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मन की बात में पीएम ने पद्म पुरस्कारों की पुरानी चयन प्रक्रिया पर उठाये सवाल, कहा- अब जमीन से जुड़े लोग करते हैं आवेदन

मन की बात में पीएम ने पद्म पुरस्कारों की पुरानी चयन प्रक्रिया पर उठाये सवाल, कहा- अब जमीन से जुड़े लोग करते हैं आवेदन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात-0.2 की ठवीं कड़ी में गणतंत्र दिवस पर देशवासिय़ों के सामने कई नई बातों को सामने रखा

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात-0.2 की ठवीं कड़ी में गणतंत्र दिवस पर देशवासिय़ों के सामने कई नई बातों को सामने रखा। प्रधानमंत्री ने पद्म पुरस्कारों की लोकप्रियता को लेकर कहा कि पिछले मार्च में एक वीडियो मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ था | चर्चा यह थी कि कैसे एक-सौ सात साल (107) की एक बुजुर्ग माँ, राष्ट्रपति-भवन समारोह में protocol तोड़कर राष्ट्रपति जी को आशीर्वाद देती है | यह महिला थी सालूमरदा थिमक्का, जो कर्नाटक में ‘वृक्ष माता’ के नाम से प्रख्यात हैं | और वो समारोह था, पद्म-पुरस्कार का | बहुत ही साधारण background से आने वाली थिमक्का के असाधारण योगदान को देश ने जाना, समझा और सम्मान दिया था | उन्हें पद्मश्री सम्मान मिल रहा था|
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत अपनी इन महान विभूतियों को लेकर गर्व की अनुभूति करता है| जमीन से जुड़े लोगों को सम्मानित कर गौरवान्वित महसूस करता है| मेरा आग्रह है कि आप सब इन लोगों के बारे में ज़रूर पढें| इनके योगदान के बारे में परिवार में चर्चा करें| 2020 के पद्म-पुरस्कारों के लिए इस साल 46 हज़ार से अधिक नामांकन प्राप्त हुए हैं| ये संख्या 2014 के मुक़ाबले 20 गुना से भी अधिक है | आज पद्म- पुरस्कारों की सारी प्रक्रिया online है | पहले जो निर्णय सीमित लोगों के बीच होते थे वो आज, पूरी तरह से people-driven है | एक प्रकार से कहें तो पद्म-पुरस्कारों को लेकर देश में एक नया विश्वास और सम्मान पैदा हुआ है | अब सम्मान पाने वालों में से कई लोग ऐसे होते हैं जो परिश्रम की पराकाष्ठा कर ज़मीन से उठे हैं | सीमित संसाधन की बाधाओं और अपने आस-पास की घनघोर निराशा को तोड़कर आगे बढ़े हैं | दरअसल उनकी मजबूत इच्छाशक्ति सेवा की भावना और निस्वार्थ-भाव, हम सभी को प्रेरित करता है | मैं एक बार फिर सभी पद्म-पुरस्कार विजेताओं को बधाई देता हूँ | और आप सभी से उनके बारे में पढ़ने के लिए, अधिक जानकारी जुटाने के लिए विशेष आग्रह करता हूँ | उनके जीवन की असाधारण कहानियाँ, समाज को सही मायने में प्रेरित करेंगी |
पीएम ने कहा कि ‘गगनयान’ की दिशा में देश एक और कदम आगे बढ़ चला है| 2022 में, हमारी आज़ादी के 75 साल पूरे होने वाले हैं | और उस मौक़े पर हमें ‘गगनयान मिशन’ के साथ एक भारतवासी को अन्तरिक्ष में ले जाने के अपने संकल्प को सिद्ध करना है | ‘गगनयान मिशन’, 21वीं सदी में science & technology के क्षेत्र में भारत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगा | नए भारत के लिए, ये एक ‘मील का पत्थर’ साबित होगा|
इस मिशन में astronaut यानी अंतरिक्ष यात्री के लिए 4 उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया है | ये चारों युवा भारतीय वायु-सेना के पायलट हैं | ये होनहार युवा, भारत के कौशल, प्रतिभा, क्षमता, साहस और सपनों के प्रतीक हैं | हमारे चारों मित्र अगले कुछ ही दिनों में training के लिए रूस जाने वाले हैं| इन्हें एक साल से अधिक समय तक प्रशिक्षण दिया जायेगा | इसके बाद देश की आशाओं और आकांक्षाओं की उड़ान को अंतरिक्ष तक ले जाने का दारोमदार, इन्हीं में से किसी एक पर होगा|
त्रिपुरा में बसाई जाएगी शरणार्थी ब्रू-रियांग जनजाति
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दो सप्ताह पहले, भारत के अलग अलग हिस्सों में अलग-अलग त्योहारों की धूम थी| जब पंजाब में लोहड़ी, जोश और उत्साह की गर्माहट फ़ैला रही थीं | तमिलनाडु की बहनें और भाई, पोंगल का त्योहार मना रहे थे, तिरुवल्लुवर की जयंती celebrate कर रहे थे | असम में बिहू की मनोहारी छटा देखने को मिल रही थी, गुजरात में हर तरफ उत्तरायण की धूम और पतंगों से भरा आसमान था | ऐसे समय में दिल्ली, एक ऐतिहासिक घटना की गवाह बन रही थी | दिल्ली में, एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किये गए | इसके साथ ही, लगभग 25 वर्ष पुरानी ब्रू-रियांग (Bru-Reang) refugee crisis एक दर्दनाक chapter, का अंत हुआ हमेशा– हमेशा के लिए समाप्त हो गयी | ये समस्या 90 के दशक की है | 1997 में जातीय तनाव के कारण BruReang जनजाति के लोगों को मिज़ोरम से निकल करके त्रिपुरा में शरण लेनी पड़ी थी| इन शरणार्थियों को North Tripura के कंचनपुर स्थित अस्थाई कैम्पों में रखा गया | यह बहुत पीड़ा दायक है कि BruReang समुदाय के लोगों ने शरणार्थी के रूप में अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खो दिया | 23 साल तक – न घर, न ज़मीन, न परिवार के लिए, बीमारियों के लिए इलाज़ का प्रबंध और ना बच्चों के शिक्षा की चिंता या उनके लिए सुविधा | 23 साल तक कैम्पों में कठिन परिस्थितियों में जीवन-यापन करना, उनके लिए कितना दुष्कर रहा होगा | अब उनके जीवन  में आज एक नया सवेरा आया है | समझौते के तहत, अब उनके लिए गरिमापूर्ण जीवन जीने का रास्ता खुल गया है | आखिरकार 2020 का नया दशक, Bru-Reang समुदाय के जीवन में एक नई आशा और उम्मीद की किरण लेकर आया | करीब 34000 ब्रू-शरणार्थियों को त्रिपुरा में बसाया जाएगा | इतना ही नहीं, उनके पुनर्वास और सर्वांगीण-विकास के लिए केंद्र सरकार लगभग 600 करोड़ रूपए की मदद भी करेगी | प्रत्येक विस्थापित परिवार को भूखंड दिया जाएगा | घर बनाने में उनकी मदद की जाएगी | इसके साथ ही, उनके राशन का प्रबंध भी किया जाएगा | वे अब केंद्र और राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे | ये समझौता कई वजहों से बहुत ख़ास है | ये Cooperative Federalism की भावना को दर्शाता है | समझौते के लिए मिज़ोरम और त्रिपुरा, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री मौज़ूद थे |

 


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