) द्वारा इलेक्ट्रॉनिक इंटेलीजेंस उपग्रह (एमिसैट) का प्रक्षेपण किया. इसरो ने 28 विदेशी नैनो उपग्रहों के साथ एमिसैट का प्रक्षेपण रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) के लिए किया है. पड़ोसी मुल्कों पर नज़र रखने के लिहाज से भी एमिसैट को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

ऐसा पहली बार होगा जब इसरो ने आम लोगों के लिए इस लॉन्च को खोला है. आज करीब 1000 लोग इस दृश्य को लाइव देखा. दुनिया में अभी तक अमेरिकी एजेंसी नासा ही ऐसा करती थी, जब वह आम लोगों के लिए इस तरह के प्रक्षेपण को खुला रखती थी.

एमिसैट के साथ रॉकेट तीसरे पक्ष के 28 उपग्रहों को ले जाएगा और अपने तीन अलग-अलग कक्षों में नई प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन भी करेगा. इसरो के अनुसार, रॉकेट पहले 436 किग्रा के एमिसैट को 749 किलोमीटर के कक्ष में स्थापित करेगा.
इसके बाद यह 28 उपग्रहों को 504 किमी की ऊंचाई पर उनके कक्ष में स्थापित करेगा. इसके बाद रॉकेट को 485 किमी तक नीचे लाया जाएगा जब चौथा चरण/इंजन तीन प्रायोगिक भार ले जाने वाले पेलोड के प्लेटफॉर्म में बदल जाएगा.
इस पूरे उड़ान क्रम में 180 मिनट लगेंगे, रॉकेट सोमवार को 9.27 मिनट पर उड़ान भरेगा. एमिसैट के अलावा लॉन्च होने वाले 28 अंतरराष्ट्रीय ग्राहक उपग्रहों का वजन 220 किलोग्राम होगा. इसमें 24 अमेरिका, दो लिथुआनिया के व स्पेन व स्विट्जरलैंड के एक-एक उपग्रह शामिल हैं.
इसरो के अध्यक्ष के. सिवान के अनुसार, “यह हमारे लिए विशेष मिशन है. हम चार स्ट्रैप ऑन मोटर्स के साथ एक पीएसएलवी रॉकेट का इस्तेमाल करेंगे, इसके अलावा पहली बार हम तीन अलग-अलग ऊंचाई पर रॉकेट के जरिए ऑर्बिट में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं.”
देश की सुरक्षा के नज़रिए से महत्वपूर्ण
एमिसैट सुरक्षा के नजरिए से भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे इसरो और डीआरडीओ ने मिलकर बनाया है. इसका खास मकसद पाकिस्तान की सीमा पर इलेक्ट्रॉनिक या किसी तरह की मानवीय गतिविधि पर नज़र रखना है. यानी बॉर्डर पर ये उपग्रह रडार और सेंसर पर निगाह रखेगा. ना सिर्फ मानवीय बल्कि संचार से जुड़ी किसी भी तरह की गतिविधि पर नज़र रखने के लिए इस उपग्रह का इस्तेमाल हो सकेगा.
अंतरिक्ष की दुनिया में लगातार दूसरी कामयाबी
गौरतलब है कि हाल ही में भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक नया इतिहास रचा था, जब भारत ने स्पेस में एक मूविंग सैटेलाइट को मारने का सफल परीक्षण किया था. ऐसा करने वाला भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद दुनिया का चौथा देश बना था. इस सफलता का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए किया था.
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