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पश्चिम का राष्ट्रवाद हिन्दुस्तान ने ठुकराया है, स्वदेशी राष्ट्रवाद प्राणवायु है : मुरलीधर राव

पश्चिम का राष्ट्रवाद हिन्दुस्तान ने ठुकराया है, स्वदेशी राष्ट्रवाद प्राणवायु है : मुरलीधर राव
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पी. मुरलीधर राव ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रवाद भारत के लिए प्राणवायु है। हम राष्ट्र को एक भौगोलिक नहीं बल्कि जीवंत ईकाई मानते हैं । उन्होंने 1897 में चेन्नई में स्वामी विवेकानंद के दिए गए भाषण की व्याख्या करते हुए कहा कि हिंदुस्तान के लोगों को सारे देवताओं को छोड़कर सिर्फ भारत माता की आराधना करनी चाहिए। भारत भूमि पर रहने वाला हर व्यक्ति भारत मां की संतान हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रवाद और न्यू इंडिया पर हुई संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद देश की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। भारत का राष्ट्रवाद भाषा और धर्म के दायरों में जकड़ा हुआ नहीं है। एक धर्म और एक भाषा आधार पर यूरोप में राष्ट्र का निर्माण हुआ पर हिंदुस्तान ने राष्ट्रवाद के पश्चमी मॉडल को ठुकरा दिया। उन्होंने मार्क्सवाद और राष्ट्रवाद के संबंधों पर भी। प्रकाश डाला। इस विषय पर बोलते हुए प्रोफेसर नरेंद्र कुमार गौर ने कहा कि राष्ट्रवाद हमारे लिए स्वाभिमान और आत्म सम्मान का प्रतीक है।

अध्यक्षता करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रतनलाल हांगलू ने कहा कि यूरोप में राष्ट्रवाद एक राजनैतिक प्रतीक है जबकि भारत में राष्ट्रवाद भावनात्मक प्रतीक है। कुलपति ने समय के साथ भारत के विश्व परिदृश्य पर उभरते जाने के संकेतों की ओर भी इशारा किया और कहा कि जब वे 30 साल पहले जर्मनी गए थे तब भारत को लोग सपेरों का देश कहते थे पर आज भारत सिलिकॉन वैली का देश बन चुका है। उन्होंने राजनीति में संवाद की जरूरत पर बल दिया। प्रो हांगलूं ने महात्मा गांधी की पुस्तक ‘हिंद स्वराज’ का उदाहरण देते हुए कहा कि ‘भारत अंग्रेजों के आगमन से पहले भी एक राष्ट्र था’। भारत की राष्ट्रीयता का मूल तत्व संस्कृति है। उन्होंने डी डी कौशांबी और ये यल अल्तेकर के उदाहरणों का भी जिक्र किया।
कुलपति ने कहा कि यह कम आश्चर्य की बात नहीं है कि बिना बल प्रयोग के ही भारतीय दर्शन और संस्कृति का चीन, जापान, इंडोनेशिया आदि देशों में प्रसार हुआ। हमारी हजारों वर्षों की सांस्कृतिक निरंतरता की वैचारिक अभिव्यक्ति ही राष्ट्रवाद है । कार्यक्रम के आरंभ में प्रो जगदंबा सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ रंजना त्रिपाठी ने कार्यक्रम का संचालन किया तथागत डॉ निरंजन सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर प्रो रमेंद्र कुमार सिंह, प्रो जे अंसारी,प्रो शशिकांत राय, प्रो. हर्ष कुमार, प्रो एन के शुक्ला, डॉ. विनम्र सेन, डॉ चित्तरंजन कुमार, डॉ सुजीत सिंह,डॉ सुरभि त्रिपाठी, डॉ सुधा त्रिपाठी, डॉ. शिव कुमार यादव, आदि उपस्थित रहे।

 

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