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#FreedomFighter सेनानी की ज़ुबानी स्वतंत्रता की कहानी: दाल में कंकड़ डाल कर परोसते थे अंग्रेज

#FreedomFighter सेनानी की ज़ुबानी स्वतंत्रता की कहानी: दाल में कंकड़ डाल कर परोसते थे अंग्रेज
देश अपनी आज़ादी की 74वीं वर्षगांठ कल शनिवार को मनायेगा। करीब 200 साल के अंग्रेजी शासन के बाद मिली आज़ादी के नायकों के बारे में तमाम बातें आपने इतिहास की किताबों में पढ़ी होंगी लेकिन अगर इतिहास के गवाह स्‍वयं आपके सामने बैठे हों तो कैसा लगेगा। जी हां हम बात कर रहे हैं स्वतंत्रता सेनानी लाजपत राय जी की। उनकी बात सुनते वक्त हमारी और आपकी आंखों में केवल वही काल्‍पनिक दृश्‍य बनते नज़र आयेंगे जो हमने किताबों में पढ़े हैं, लेकिन उनकी आंखों में धुंधली यादें आज भी ताज़ा होती दिखाई देती हैं।
स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर लाजपत राय जी ने अपने अनुभव साझा किए। 5 सितंबर 1939 को लाजपत राय राजौरा जिले से सत्याग्रह में शामिल हुए। लाजपत राय जैसे ही आंदोलन में सक्रिय हुए, अंग्रेजी हुकूमत ने उनको जेल में डाल दिया। उन्‍हें दो साल तक जेल की सजा काटनी पड़ी। वे बताते हैं कि उनके साथ-साथ उनके कई साथियों को भी सजा सुनायी गई थी। तब उनकी उम्र 18 वर्ष की थी। वे बताते हैं कि जिन सत्‍याग्रहियों के साथ मिलकर उन्होंने आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लिया उनमें वे सबसे छोटे थे। 20 से 30 सत्‍याग्रहियों को एक बाड़ी में रखा जाता था, जिसमें केवल एक शौचालय होता था।
उन्‍होंने कहा, “भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का अनुभव बेहद कठिन था। हमारे ऊपर बड़े अत्याचार किए गए। हमको बड़ी-बड़ी यातनाएं दी गईं। हर प्रकार से दबाव डाला गया। बंदी बनाने के बाद अंग्रेज़ हम लोगों से पत्थर बीनने का काम करवाते थे और नहीं करो तो कोड़े मारते थे। कभी-कभी हमारे खाने में कंकड़ डाल दिए जाते थे। कई बार तो भोजन के वक्त दाल में आधे कंकड़ निकलते थे। उनका जब मन आता था, मारना-पीटना शुरू कर देते थे, लेकिन हम संगठित रहते थे।”
जिस समय लाजपत राय जेल में बंद थे, तब हर दम एक सिपाही उनके आगे-पीछे रहता था, क्योंकि वे कहीं भी होते थे, अपना प्रचार जारी रखते थे। उन्‍होंने बताया कि आपराधिक मामलों में बंद कैदियों के द्वारा उनके और उनके साथियों के ऊपर दबाव बनाया जाता था। उन्‍होंने बताया, “हमारे पास कोई साधन नहीं होते थे। हमें अखबार वगैरह नहीं दिया जाता था। वो समय बेहद कठिन था।”
भविष्‍य के भारत को किस तरह देखते हैं?
इस सवाल पर लाजपत राय ने कहा, “मैं अपने भारत को बहुत अच्‍छी दिशा में जाते देख रहा हूं। अगर पीएम नरेंद्र मोदी 10-12 साल प्रधानमंत्री बने रहे तो भारत विश्‍व का सबसे शक्तिशाली देश बन जाएगा। आज भारत विश्‍व विजयी हो रहा है। हमारी यंग जैनरेशन बहुत टैलेंटेड है, उसको गाइड करने वाला चाहिए, उसका नेतृत्व करने वाला चाहिए और पीएम मोदी के अंदर वो सारे गुण हैं।”
(स्रोत-प्रसार भारती)

 


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