Nationalwheels

शैक्षिक न्यायाधिकरण लखनऊ में स्थापित करने के मुद्दे पर घिरी सरकार

शैक्षिक न्यायाधिकरण लखनऊ में स्थापित करने के मुद्दे पर घिरी सरकार
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
सौरभ सिंह सोमवंशी
प्रयागराजः उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा सेवा अधिकरण लखनऊ में स्थापित करने का कानून पास कर राष्ट्रपति के समक्ष भेज दिया है। हालांकि, अभी यह कानून नहीं बन पाया है लेकिन इसके विरोध में उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालय इलाहाबाद के अधिवक्ता लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, साथ ही साथ इसके समर्थन में उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ के अधिवक्ता भी न्यायिक कार्य नहीं कर रहे हैं।
प्रयागराज के अधिवक्ता राज्य शिक्षा सेवा अधिकरण बिल की प्रतियां जला रहे हैं दूसरी तरफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को जिम्मेदार मानते हुए तल्ख टिप्पणी की है कि उत्तर प्रदेश सरकार न्याय व्यवस्था को पंगु बना रही है । स्वयं संज्ञान ले कर याचिका पर उसने आदेश दिया है कि वृहद पीठ गठित कर मामले का हल निकाला जाए। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और राजीव मिश्रा ने अधिवक्ताओं की हड़ताल से प्रयागराज और लखनऊ में न्यायिक कार्य में बाधा होने पर ये आदेश दिया है।
राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 में यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश का उच्च न्यायालय इलाहाबाद में स्थित है। इसके अलावा भारत के उच्चतम न्यायालय ने अपने कई फैसलों में यह कहा है कि किसी भी प्रदेश का उच्च न्यायालय जहां पर स्थित हो वहीं पर अधिकरण भी स्थापित होना चाहिए इसके बावजूद यदि राज्य सरकार ने शिक्षा सेवा अधिकरण लखनऊ में स्थापित करने के कानून को पास कर राष्ट्रपति के समक्ष भेज दिया है तो यह नजरअंदाज करने का मामला है ।कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार पर त्वरित न्याय दिलाने की जवाबदेही होती है परंतु सरकार का ये फैसला समझ से परे है।
इस मामले पर जब हाई कोर्ट इलाहाबाद बार एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष और प्रयागराज अस्तित्व बचाओ संघर्ष समिति के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं जिसमें से 63 जिले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायिक क्षेत्र में आते हैं सिर्फ 12 जिले ऐसे हैं जो लखनऊ खंडपीठ के अंतर्गत आते हैं इस तरह से शैक्षिक न्यायाधिकरण को लखनऊ में कैसे स्थापित किया जा सकता है।
42 वें संविधान संशोधन के दौरान अधिकरण के गठन के उपबंधों को संविधान में जोड़ा गया था जिसमें अनुच्छेद 323a में प्रशासनिक अधिकरण गठित करने का अधिकार तथा 323b में अन्य मामलों में अधिकरण गठित करने का अधिकार भारत सरकार को दिया गया है। हालांकि अनुच्छेद 21a में शिक्षा को मूल अधिकार में शामिल किया गया है जिसका दायित्व राज्य का होता है परंतु इसके विपरीत अध्यापक अथवा शिक्षक लोक सेवक नहीं होता है ।भले ही वह लोक कार्य करता है इस तरह से जब यह बिल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के उपरांत वैधानिकता प्राप्त कर लेगा तब इसके अदालत में टिक पाने की संभावना भी कम ही है।

 

Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *