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पाकिस्तान में हिन्दू महिलाएं असुरक्षित, एक महीने में 13 लड़कियों का धर्मांतरण

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

डॉ शंकर सुवन सिंह

हिन्दू लड़कियों के अपहरण ए जबरन धर्म परिवर्तन और मुस्लिम पुरुषों से उनकी जबर्दस्ती शादी की ख़बरों की पुष्टि पाकिस्तान के हिन्दू सांसद खईल दास ने कर दी द्य अभी हाल ही की घटना है होली के अवसर पर पाकिस्तान के सिंध के घोटकी से दो नाबालिग हिंदू बहनों को अगवाकर उनका धर्म परिवर्तन कर इस्लामिक रिवाज के अनुसार जबरन शादी करवाने का मामला सामने आया है।
पाकिस्तान में गठित हिंदू सेवा वेलफेयर ट्रस्ट के संजेश धंजा ने बताया कि दो बहनों को कुछ मुस्लिम युवा उस समय जबरदस्ती उठाकर ले गए जब हिंदू समाज होली मना रहा था।इससे पहले फरवरी में भी एक ईसाई लड़की सदफ खान का अपहरण कर लिया गया था जिसका बाद में धर्म परिवर्तन कर एक मुस्लिम से शादी करवा दी गई थी। सत्र दो हज़ार छ रू में १३ वर्ष की मरियम जो विवाहित थी।
विवाह पूर्व मरियम हिन्दू थी ए जिसका नाम माशू था। हथियार बंद लोगों ने माशू का जबरन धर्म परिवर्तन कराया था द्यवहां उसके पडोसी अकबर से उसका निकाह हो गया था। माशू के पिता मालो ने मरियमपुर ख़ास जिला अदालत में अर्जी लगाई। अदालत ने माशू को दारुल अमन भेजने का आदेश दिया था। दारुल अमन में लड़कियों को माता पिता से दूर ले जाकर अपहर्ताओं के पक्ष में बयान देने के लिए दवाब डाला गया था।
पिछले दिनों पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दो नाबालिग हिन्दू बहनों के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और निकाह ने फिर जोर पकड़ा है। लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करने वाली मलाला यूसुफजई ने भी इस मुद्दे को उठाया है।  गुरुवार को मलाला ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि पिछले एक महीने में सिंध प्रांत में 13 हिन्दू लड़कियों का धर्मांतरण किया गया है। यह घटनाएं एक देश में अल्पसंख्यक धर्म के लोगों पर हो रहा धार्मिक हमले जैसा है।

दारुल अमन में जिद्दी लड़कियों को जान से मारने की धमकी देकर काबू में किया जाता है। पाकिस्तान में उच्च पद पर रहे हिन्दू चीफ जस्टिस राणा भगवान दास, टेस्ट क्रिकेट खिलाड़ी दानिश कनेरिया, पूर्व विकेट कीपर अनिल दलपत और फैशन डिज़ाइनर दीपक परेवानी आदि पकिस्तान का नाम रोशन कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान की सरकार हिन्दुओं की रक्षा के लिए क्या कर रही ह? पाकिस्तान में अल्पसंख्यक असुरक्षित है। भारत सरकार को पाकिस्तान में हिन्दू महिलाओं के धर्म परिवर्तन सम्बन्धी मामलों में सख्त कदम उठाने की जरुरत है।
लेखकः सैम हिग्गिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज में वार्नर कॉलेज ऑफ़ डेयरी टेक्नोलॉजी असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।

 

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