Nationalwheels

रूस में वैक्सीन का मानव परीक्षण पूरा, जानिए भारत की क्या है स्थिति

रूस में वैक्सीन का मानव परीक्षण पूरा, जानिए भारत की क्या है स्थिति
पूरी दुनिया में कोरोना वायरस की वैक्सीन पर काम चल रहा है, इस बीच रूस से एक अच्छी खबर आई है। रूस के शेनोव यूनिवर्सिटी में दुनिया की पहली कोरोना वायरस वैक्सीन का परीक्षण पूरा कर लिया गया है। ट्रांसलेशनल मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक वुतिन तरासोव के अनुसार कि जिन लोगों पर वैक्सीन का परीक्षण किया गया है, उसमें से पहले समूह को बुधवार को और दूसरे समूह को 20 जुलाई को अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी।
भारत स्थिति रूसी एंबेसी ने ट्वीट कर ट्रायल के सफल होने की जानकारी दी है। ट्वीट में लिखा, “रूस की शेनोव शेनोव यूनिवर्सिटी ने वॉलंटियर्स पर कोरोना की वैक्सीन का ह्यूमन ट्रयाल किया है, जो कि सफल रहा। मुख्य शोधकर्ता ऐलेना स्मोलिआर्चुक ने टीएएसए (TASS) को बताया कि वैक्सीन सुरक्षित है और 15 और 20 जुलाई को वॉलंटियर्स डिस्चार्ज होंगे।
बता दें कि रूस में भी कोरोने वायरस के संक्रमण की संख्या बढ़ती जा रही है। विश्व में सबसे ज्यादा संक्रमित देशों की सूची में रूस चौथे नंबर है।
भारत में वैक्‍सीन पर काम जारी
वहीं भारत में भी वैक्सीन पर काम चल रहा है। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने बताया था कि भारत में कोरोना की 14 वैक्सीन पर काम चल रहा है। आपको बता दें कि इनमें दो वैक्सीन क्लिनिकल ह्यूमन फेज के पहले चरण के लिए तैयार हैं।
साथ ही ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, ब्रिटिश-स्वीडिश कंपनी एस्ट्राजेनेका और पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी ऑक्सफोर्ड वैक्सीन कंसोर्टियम में शामिल हैं। हालाकि माना जा रहा है कि ऑक्सफोर्ड वैक्सीन अगर सफल होती है तो लॉन्च होने के छह महीने बाद कोविड वैक्सीन जनता को उपलब्ध हो सकती है।
इंडियन काउंसिल मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की निगरानी में बन रही भारत बायोटेक की कोवाक्सिन भी ह्मयूमन ट्रायल के लिए तैयार है। लेकिन वैक्सीन के लिए अभी लोगों को कुछ महीने और इंतजार करना पड़ सकता है। हांलाकि रूस के सफल परीक्षण ने दुनिया को उम्मीद दी है, जो कोरोना से जंग में एक नई ऊर्जा लेकर आएगा।
भारत में किस स्टेज में क्या है प्रक्रिया
प्ररसार भारती से बातचीत में आईसीएमआर के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. रमन आर गंगाखेडकर ने बताया कि कोवैक्सिन का जानवरों पर ट्रायल हो चुका है। अब ह्यूमन ट्रायल शुरू होगा। मानव पर तीन स्तर का ट्रायल होते हैं। पहली स्टेज में देखा जाता है कि वैक्सीन सेफ है या नहीं। इसी दौरान ये भी देखा जाता है कि वैक्सीन लेने वाले में एंटीबॉडी बन रहे हैं या नहीं। दूसरी स्टेज में देखा जाता है कि कोई साइड इफेक्ट तो नहीं। एक साल या 6 महीने के अंदर कोई दुष्परिणाम होते हैं या नहीं।
उन्होंने आगे बताया कि तीसरी स्टेज में ये देखा जाता है कि वैक्सीन देने के बाद कितने लोगों को नए सिरे से बीमारी होती है या नहीं। चौथी स्टेज की प्रक्रिया ट्रायल मोड में नहीं होती। उसमें आम लोगों को जब वैक्सीन देना शुरू करते हैं, तो देखा जाता है कि अगले दो साल तक कोई साइड इफेक्ट तो नहीं आये। उसे पोस्ट मार्केटिंग सर्विलांस कहते हैं। उसके बाद वैक्सीन पर अंतिम निर्णय लिया जाता है।
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एनएन माथुर का कहना है कि वैक्सीन के लिए दुनिया भर में बहुत प्रयास हो रहे हैं। सारी प्रक्रिया फास्ट ट्रैक पर चल रही है। इसमें प्रशसनिक कार्यों को त्वरित ढंग से निबटाया जा सकता है, लेकिन वैज्ञानिक कार्यों में तो जितना समय लगता है, उतना लगेगा ही। फेज़-1, फेज़-2,फेज़-3 के ट्रायल होने हैं, जिनमें कोई कटौती नहीं की जा सकती है। हालांकि साल के अंत तक वैक्‍सीन की उम्मीद की जा सकती है।

 


Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *