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पूर्व सांसद अतीक की पेरोल खारिज, वाराणसी में नामांकन भी हुआ

पूर्व सांसद अतीक की पेरोल खारिज, वाराणसी में नामांकन भी हुआ
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
विधि संवाददाता
प्रयागराजः केंद्रीय कारागार नैनी में निरुद्ध पूर्व सांसद अतीक अहमद की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रहीं हैं. एमपी/एमएलए कोर्ट ने अतीक अहमद की पेरोल याचिका सोमवार को खारिज कर दी. अतीक ने वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल किया था. उधर, वाराणसी में अतीक अहमद के प्रतिनिधि ने नामांकन के अंतिम दिन नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है. माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नामांकन पत्र दाखिल कर अतीक अहमद राजनैतिक सरगर्मी में अपना वजूद बचाए रखना चाहते हैं.
वाराणसी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने और प्रचार करने लिए शुआट्स नैनी के 2016 के मामले में अतीक अहमद की ओर से 3 हफ्ते के पेरोल (शार्ट टर्म बेल) का प्रार्थना पत्र विशेष जज एमपी एमए ले कोर्ट इलाहाबाद में 27 अप्रैल को दाखिल किया गया था.
इसमें पूर्व सांसद की ओर से अधिवक्ता दया शंकर मिश्र, खान फरहत हनीफ, निसार अहमद, राधे श्याम पांडे की ओर से दाखिल पेरोल पर बहस का विरोध अपर जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश गुप्ता, वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी हरि ओमकार सिंह और वीरेंद्र सिंह ने किया.
विरोध करते हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि अतीक की पूर्व में 15 अप्रैल 2017 को जमानत खारिज हो चुकी है. ऐसे में आरोपी को चुनाव लड़ने और प्रचार करने के लिए पेरोल पर तीन सप्ताह के लिए ज़मानत देने का शक्ति न्यायालय के पास नही है. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रार्थना पत्र में विधिक बल नहीं है और प्रार्थना निरस्त करने योग्य है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पेरोल प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया.
गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अतीक अहमद को गुजरात के किसी जेल में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है. पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी में कांग्रेस के अजय राय तथा गठबंधन के प्रत्याशी बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव हैं. तेज बहादुर को आज ही समाजवादी पार्टी का सिंबल दिया गया. उनसे पहले शालिनी यादव यहां से नामांकन दाखिल कर चुकी थीं.
उधर, अतीक अहमद का नामांकन पत्र दाखिल होने से यह संभावना बनती दिख रही है कि अतीक अहमद जेल में रहकर ही वाराणसी का चुनाव लड़ेंगे. अतीक के वाराणसी से नामांकन करने और चुनाव लड़ने को लेकर तमाम तरह की राजनैतिक कयासबाजी भी लगाई जा रही है.

 

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