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गंगा दशहरा पर घाटों पर जुटी भीड़, गंगा आरती ने मन मोहा

गंगा दशहरा पर घाटों पर जुटी भीड़, गंगा आरती ने मन मोहा

उमा शंकर गुप्ता

प्रयागराजः  गंगा दशहरा पर गंगा किनारे भक्तों की सुबह से देर शाम तक भीड़ रही। लॉकडाउन से मिली छूट और त्योहार की जुगलबंदी होते ही लोग संगम स्नान के लिए दौड़ पड़े। शाम को गंगा आरती के आयोजन भी हुए।
तीर्थराज प्रयाग के नैनी अरैल गंगा महाकाल सेवा ट्रस्ट की ओर से गंगा की विशेष आरती का आयोजन भारी संख्या में भक्तों की मौजूदगी में पूरा गंगा तट भक्तिमय हो गया। इस विशेष आरती में अखिल भारतीय सन्त समिति राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष जगतगुरु स्वामी वैदेही बल्लभ देवाचार्य जी महाराज ने बताया की पतित पावनी मां गंगा के “दिवस सनातन धर्म का एक महापर्व है। मां पतित पावनी गंगा संपूर्ण विश्व को अपनी कृपा से उद्धार करती हैं। सुंदर प्रकृति को निर्माण करती हैं। पर्यावरण को शुद्ध करती हैं, ऐसे पतित पावनी मां गंगा के गंगा दशहरा का वैदिक सनातन धर्म महोत्सव मनाया करता है।
देवाचार्य ने यह भी कहा कि मां गंगा जी ने राजा सागर के पुत्रों का उद्धार करने के लिए भागीरथी केसरिया के कारण इस वसुंधरा में आई जिसका संपूर्ण विश्व संपूर्ण भारत मां गंगे की अविरलता, निर्मलता के जल के प्रभाव को कई वैज्ञानिकों ने शोध किया एक गंगाजल ही ऐसा जल है जिसको अनेकों वर्ष रखने के बाद भी किसी प्रकार के कीटाणु नहीं पड़ते हैं ऐसे प्रत्यक्ष मोक्ष दायिनी पतित पावनी गंगा माँ का गंगा दशहरा करके अपने आप को धन्य करने के लिए समाज को एक अच्छी दिशा देने के लिए भागीरथी जी ने यह तप करके वसुंधरा में गंगा मैया को प्रवाहित कराया।
उन्न्होंने आम जन मानस को सन्देश दिया की हम सबका कर्तव्य है। मा गंगा के आँचल को साफ सुथरा रक्खे किसी प्रकार के कूड़े करकट ना डालें गंगा को निर्मल शुद्ध बनाए रखें यही गंगा माता का असल भक्ति होगी। महाराज जी ने यह भी कहा की गंगा आरती के आयोजन से आम जन मानस में भक्ति भाव पैदा होता है। जब तक लोगो मे भक्ति भाव पैदा नही होगा तब तक गंगा स्वच्छ एव निर्मल नही होंगी।
का आयोजन किया जा रहा है इस आरती का मकसद है कि लोगों में गंगा के प्रति भक्ति भाव पैदा करना है।जिससे मां गंगा का आंचल स्वच्छ एवं निर्मल हमेशा बनी रहे।

 


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