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#AyodhyaCase में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जैसे मुस्लिमों के लिए मक्का, वैसे ही हिन्दुओं के लिए है अयोध्या

#AyodhyaCase में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जैसे मुस्लिमों के लिए मक्का, वैसे ही हिन्दुओं के लिए है अयोध्या
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में आज एक घंटे ज्यादा समय तक सुप्रीम कोर्ट सुकिनवाई करेगा. इसके साथ ही अब प्रत्येक मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को एक घंटे ज्यादा समय तक सुनवाई चलेगी. हालांकि, शुक्रवार को दोपहर एक बजे तक ही सुनवाई होगी. उधर, मुस्लिम पक्षकारों के अधिवक्ता राजीव धवन की ओर से हिन्दुओं की आस्था और विश्वास को दी जा रही चुनौती पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की. कोर्ट ने सोमवार को कहा कि यदि वह हिन्दुओं की आस्था और विश्वास को चुनौती देंगे तो उनके लिए मुश्किल होगी. जैसे मुसलमानों के लिए मक्का है वैसे ही हिन्दुओं के लिए अयोध्या है. सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सदस्य जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की यह टिप्पणी उस वक्त आई है जबकि अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष की बहस चल रही है. मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता लगातार यह दलील दे रहे हैं कि हिन्दुओं का विश्वास है कि वहां राम का जन्म हुआ था. यह केवल आस्था और विश्वास पर आधारित है. इसके लिए कोई साक्ष्य नहीं है.
हालांकि, अधिवक्ता राजीव धवन अपने तर्क पर डटे रहे. उन्होंने विवादित भूमि पर मुसलमानों का दावा जताते हुए फिर कहा कि आस्था के आधार पर जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति नहीं माना जा सकता है. धवन ने जन्मस्थान को देवता और न्यायिक व्यक्ति माने जाने का विरोध किया. उन्होंने कहा कि जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति कहने की अवधारणा का जन्म 1989 में हुआ जब रामलला की ओर से मालिकाना हक का मुकदमा दाखिल हुआ. उस मुकदमे में रामलला विराजमान के अलावा जन्मस्थान को अलग से पक्षकार बनाया गया. धवन की इस दलील पर जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि इससे पहले ऐसा कहने का मौका कब आया था. जस्टिस चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि अगर रामलला और जन्मस्थान दोनों को न्यायिक व्यक्ति माना जाता है तो इसके क्या परिणाम होंगे. यदि सिर्फ रामलला (मूर्ति) को ही न्यायिक व्यक्ति माना जाता है तो उसका क्या परिणाम होगा.
धवन ने तर्क दिया कि इस मुकदमें में सोच-समझकर कर जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति मानते हुए अलग से पक्षकार बनाया गया है. ताकि इस पर प्रतिकूल कब्जे और समयसीमा का नियम लागू न हो. मुकदमे सभी दावों से मुक्त हो जाएं. धवन ने कहा कि दोनों या उनमें से किसी एक को न्यायिक व्यक्ति मानने का परिणाम समान होगा. धवन ने जन्मभूमि की परिक्रमा के बारे में गवाहों के बयानों में अंतर होने की बात कही तो जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि परिक्रमा की गवाहियां उस जगह की पवित्रता के बारे में बताती हैं. धवन ने कहा कि देवता हमेशा नाबालिग होते हैं. इसलिए समयसीमा का नियम उन पर लागू नहीं होता, की दलील मानने योग्य नहीं है.
धवन ने कहा कि इस बात में कोई विवाद नहीं है कि राम का जन्म अयोध्या में हुआ था लेकिन हिन्दू पक्ष उनके जन्म का निश्चित स्थान नहीं बता पाया है. उन्होंने कहा कि स्रिर्फ स्कंद पुराण और हेंस बेकर यात्री की किताब के हवाले से निश्चित स्थान बताते हैं.
धवन ने देवता और मंदिर के लिए कोई आकार होने की दलील देते हुए कहा कि हर स्थान पवित्र नहीं माना जा सकता. स्थान को न्यायिक व्यक्ति या पवित्र स्थान मानने के लिए उसमें दिव्यता के अलावा पवित्रता का जो अनुष्ठान होता है, वह होना चाहिए. वैदिक काल में लोग नदी, पहाड़, सरोवर आदि का सम्मान करते थे, उस वक्त मूर्ति की पूजा नहीं होती थी. इस पर जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि मूर्ति के बिना भी मंदिर होता है. उन्होंने तमिलनाडु के चिदंबरम मंदिर का हवाला दिया और कहा कि वह मंदिर आकाश का है. उन्होंने चिदंबरम का अर्थ भी बताया.

 


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