Nationalwheels

भारत-नेपाल के बीच मिठास घोलने की पाइपलाइन

भारत-नेपाल के बीच मिठास घोलने की पाइपलाइन
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
भारत और नेपाल के बीच शुरू हुई क्रासबार्डर गैस पाइप लाइन परियोजना से निश्चित ही चीन चिंहुका होगा। क्योंकि इस गैसपाइप लाइन से केवल गैस की ही आपूर्ति नहीं होगी , इसे दोनों देशों के बीच मिठास की संभावना की दृष्टि से भी देखा जाना चाहिए। चीन को तो भारत और नेपाल के बीच खटास से फायदा है। भारत और नेपाल के बीच गैस पाइप लाइन परियोजना पर दोनों देशों के बीच 1996 में सहमति बनी थी। लेकिन नेपाल के अस्थिर राजनीतिक कारणों से यह लटका हुआ था। नेपाल और चीन के बीच बढ़ रही नजदीकियों के पीछे नेेपाली कम्युनिस्ट नेता तथा पूर्व पीएम माधव कुमार नेपाल ने चीन की अपेक्षा भारतीय परियोजनाओं के पूरा न होना भी एक कारण बताया।
यूं तो भारत द्वारा प्रस्तावित कई परियोजनाएं नेपाल में अटकी पड़ी है। इसमें जलविद्युत परियोजनाएं भी शामिल हैं। लेकिन इसके पीछे नेपाल की अस्थिर राजनीतिक स्थितियां ही उत्तरदायी है। गैस पाइपलाइन परियोजना को 2014 में रफ्तार मिली जब भाजपा की सरकार बनने के बाद पीएम मोदी नेपाल के दौरे पर गए थे। दक्षिण एशिया की यह पहली क्रासबार्डर पाइपलाइन मोतिहारी-अमलेखगंज के बीच शुरू हुई।कुल करीब 66 किमी लंबी गैस पाइप लाइन परियोजना का 36 किमी हिस्सा नेपाल में पड़ता है तथा 30 किमी भारत में पड़ता है। भारत ने इस परियोजना में 324 करोड़ रूपए निवेश किया है।
चीन स्वयं नेपाल में ऐसी ही परियोजना का इच्छुक था लेकिन चूंकि यह परियोजना भारत द्वारा पूर्व में ही प्रस्तावित था इसलिए उसकी दाल नहीं गली। अब भारत द्वारा इस परियोजना के शुरू होने से एक ओर चीन हतोत्साहित हुआ है तो दूसरी ओर नेपाल को भी  भारत के मोदी सरकार से नेपाल में ठप पड़ी परियोजनाओं रफ्तार मिलने की उम्मीद जगी है।

दोनों देश के लोगों में भी मधुरता गायब हो रही

भारत और नेपाल के बीच रिश्ते में खटास मिठास तो आता रहा है लेकिन उच्च स्तरीय वार्ता के बाद संबंध फिर सामान्य हो जाया करते थे। यदा कदा दोनों देशों की सरकारों के बीच किसी मुद्दे को लेकर तनाव की स्थिति में भी दोनों देशों की जनता के बीच संबंध मधुर ही रहे हैं। यह स्थिति नेपाल के तराई से लेकर पहाड़ तक देखने को मिलता था। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच के रिश्तों को दुनिया रोटी बेटी के रिश्ते के रूप में देखती रही है। आज परिस्थितियां बदली हुई है। अब तो सरकार सरकार के बीच रिश्ते चाहे जैसे हों दोनों देशों के नागरिकों के बीच की वह मधुरता भी गायब हो रही है। भारत के प्रति नेपालियों में इस प्रतिकूल बदलाव में तेजी दरअसल 2015 के उस वक्त के बाद आई जब भारत पर कथित नाकेबंदी का आरोप लगा। करीब पांच माह तक भारत – नेपाल सीमा के लगभग सभी नाकों पर हुई बंदी से वाकई नेपाल की दुश्वारियां बढ़ गई थी।   यह नाकेबंदी वास्तव में संविधान संशेाधन को लेकर उस वक्त के नेपाल में कम्युनिष्ट सरकार के खिलाफ थी जिसे नेपाल के ही मधेसी दलों ने कर रखा था लेकिन इसका तोहमत ओली सरकार ने बड़े ही चालाकी से भारत सरकार पर मढ़ दिया। कहना न होगा कि आम चुनाव में ओली के चुनाव प्रचार का प्रमुख बिंदु ही भारत विरोध था, उन्होंने भारत से दूरी और चीन के करीब खिसकने के संकेत भी कई बार दिए।

