NationalWheels

देश में दो वर्षों में दौड़ेंगी 40 वंदे भारत ट्रेनें, दूसरी ट्रेन में लगेंगे आयातित ग्लास

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

रणविजय सिंह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने देश के सभी बड़े शहरों को स्वदेशी सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस से जोड़ने की योजना तैयार कर चुकी है. आधिकारिक सूत्रों का दावा है कि रेलवे मंत्रालय ने चेन्नई स्थित आईसीएफ को 40 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सेट बनाने का आर्डर दिया है. ये ट्रेन सेट अगले दो सालों में चरणबद्ध तरीके से विभिन्न शहरों के बीच दौड़नी शुरू हो जाएंगी.
दूसरी वंदे भारत एक्सप्रेस रोल आउट हो चुकी है. उम्मीद है कि मार्च के अंतिम दिनों तक ट्रैक पर आ सकती है. दूसरी वंदे भारत एक्सप्रेस दक्षिण भारत में  चेन्नई-बंगलौर-हैदराबाद के बीच चलने की संभावना है. पिछले दिनों दक्षिण भारत के दौरे पर गए रेल मंत्री पीयुष गोयल ने भी इसका संकेत दिया था.
यही नहीं, द हिंदू बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें वर्तमान ट्रेन सेट से भी ज्यादा आधुनिक होंगी. नई ट्रेन सेट में विदेश से आयातित स्लिक विंडो ग्लास लगेंगे. यह शीशे ऐसे होंगे जो टूटने पर यात्रियों को नुकसान न पहुंचा सकें. हालांकि, आयातित ग्लास दूसरी ट्रेन में लगेंगे या तीसरी वंदे भारत में इसका इस्तेमाल किया जाएगा, यह स्लिक विंडो ग्लास के पहुंचने पर निर्भर करेगा.
इसके लिए आईसीएफ ने कंपनियों से ऑफर मांगने की तैयारी की है. अफसरों का कहना है कि आयातित शीशे लगाने की वजह नई दिल्ली-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस में अलग-अलग दिनों में हुए पथराव से शीशों के क्षतिग्रस्त होने और उनके टूटने से यात्रियों को चोट लगने के खतरे को देखते हुए लिया गया है. यह फैसला बेहतर यात्री सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए किया गया है.
हालांकि, उत्पादन प्रक्रिया से जुड़े एक अफसर का कहना है कि वंदे भारत की लागत को कम करने के लिए इसे पूरी तरह स्वदेशी स्तर पर बनाने का फैसला किया गया था. पहली ट्रेन की अपेक्षा नई ट्रेन में कई नए सुधारों पर ध्यान दिया गया है. स्लिक विंडो ग्लास का बाद में देश में ही उत्पादन कराने की कोशिश की जाएगी.
पहली ट्रेन-18 के ट्रैक पर आ जाने के बाद आईसीएफ ने स्थानीय विक्रेताओं से नई ट्रेनों के लिए और अधिक पुर्ज़े उत्पादन करने को कहा है जिससे वंदे भारत एक्सप्रेस की लागत को और कम किया जा सके. पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को 100 करोड़ रुपये में तैयार किया गया है.
एक रेलवे अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि “एक ऐसी ट्रेनसेट बनाने का उद्देश्य था जो पूरी तरह से स्वदेशी हो. हम लागत कम रखना चाहते थे. लेकिन पहली ट्रेन पर पथराव की कई घटनाओं के कारण खिड़की के शीशे टूट गए हैं, इसलिए नई गाड़ियां ऐसे कांच का इस्तेमाल करेंगी, जैसे कारों में टूट-फूट रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले ग्लास लगाए जाते हैं. इसके साथ ही नई ट्रेन में सीटों के समायोजन में भी कुछ सुधार किए गए हैं.

 

Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

NationalWheels will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.