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#AyodhyaCase में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को मिला न्याय, जन्मभूमि पर मंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट बनाने का निर्देश

#AyodhyaCase में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को मिला न्याय, जन्मभूमि पर मंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट बनाने का निर्देश
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
#AyodhyaCase में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है. श्रीराम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर शनिवार को देश का सबसे बड़ा फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने रामलला को जमीन का मालिकाना हक सौंप दिया है. रामजन्मभूमि न्यास बोर्ड को जमीन सौंप दी गई है. मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही किसी स्थान पर 5 एकड़ जमीन देने को कहा है. सुन्नी वक्फ बोर्ड जमीन मिलने के तुरंत बाद उसका इस्तेमाल कर सकता है. पक्षकार गोपाल विशारद को पूजा का अधिकार भी मिल गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि तीन महीने में वह ट्रस्ट का गठन करे. ट्रस्ट के गठन के साथ ही अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर निर्माण शुरू हो जाएगा. इसके साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी अयोध्या में प्रामिनेंट स्थान पर 5 एकड़ जमीन सौंपी जाएगी. वक्फ बोर्ड जमीन मिलते ही अपनी गतिविधियों को शुरू कर सकेगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि फैसले का आधार आस्था और विश्वास नहीं, बल्कि कानूनी आधार पर फैसला दिया गया है.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में यह भी ध्यान रखा कि मुस्लिम पक्ष को भी न्याय हासिल हो. यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज करने की वजहें भी साफ कर दीं.
संविधान पीठ के जजों की टिप्पणियां धीरे-धीरे सामने आ रही हैं. फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के बाहर खड़े अधिवक्ता दावा कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट मुस्लिमों को दूसरी जगह पर मस्जिद बनाने के लिए जमीन दी जाए. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को भी पलट दिया है. हाईकोर्ट के तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सही नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने रामलला का जमीन पर दावा स्वीकार कर लिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिन्दुओं की आस्था गलत होने का कोई प्रमाण नहीं है. अंग्रेजों के समय तक नमाज के कोई सुबूत नहीं हैं. 18वीं शती तक वहां नमाज का कोई सुबूत नहीं है. ढांचे का गिराना कानून व्यवस्था का उलंघन है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम के पास विशेष कब्जा नहीं था. विवादित जमीन पर मालिकाना हक मुस्लिम साबित नहीं कर पाए. मुस्लिम पक्ष जमीन पर कब्जा साबित करने में विफल रहा है. हिन्दुओं की आस्था रही है कि भगवान राम का जन्म वहीं पर हुआ था. आस्था और विश्वास पर कोई सवाल नहीं हुआ था. सुन्नी वक्फ बोर्ड को शूट फाइल करने का अधिकार नहीं है.
कोर्ट ने सीता रसोई, सिंह द्वार, परिक्रमा परिपथ होने की बात भी माना है. हिन्दू सीता रसोई में पूजा करते थे. कोर्ट ने कहा कि आस्था और विश्वास पर मालिकाना हक नहीं मिल सकता. मंदिर गिराकर मस्जिद बनाने का जिक्र एएसआई की रिपोर्ट में नहीं है. 12वीं से 16वीं सदी में वहां क्या था, रिपोर्ट में इसके सुबूत भी नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी. इससे सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट को आधार माना है. कोर्ट ने कहा वहां पर पहले मंदिर था. एएसआई की रिपोर्ट से साफ है कि बाबरी मस्जिद के पहले वहां पर कोई ढांचा था. खुदाई में जो मिला वह इस्लामिक ढांचा नहीं था. भगवान श्री राम अयोध्या में पैदा हुए थे, इसमें कोई विवाद नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मत ने शिया वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज कर दी गई है. निर्मोही अखाड़े की याचिका भी खारिज कर दी गई है. निर्मोही अखाड़े का सूट खारिज कर दी गई है. निर्मोही अखाड़ा ने राम जन्मभूमि पर मालिकाना हक का दावा किया था.
चीफ जस्टिस ने कहा कि बाबर के समय मीर बाकी ने मस्जिद बनाई गई. 22-23 दिसंबर 1949 की रात मूर्तियां रखी गई. यह जमीन नजूल की है. इसे लेकर कोई विवाद नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता है. सुन्नी वक्फ बोर्ड का ईदगाह का तर्क भी खारिज कर दिया है.

 


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