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ब्रिटेन के साथ शोध कर भारत घटाएगा इलाज का खर्च, समझौते को कैबिनेट की हरी झंडी

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
भारतीय क्रिकेट टीम के अहम सदस्य रहे युवराज सिंह ने कैंसर का इलाज अमेरिका में कराया और पूरी तरह ठीक होकर स्वदेश लौटे. अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे भी कैंसर को मात देकर लौट चुकी हैं. उन्होंने भी अमेरिका में ही इलाज कराया है. सिर्फ यह दोनों ही नहीं, ज्यादातर भारतीय कैंसर का इलाज कराने के लिए विदेशी अस्पतालों की शरण में जाते हैं. वजह, भारतीय कैंसर संस्थानों की अपेक्षा विदेशी चिकित्सा प्रणाली का ज्यादा कारगर होना है. हालांकि,  उच्च लागत के कारण हर भारतीय अमेरिका या ब्रिटेन में इलाज कराने के बारे में नहीं सोच सकता है. इसका निदान निकालने के लिए मोदी सरकार ने अमेरिकी कैंसर शोध संस्थानों के साथ मिलकर भारत में रिसर्च को बढ़ावा देने का फैसला किया है, इसके लिए 14 नवंबर 2018 को भारत और अमेरिका के बीच कैंसर अनुसंधान पहल पर हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की मंजूरी मिल गई. है.
प्रभाव:
कैंसर के परिणामों में सुधार के उद्देश्य से तकनीकी, बायोमेडिकल, क्लिनिकल और फार्मास्युटिकल खोज में सुधार के बावजूद दुनिया भर में अति-स्वास्थ्य सेवा प्रणाली कैंसर की देखभाल की लागतों के भारी बोझ को पूरा करने में टेढ़ी ही रहती हैं. भारत-यूके कैंसर रिसर्च इनिशिएटिव उन सहयोगों को उत्प्रेरित करने के लिए एक रोडमैप तय करेगा जो सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, स्वास्थ्य संगठनों और संस्थानों को बहु-अनुशासनात्मक अनुसंधान मंच पर ले जाएगा. इसमें कैंसर पीड़ितों के मृत्यु दर को कम करने, इलाज को सस्ता करने, देखभाल की लागत घटाने जैसे क्षेत्रों में काम किया जाना है.
इस पहल के माध्यम से डॉक्टरेट-स्तर, पोस्ट-डॉक्टरल स्तर के शोधकर्ताओं और प्रारंभिक कैरियर वैज्ञानिकों के लिए पदों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. उन्हें न केवल पीड़ित अंगों की शल्य क्रिया की तकनीक में प्रशिक्षित किया जाएगा, बल्कि आवश्यक नेतृत्व और परियोजना प्रबंधन कौशल में भी प्रशिक्षित किया जाएगा. यह शोधकर्ताओं को शिक्षा में या संबंधित जैव-फार्मा उद्योग में कार्यकाल-ट्रैक अनुसंधान पदों को हासिल करने में मदद करेगा.
पृष्ठभूमि:
भारत-ब्रिटेन कैंसर अनुसंधान पहल जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत और कैंसर अनुसंधान यूके (CRUK) द्वारा 5 साल की एक द्विपक्षीय अनुसंधान पहल है, जो कैंसर के लिए सस्ती दृष्टिकोणों पर ध्यान केंद्रित करेगी. इस 5-वर्षीय पायलट प्रोजेक्ट में CRUK और DBT दोनों £5 मिलियन (लगभग 45 करोड़) का निवेश करेंगे. अन्य संभावित फंडिंग भागीदारों से आगे निवेश की तलाश करेंगे.
यह भारत के प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों द्वारा जारी संयुक्त वक्तव्य का अनुसरण है. नरेंद्र मोदी 18 अप्रैल, 2018 को ब्रिटेन गए थे. तब समझौता हुआ था कि  जिसमें “संपन्न लोकतंत्रों के रूप में हम एक साथ काम करने की इच्छा साझा करते हैं और उन सभी के साथ जो एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय आदेश का समर्थन करने के लिए अपने उद्देश्य को साझा करते हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों, वैश्विक शांति और स्थिरता पर सहमत हुए हैं. यूके और भारत के बीच एक वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अपने अनुभव और ज्ञान को साझा कर रहे हैं. भारत के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और कैंसर रिसर्च यूके ने £10 मिलियन (लगभग 90 करोड़ रुपये) द्विपक्षीय अनुसंधान पहल शुरू करने का प्रस्ताव किया है जो कम लागत पर ध्यान केंद्रित करेगा.

 

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