भारतीय रेलवे ने रच दिया इतिहास, बनाया पहला ऐसा रेल इंजन जो डीजल संग बिजली से भी चलेगा

भारतीय रेलवे ने एक नया इतिहास रच दिया है. रेलवे के इंजीनियर्स ने एक ऐसे रेल इंजिन को बनाने में सफलता हासिल कर ली है जो जरूरत के मुताबिक डीजल या इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर दौड़ सकेगा. इससे ट्रैक्शन बदलने पर इंजिन बदलने की समस्या से भी निजात मिल जाएगी. साथ ही निकट भविष्य में इस दुविधा से भी निजात मिल गई है कि सभी ट्रैक विद्युतीकृत होने पर हजारों की संख्या में मौजूद डीजल इंजिन कहां जाएंगे. अब रेलवे ने फैसला लिया है कि सभी डीजल इंजिन को चरणबद्ध तरीके से ड्यूल ट्रैक्शन मोड में परिवर्तित किया जाएगा. बताया गया है कि भारतीय रेल का यह इंजिन दुनियाभर में अपनी किस्म का पहला इंजिन है. नए इंजिन को दिल्ली में गुरुवार को प्रदर्शित किया गया.
गौरतलब है कि भारतीय रेलवे मिशन ने सभी ब्रॉडगेज रेल लाइनों को विद्युतीकृत करने का काम शुरू कर दिया है. उम्मीद है कि 2021-22 के बाद कम या ज्यादा दूरी की सभी ब्राॉडगेज यानि बड़ी लाइनें विद्युतीकृत हो जाएंगी. इसके बाद इन सभी पर इलेक्ट्रिक इंजिन की जरूरत होगी. वर्तमान क्षमता के मुताबिक इस संख्या में इलेक्ट्रिक इंजिन मिलने में दिक्कत हो सकती थी. साथ ही इसके बाद खाली होने वाले डीजल इंजिन को लेकर भी समस्या बढ़नी थी.
रेलवे के विद्युतीकरण लक्ष्य पर कदम बढ़ाते हुए वाराणसी स्थित डीजल लोकोमोटिव वर्क्स ने पुराने पड़ चुके डीजल इंजिन को मिड लाइफ रि-हैबिलिटेशन योजना के तहत डीजल लोकोमोटिव को अपग्रेड कर ड्यूल ट्रैक्शन का बना दिया. यह लोकोमोटिव (इंजिन) वाराणसी से लुधियाना तक अपनी पहली यात्रा में 5200 टन भार का लोड लेकर गया, जो कि 3 दिसंबर, 2018 से शुरू हुई.

परियोजना की मुख्य विशेषताएं निम्नानुसार हैं
• महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक परियोजना पर काम 22 दिसंबर 2017 को शुरू हुआ और नया लोकोमोटिव 28 फरवरी, 2018 को भेजा गया था. अवधारणा से निष्पादन तक डीजल लोकोमोटिव से बिजली के रूपांतरण को केवल 69 दिनों में किया गया था. 
• चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, डीजल लोको आधुनिकीकरण कार्य और अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन के साथ साथ मिलकर ‘मेक इन इंडिया’ परियोजना के तहत डीएलडब्लू ने अपने संसाधनों से बनाया है. 
• डीजल लोकोमोटिव के मध्य-जीवन पुनर्वास को बंद करने और उन्हें विद्युत लोकोमोटिव में बदलने, उनके कोडल जीवन तक लाभप्रद रूप से उनका उपयोग करने की योजना बनाई गई है.
• @5-6 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले डीजल लोकोमोटिव का मिडिल लाइफ पुनर्वास 18 साल से अधिक संचालन के बाद अपरिहार्य है. इस व्यय का केवल 50% डीजल लोकोमोटिव को इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में बदलने के लिए उपयोग किया जाएगा.
• एक डब्ल्यूडीजी 3-श्रेणी डीजल लोकोमोटिव जो कि मध्य-जीवन पुनर्वास में था, को इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में बदल दिया गया है. नए स्वदेशी ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव 5,000 एचपी की ताकत प्रदान करता है, जबकि मूल रूप से यह इंजिन 2,600 एचपी का था, अपग्रेडेशन के बाद पुराने इंजिन से यह 92% अधिक ताकतवर हो गया है.
• इस उल्लेखनीय बदलाव की लागत लगभग 2.5 करोड़ है जो डीजल लोकोमोटिव व्यय के मध्य-जीवन पुनर्वास का केवल 50% है. यह केवल आर्थिक नहीं है. बल्कि माल ढुलाई की औसत गति में भी वृद्धि करता है. क्योंकि परिवर्तित लोकोमोटिव का अश्वशक्ति 100% है. 
• यह परियोजना कर्षण ऊर्जा लागत की बचत के लिए एक निश्चित कदम है जो बदले में आईआर ईंधन बिल को कम करेगी और कार्बन उत्सर्जन को कम करेगी और भारतीय रेलवे में नई आयु प्रौद्योगिकी शुरू करेगी. 
भारतीय रेलवे का अनूठा उत्पाद
नया इंजिन भारतीय रेलवे का एक अनूठा उत्पाद है, जो एक से अधिक तरीकों से है. भारतीय रेलवे मिशन ने ब्रॉडगेज नेटवर्क और डी-कार्बोनाइजेशन के मिशन 100% विद्युतीकरण योजना की शुरुआत की है. 2017-18 के दौरान 4087 ब्रॉडगेज रेलकिमी को विद्युतीकृत किया गया है. यह किसी भी एक वित्त वर्ष में अब तक का सबसे बड़ा विद्युतीकरण कार्य है. 2018-19 के दौरान 6000 रूट केएम विद्युतीकृत किया जाएगा. 100% विद्युतीकरण को ध्यान में रखते हुए डीजल इंजनों को इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में परिवर्तित करने और उनके कोडल जीवन का लाभप्रद रूप से उपयोग करने की योजना बनाई गई है. यह भी ध्यान दिया जा सकता है कि डीजल लोकोमोटिव से इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का रूपांतरण डीजल इंजिन के मध्य-जीवन पुनर्वास के दौरान किया जाएगा. 

 

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