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#Pok पर भारत की आक्रामक कूटनीति, बड़ा सवाल- क्या गुलाम कश्मीर पर कब्जा कर लेगी मोदी सरकार?

#Pok पर भारत की आक्रामक कूटनीति, बड़ा सवाल- क्या गुलाम कश्मीर पर कब्जा कर लेगी मोदी सरकार?
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
कश्मीर से धारा 370 और 35ए खत्म करने के बाद भारत बदले हालात में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानि (पीओके) को लेकर आक्रामक कूटनीति के रथ पर सवार हो चुका है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिनों का लेखा-जोखा बताने के लिए पहुंचे तो आगे की रणनीति का भी मुजाहिरा कर दिया. कहा- गुलाम कश्मीर हमारा है, इसे लेकर रहेंगे. सामान्यतौर पर संयत भाषा का इस्तेमाल करने वाले एस. जयशंकर के ऐसे शब्द मोदी सरकार की बदली रणनीति को ही प्रदर्शित करते हैं. आक्रामक कूटनीति के इस अभियान में भारत ने यह देखना भी छोड़ दिया है या अंतरराष्ट्रीय ताकतों को यह अहसास करा दिया है कि कश्मीर के मुद्दे पर वह कोई दबाव मानने वाला नहीं है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दो महीने पहले ही यह कह चुके हैं कि कश्मीर को लेकर अब कोई बातचीत नहीं होगी. यदि कोई बात होनी है तो पीओके को लेकर होगी. शालीन शब्दों वाले राजनाथ सिंह कठोर शब्दों को भी तोलमोल कर बोलते हैं. फिर, पूर्वोत्तर राज्यों के मंत्री डॉ जीतेंद्र सिंह ने कश्मीर में कहा कि उनके जीवन में कश्मीर से धारा 370 हट गई. इसकी उम्मीद नहीं थी. अब सपना है कि इसी जीवन में मुजफ्फराबाद तक बेरोकटोक बस चले और तिरंगा लहराए. दो मंत्रियों के यह बयान ही साफ कर देते हैं कि मोदी सरकार ने पीओके को लेकर रणनीति में बदलाव कर लिया है.

बतौर कूटनीतिज्ञ अमेरिका के साथ प्रगाढ़ रिश्तों की बुनियाद खड़ी करने में अहम भूमिका निभाने वाले एस. जयशंकर ने पहली प्रेस कांफ्रेंस में ही पीओके को लेकर पाकिस्तान के सामने भारत के इरादे को साफ कर दिया है. एस. जयशंकर की यह टिप्पणी अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के उस बयान से मेल खाने लगी है जिसमें उन्होंने पाकिस्तानियों को यह डर दिखाने की कोशिश की थी कि भारत आजाद कश्मीर (जिसे भारत गुलाम कश्मीर कहता है यानी पीओके) पर बड़ा हमला कर सकता है. उनका तर्क था कि भारत बालाकोट पर हमले कर सकता है तो पीओके पर भी हमला कर सकता है.

पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक रणनीति का यह पहला मौका नहीं है. भारत ने दो बार पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की. पहली सेना और दूसरी वायु सेना ने की. दोनों मौकों पर इसे छिपाने की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को यह बताने की कोशिश की गई कि भारत की प्राथमिकताएं बदल गई हैं. अब भारत आतंकावाद का समर्थन करने वाले पाकिस्तान के सामने वार्ता का ढोंग नहीं करेगा. बल्कि उसके सीने पर चढ़कर अपने अधिकारों को हासिल कर लेगा. विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान से आम भारतीयों को यह महसूस होने लगा है कि सरकार अविभाज्य कश्मीर का सपना पूरा कर सकती है. हालांकि, यह कैसे होगा, इसका खुलासा होना अभी बाकी है.

एस. जयशंकर ने कहा कि पीओके भारत का हिस्सा है, भरोसा है हमारे नियंत्रण में होगा. एस. जयशंकर ने कहा कि एनआरसी हमारा हक है. यह भी एक आंतरिक मामला है. पकिस्तान को ये देखना चाहिए कि वह अपने अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार कर रहा है. इससे पहले कि वो हम पर सवाल उठाए, वहां अल्पसंख्यकों का नंबर लगातार गिर रहा है और धर्मांतरण किए जा रहे हैं.”

जाकिर नाइक के बारे में विदेश मंत्री ने कहा, “हमने प्रत्यर्पण की अर्ज़ी जनवरी 2018 में डाली थी, तबसे हमने लगातार इस तरफ कोशिश की. व्लादिवोस्टोव में ये बात उठी थी और हमने फिर प्रत्यर्पण की बात की थी…हम ज़ाकिर नाइक को वापस लाना चाहते हैं.”

विदेश मंत्री ने कहा, “भारत और अमेरिका का रिश्ता अब बहुत अच्छा हो गया है. कितना व्यापर बढ़ गया है. सिक्योरिटी के लिए देश एक साथ काम कर रहे हैं. हर विभाग में ये दोस्ती आगे बढ़ी है जबकि दोनों देशों में लगातार सरकारें बदलती रही लेकिन ये दोस्ती आगे बढ़ती रही. रिश्ते की सेहत बहुत अच्छी है. मैं आने वाले पांच सालों के लिए आशावादी हूं…व्यापार समस्या सामान्य बात है.”

ह्यूस्टन में होने वाले कार्यक्रम मोदीजी का अमेरिका में तीसरा कार्यक्रम है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का वहां आना ये दिखाता है कि भारत की अमेरिका में इज़्ज़त बढ़ी है और ये हमारी जीत है. इस समय हम एकजुट हैं. नरेंद्र मोदी हमारे प्रधानमंत्री हैं. हमारे लिए ये गर्व की बात है की ट्रम्प वहां मौजूद होंगे. पूरा विश्व मोदी और ट्रंप को एक साथ देखेगा और सीखेगा भारत और अमेरिका से कि काम कैसे होता है? पाकिस्तान भी देखेगा.”

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