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सस्ता कच्चा क्रूड खरीदने के लिए भारत और चीन मिलकर बना रहे तेल खरीदार क्लब

सस्ता कच्चा क्रूड खरीदने के लिए भारत और चीन मिलकर बना रहे तेल खरीदार क्लब
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
पाकिस्तान में रह रहे आतंकी सरगना मसूद अजहर को लेकर भारत और चीन के रिश्तों में चाहे जैसी कड़वाहट हो लेकिन दोनों देश कच्चे तेल की अच्छी कीमतों में खरीदारी को लेकर बेहतर समझ का प्रदर्शन करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. दुनिया के सबसे बड़े तेल खरीदार देशों में शुमार भारत और चीन कम कीमत पर तेल खरीदने में अपनी शक्ति का लाभ उठा रहे हैं. इसके लिए दोनों तेल आयातक देश तेल खरीदार क्लब की स्थापना कर सस्ते दाम पर क्रूड ऑयल खरीदने की योजना पर काम कर रहे हैं. यह एक ऐसा गठजोड़ बनाने की कोशिश हो रही है जिसका असर आने वाले वर्षों में देखने को मिल सकता है.
सबसे बड़े तेल आयातकों में से दो भारत और चीन वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े मांग विकास केंद्र ओपेक की तेल उत्पादन में कटौती और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच कच्चे तेल के मूल्य निर्धारण और सोर्सिंग में एक तेल खरीदार क्लब की स्थापना के करीब बताए जा रहे हैं. भारतीय आउटलेट लाइवमिंट ने वेनेजुएला के अधिकारियों का हवाला देते हुए यह रिपोर्ट जारी की है. हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जबकि दो प्रमुख तेल आयातक इस तरह का तेल क्लब बनाने के लिए काम कर रहे हैं.
भारत और चीन ने तेल निर्यातक देशों के साथ बेहतर कीमतों पर बातचीत करने में सक्षम होने के लिए एक ‘ऑयल बायर्स क्लब’ बनाने पर चर्चा की है. तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के बोलबाले को कम करने के लिए दोनों देश दुनियाभर से अधिक कच्चे तेल का आयात करना चाह रहे हैं.
वैश्विक तेल बाजार और कीमतों पर भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय ने जून 2018 में कहा था कि “तेल उत्पादकों के कार्टेल ओपेक की कीमतों में तोलमोल करने के साथ भारत ने चीन के साथ एक ‘तेल खरीदार क्लब’ बनाने की संभावना पर चर्चा की है जो विक्रेताओं के साथ बेहतर शर्तों पर बातचीत कर सकता है. साथ ही यह क्लब तेल ब्लॉक के प्रभुत्व में कटौती के लिए अमेरिका से ज्यादा मात्रा में कच्चे तेल प्राप्त कर सकता है.” पेट्रोलियम मंत्रालय के ट्विटर अकाउंट के एक ट्वीट में पिछले साल के मध्य में कहा गया. यह बात उस दौरान आई थी जबकि ईरान के तेल उद्योग पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण तेल की कीमतें आगे बढ़ रही थी.
लाइवमिंट द्वारा उद्धृत अधिकारियों के अनुसार चीन और भारत ने तब से कई बार वरिष्ठ स्तर की यात्राओं का आदान-प्रदान किया है और “कच्चे तेल के संयुक्त स्रोत” पर प्रगति की है. तेल खरीदारों के क्लब को संभावित रूप से मजबूत बनाने में चीनी-भारतीय सहयोग की रिपोर्टें इस तरह आती हैं जैसे कि सभी ईरानी तेल ग्राहकों के लिए अमेरिकी मंजूरी छूट इस सप्ताह समाप्त हो जाती है.
चीन ईरान का नंबर एक ग्राहक बताया जाता है. जबकि भारत ईरानी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है. इसलिए अमेरिकी छूट का अंत ज्यादातर उन दो तेल आयातकों में रिफाइनर को प्रभावित करेगा जो अन्य स्रोतों से स्रोत क्रूड को खरीदेंगे.
तेल खरीदारों के क्लब के लाभों पर टिप्पणी करते हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने हाल ही में एक साक्षात्कार में ग्लोबल टाइम्स को बताया था कि चीन और भारत को तेल की कीमतों को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए अधिक सौदेबाजी की शक्ति को हथियाने के लिए ऐसा करना चाहिए.
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