चीन हर वक्त ताक में रहता है

चीन नेपाल और भारत के बीच संबंधों में दरार की ताक में तो रहता ही है। जब जब ऐसे मौके आए तो इसका उसने खूब फायदा भी उठाया। विकास के नाम पर नेपाल में चीन की हर क्षेत्रों में बढ़ रही घुसपैठ से यह कहना समीचीन होगा कि नेपाल प्रो चाइना की ओर बढ़ रहा है। राजशाही के वक्त से ही चीन नेपाल में कम्युनिष्ट को मजबूत करने में लगा था। आज तो नेपाल में एक दो नहीं चीन की सैकड़ों परियोजनाएं चल रही हैं , जहां कई हजार नेपाली मजदूर कार्यरत हैं। जाहिर है चीन इस माध्यम से नेपालियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है जो धीरे धीरे भारत से नफरत की वजह बनता जा रहा है। नेपाल में भारत तथा चीनी परियोजनाओं के प्रति भी नेपालियों में जर्बदस्त भेद देखा जा रहा है। वे जब भी आंदेालन पर होते हैं तो उनके निशाने पर नेपाल में स्थापित भारतीय परियोजनाओं के कार्यालय और भारतीय वाहन ही होते हैं जबकि चीन की परियोजनाओं के प्रति उनमें कोई गुस्सा नहीं हेाता। नेपाल में भारतीय उत्पादन को भी धीरे धीरे कम किया जा रहा है। नेपाल सीमेंट उद्योग पर भी चीन कब्जा करने की रणनीति बना रहा है। भारत सीमा से सटे नवलपरासी में वह सीमेंट की बड़ी फैक्टरी लगाने की सेाच रहा है।
चीन नेपाल के मिल्क प्रोडक्ट बाजार पर कब्जा करने की दिशा में तजी से कदम बढ़ा रहा है। इसका सबसे बड़ा नुकसान भारत को उठाना पड़ेगा क्योंकि अभी तक नेपाल के मिल्क प्रोडक्ट बाजार पर भारत का कब्जा है। चीन 32 अरब की लागत से नेपाल में तीन काऊ फार्म खोलने जा रहा है। चीन के इस काऊ फार्म पर अफसर छोड़कर बाकी सब नेपाली होंगे। अब इस काऊ फार्म से विभिन्न प्रकार के मिल्क प्रोडक्ट नेपाल के बाजार में अपना पांव पसारेंगे ही यहां उतपन्न बछड़ों के लिए स्लाटर हाउस भी होंगे। नेपाल के बाजार पर भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा चल रही है लेकिन चीन भारत से पीछे इस लिए हो रहा था कि उसके पास नेपाल में माल पंहुचाने के लिए सुलभ मार्ग नहीं है। इस लिए चीन अपने ज्यादातर उत्पादन नेपाल में ही करने की रणनीत पर काम कर रहा है। नेपाल स्वयं को आत्म निर्भर बनाने के लिए भारत की अपेक्षा चीन को अधिक तरजीह दे रहा है। नेपाल में कम्युनिष्ट सरकार होने का भी उसे फायदा मिल रहा है। चाइनीज फैक्टरियों में काम करने वाले हजारों नेपाली लोग स्वभावकि तौर पर प्रो चाइनीज हो रहे है?

रिश्ते सुधारने के लिए लगातार काम की जरूरत

वरिष्ठ कम्युनिष्ट नेता तथा नेपाल के पूर्व पीएम माधव कुमार नेपाल कहते हैं कि नेपाल भारत के साथ मजबूत संबंध का पक्षधर सदैव रहा है और है। जहां तक चीन से बढ़ रहे संबंधों की बात है तो उनका देश आत्मसम्मान और संप्रभुता के आधार पर पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते बनाना चाहता है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन दोनों ही हमारे पड़ोसी देश हैं ऐसे में यह कैसे संभव है कि एक से हमारे संबंध हों और दूसरे से न हो? उन्होंने साफ कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्तों के सुधार के लिए लगातार काम करने की जरूरत है। यानी नेपाल के पूर्व पीएम माधव नेपाल मानते हैं कि दोनों देशों के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। साफ कहा कि नेपाल भारत से कारोबार में रियायत चाहता है। 2014 में पीएम मोदी नेपाल आए तब स्थितियां काफी अनुकूल बनी थी लेकिन यह ज्यादा दिन तक नहीं कायम रह सकी। मधेसी मुद्दों को लेकर नेपाल बार्डर पर की गई नाकाबंदी से दोनों देशों के संबंध प्रभावित हुए।
निश्चित ही भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में खटास डालने की साजिश लगातार चीन द्वारा रची जा रही है। वह नेपाल में अपने परियोजनाओं में काम करने वाले नेपाली मजदूरों को भारत के प्रति भड़का रहा है। हाल यह है कि नेपाल के पहाड़ पर भारतीयों के प्रति जर्बदस्त नफरत है। इसे दूर करना भारत के लिए एक चुनौती है लेकिन दूर करना ही है क्योंकि नेपाल को हम यूं ही नहीं छोड़ सकते। गैस पाइप लाइन के शुरू होने से पहले भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर का नेपाल का दौरा भी महत्वपूर्ण रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर को नेपाल के मामलों में समझ अच्छी है। निसंदेह वे इसे बेहतर बनाने की दिशा में कोई प्लान कर रहे होंगे लेकिन अब ऐसा कुछ करने की जरूरत है जिससे दोनों देशों की सरकार के बीच ही नहीं जनता के बीच भी सौहाद्र की अनुभूति हो।

उत्तर प्रदेश, लेखक – मोहम्मद

 

 

Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *