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इनोवेशन: कोरोना से बचाव और इम्यूनिटी बढ़ाएगा ‘आयुर्वस्त्र’

इनोवेशन: कोरोना से बचाव और इम्यूनिटी बढ़ाएगा ‘आयुर्वस्त्र’
सिर्फ काढ़ा, चाय और गिलोय ही नहीं, बल्कि इम्यूनिटी बूस्टर साड़ियां भी अब आपको बैक्टीरिया और वायरस से बचाने में मदद करेंगी। सुनकर थोड़ा अजीब लग रहा होगा। यकीन करना भी मुश्किल है। लेकिन, यह सच है।
मध्य प्रदेश हथकरघा उद्योग ने कुछ ऐसा कमाल कर दिखाया है। यह लोग ऐसी साड़ियों का निर्माण कर रहे हैं, जो आपको बैक्टीरिया से बचाएंगी। आपको वायरस से बचाएंगी और आपके शरीर में इम्यूनिटी विकसित करेंगी।
आयुर्वस्त्र के नवाचार से बढ़ेगी रोग प्रतिरोधक क्षमता
मध्य प्रदेश हस्तशिल्प और हथकरघा विकास निगम लिमिटेड ने कोरोना के संकट के दौर में आयुर्वस्त्र का नवाचार किया है। भोपाल के हैण्डलूम आर्टिस्ट और डिजाइनर विनोद मालेवार ने आयुर्वस्त्र तैयार किये हैं। पारम्परिक तरीके से तैयार किये गए इन वस्त्रों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले मसालों का प्रयोग किया गया है। साथ ही, इनकी छपाई और डिजाइन भी पारम्परिक तरीके से की गई है। लम्बे समय से हैण्डलूम और पारम्परिक कपड़ों के निर्माण और डिजाइन के साथ ही कई तरह के प्रयोग करने वाले विनोद मालेवार का दावा है कि यह वस्त्र रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने ममें मददगार हैं।
छीपा समाज की पारम्परिक कला में मेडीशनल क्लोदिंग
हैण्डलूम आर्टिस्ट और डिजाइनर विनोद मालेवार ने बताया कि यह मेडीशनल क्लोदिंग की एक कला है। जिसमें हम कपड़ों को दवाई की तरह इस्तेमाल करते हैं। कपड़ों का हम इम्यूनिटी बूस्टर हब से ट्रीट करते हैं। आयुर्वस्त्र को लेकर मध्य प्रदेश हैण्डलूम और हैण्डीक्राफ्ट के आयुक्त राजीव शर्मा भी काफी उत्साहित हैं।
उनका मानना है कि यह वस्त्र देखने, पहनने में अच्छा होने के साथ ही आयुर्वस्त्र शरीर को विशेष सुरक्षा भी प्रदान करता है। जोकि, कोविड के समय में काफी महत्वपूर्ण और लाभदायक है। प्रसार भारती से बातचीत में आयुक्त राजीव शर्मा ने कहा, “आयुर्वस्त्र मृगनयनी ने एक ऐसी चीज प्रस्तुत की है, कि हमारा जो पारम्परिक छीपा समाज है, जिसने इस कला को हमेशा से संरक्षित करके रखा, उस विरासत को फिर से जिन्दा रखने का काम जो पढ़े-लिखे छीपा समाज के लोग एक विजन के साथ इस काम को कर रहे हैं और उनको पूरा प्रोत्साहन मिल रहा है।”

 


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