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Exclusive_अमेरिकी अदालत में गूगल जीता लेकिन डिटिजल भारत में भी ये खतरा अब भी है बरकरार

Exclusive_अमेरिकी अदालत में गूगल जीता लेकिन डिटिजल भारत में भी ये खतरा अब भी है बरकरार
        
यह खबर सीधे तौर पर भारत से जुड़ी हुई नहीं है लेकिन बैंक खातों के डिजिटलीकरण, अॉनलाइन भुगतान से भी चार कदम आगे की धोखाधड़ी से सावधान होने के लिए आगाह जरूर करती है. वजह, सॉफ्टवेयर के जरिए किसी भी आदमी के बॉयोमेट्रिक डाटा को चोरी किया जा सकता है. अमेरिकी कानून इस मामले में सख्त हैं लेकिन भारत में अभी इस दिशा में काफी काम किया जाना शेष है. सो, डिजिटल भारत में भी इस मुकदमे के बारे में जानकारी होना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि डिजिटलीकरण की अंधी दौड़ में सुरक्षा के तमाम मानकों को अनदेखा किया जा रहा है. 
दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल के खिलाफ की गई एक शिकायत को अमेरिका की शिकागो स्थित अदालत ने खारिज कर दिया है. अदालत ने याचिका में ठोस प्रमाण न होने की बात कही है. 
फिलहाल, खोज इंजन की फोटो साझा करने और भंडारण सेवा का दावा करने वाले उपभोक्ताओं की ओर से Google के खिलाफ दायर एक मुकदमे में दावा किया गया था कि उनकी गोपनीयता का उल्लंघन किया गया. शनिवार को हुई सुनवाई में अमेरिकी न्यायाधीश द्वारा ठोस प्रमाण की कमी का हवाला देकर उसे खारिज कर िदया गया.
न्यूज एजेंसी रायटर के अनुसार शिकागो में अमेरिकी जिला न्यायाधीश एडमंड चांग ने सारांश निर्णय के लिए Google को प्रस्ताव दिया, जिसमें कहा गया था कि अदालत के पास “विषय वस्तु अधिकार क्षेत्र का अभाव है क्योंकि वादी के पास ठोस प्रमाण नहीं है.
यह मुकदमा मार्च 2016 में दायर किया गया था. कथित तौर पर अल्फाबेट इंक से Google ने अपनी Google फ़ोटो सेवा के माध्यम से बिना उनकी अनुमति के सॉफ्टवेयर का उपयोग करके लोगों की तस्वीरों से चेहरे की पहचान कर बॉयोमीट्रिक डेटा एकत्र किया है. इससे इलिनोइस राज्य के कानून का उल्लंघन किया.
अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, वादी ने राज्य के निवासियों के लिए सामूहिक रूप से पांच मिलियन डॉलर से अधिक की मांग की थी. अदालत के दस्तावेजों में कहा गया है कि वादी ने इलिनोइस बायोमेट्रिक सूचना गोपनीयता अधिनियम का जानबूझकर उल्लंघन के लिए $5,000 या प्रत्येक लापरवाह उल्लंघन के लिए $1,000 के लिए अदालत से मांग की थी.
अभियोगी के साथ-साथ Google के अधिकारी भी टिप्पणी करने के लिए तुरंत नहीं पहुँच सके. Google ने अदालत के दस्तावेजों में तर्क दिया था कि वादी पैसे या निषेधाज्ञा राहत के हकदार नहीं थे क्योंकि उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ था. मामला अमेरिकी जिला न्यायालय के उत्तरी जिला इलिनोइस में नंबर 16-02714 रिवेरा बनाम गूगल का है.
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