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योगी राज में सड़कों पर नहीं होगी शुक्रवार की नमाज, डीजीपी ने सुनाया फरमान

योगी राज में सड़कों पर नहीं होगी शुक्रवार की नमाज, डीजीपी ने सुनाया फरमान
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
सड़क पर जाम लगाकर नमाज पढ़ने पर रोक लगाने का अलीगढ़ और मेरठ में हुआ प्रयोग अब पूरे उत्तर प्रदेश में लागू हो गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार को राज्य में सड़कों पर “नमाज़” पढ़ने पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह ने कहा, “विशेष अवसरों खासकर त्योहारों पर नमाज अदा करने के लिए बड़ी भीड़ इकट्ठा होती है, तो सड़क पर नमाज की अनुमति जिला प्रशासन द्वारा दी जा सकती है, लेकिन हर शुक्रवार की प्रार्थना के दौरान इस प्रथा को नियमित नहीं होने दिया जाएगा।” सभी जिला पुलिस प्रमुखों और अन्य अधिकारियों को इस पर रोक लगाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सड़कों को अवरुद्ध करके कोई नमाज नहीं पेश कर सके।

डीजीपी ने कहा कि शुरुआत में अलीगढ़ और मेरठ में इसी तरह का प्रतिबंध लगाया गया था। अब इसे पूरे राज्य में लागू करने की कोशिश की जा रही है। अलीगढ़ जिला प्रशासन ने सड़कों पर एक विस्तृत सूचना प्रतिबंध नमाज पर जारी किया था। इसे सफलतापूर्वक लगाया गया है।

हिंदू संगठनों ने इस प्रथा के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए मंगलवार और शनिवार को कई जिलों में सड़कों पर ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करना शुरू कर दिया था, जो धीरे-धीरे दो समुदायों के बीच टकराव का मार्ग प्रशस्त कर रहा था। डीजीपी ने कहा कि जिले के अधिकारियों को मौलवियों और मस्जिद प्रशासन के साथ बैठक करने के लिए कहा गया था ताकि उन्हें यह पता चल सके कि सड़कों पर नमाज सुगम यातायात प्रवाह को कैसे बाधित करता है और अन्य समस्याएं पैदा करता है।

उन्होंने कहा कि अन्य धार्मिक समुदायों को भी सड़कों पर धार्मिक समारोहों को आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस बीच, सुन्नी मौलवी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा: “कुछ ही मस्जिदें हैं जहां मुसलमान परिसर के बाहर नमाज अदा करते रहे हैं।

उन्होंने कहा, “पहले भी हमने मुसलमानों से अपील की थी कि वे सड़क पर जाम लगाकर नमाज़ न अदा करें क्योंकि इससे अन्य लोगों को असुविधा होती है। ऐसे उदाहरण भी आए जब लोगों ने मस्जिद की छत पर नमाज़ पढ़ी। हमने लोगों को अन्य मस्जिदों में जाने का सुझाव दिया है।”

गौरतलब है कि अलीगढ़ में प्रशासन ने मस्जिद संचालकों और मौलवियों से बातचीत कर व्यवस्थित तरीके से लागू किया है। छिटपुट स्थानों को छोड़कर कहीं भी विरोध के स्वर नहीं उठे। बल्कि, लोगों ने इसमें सहयोग किया है।

 

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