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नेपाल के तराई क्षेत्र में हिन्दुत्व की अलख जगाएंगे पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र, ओली सरकार रखेगी नजर

नेपाल के तराई क्षेत्र में हिन्दुत्व की अलख जगाएंगे पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र, ओली सरकार रखेगी नजर
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

मोहम्मद

सिद्धार्थ नगरः भारत की तरह धर्मनिरपेक्ष सरकार नेपाल से शाही परिवार के सदस्यों को खटक रहा है. ऐसा माना जा रहा है कि नेपाल में एक बड़ा वर्ग है जो फिर से हिन्दू देश नेपाल की तरफदारी कर रहा है. नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र भी उन्हीं में शामिल है. राजा ज्ञानेंद्र पहली दिसंबर से भारत सीमा से सटे नेपाल के जिलों के भ्रमण पर पहुंच रहे हैं. वह भैरहवा, बुटवल, तौलिहवा, नवलपरासी आदि जिलों में भ्रमण कर वे समर्थक व शुभचिंतकों से मुलाकात कर नेपाल के ताजा राजनीतिक हालात पर चर्चा करेंगे. ऐसा माना जा रहा है कि पूर्व नरेश एक सप्ताह के अपने भ्रमण में इन जिलों में स्थित एतिहासिक व प्राचीन मंदिरों का दर्शन कर नेपाल में चल रही हिंदू राष्ट्र की मांग को और तेज करने का संदेश देंगे. वह सात दिसंबर को काठमांडू वापस लौटेंगे.
गौरतलब है कि पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र स्वयं नेपाल के हिंदू राष्ट्र के समर्थक हैं. उनके शासन काल तक नेपाल की पहचान हिंदू राष्ट्र की ही थी. रोचक यह है कि छोटी-छोटी समस्याओं के लिए उठने वाली मांगों को लेकर जब तक प्रदर्शन हिंसक न हो, नेपाल में सरकारों को जूं तक नहीं रेंगती लेकिन कम्युनिस्ट सरकार ने बिना किसी मांग के 2008 में राजशाही को खत्म करने का ऐलान कर नेपाल को लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित कर दिया. शुरुआती कुछ वर्षों तक यह मुद्दा ठंडा रहा लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों से हिन्दूवादी संगठनों और नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है.
नेपाल में सक्रिय हिंदूवादी संगठन पुन:हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग कर रहे हैं. हालांकि, नेपाल सरकार इनकी मांग को तवज्जो देने के इरादे में नहीं है. पूर्व प्रधानमंत्री और मौजूदा सत्ताधारी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रचंड ने साफ कहा है कि यह गैरजरूरी मांग है. इसलिए इस पर ध्यान देने की जरुरत नहीं है. कम्युनिस्ट सरकार को चीन समर्थक माना जाता है. हालांकि, ऐसा माना जाता है कि नेपाल के हिंदू राष्ट्र की मांग का अप्रत्यक्ष रुप से भारत के हिंदूवादी संगठनों का भी समर्थन हासिल है. इसीलिए नेपाली सरकार इसे लेकर सतर्क भी है.
नेपाल में राष्टीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष कमल थापा पहले से ही धर्मनिरपेक्ष नेपाल के खिलाफ हैं. रप्रपा हिंदूवादी पार्टी मानी जाती है. कमल थापा की मांग है कि नेपाल के धर्मनिरपेक्ष राष्ट के प्रावधान को निरस्त कर पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता वाला एक हिंदू राष्ट घोषित किया जाए. हिंदू राष्ट की मांग के समर्थन में उन्होंने कई बार दिल्ली की यात्रा भी की.
पिछले आम चुनाव में नेपाली कांग्रेस ने भी हिंदू देश का कार्ड खेला था. पूर्व पीएम शेरबहादुर देउबा ने इस वादे पर वोट मांगा था कि उनकी सरकार सत्ता में आई तो नेपाल के हिंदू राष्ट की छवि को बहाल किया जाएगा लेकिन कम्युनिस्ट गठजोड़ वाली पार्टियों की मजबूती और चीन के हस्तक्षेप के कारण वह सत्ता से दूर रह गए.
हालांकि, नेपाली कांग्रेस सत्ता भले न हासिल कर सकी हो लेकिन उसके कई सांसद अब भी हिंदू राष्ट के पक्ष में हैं. वे लगातार यूपी के सीएम योगी के अलावा भारत के नामचीन हिंदू नेताओं के संपर्क में भी बताए जाते हैं. सांसद रहते हुए योगी आदित्यनाथ का कहना था कि नेपाल का धर्मनिरपेक्ष स्वरूप एक धोखा है. तराई के नेपाली कांग्रेस सांसद अभिषेक प्रताप शाह भी नेपाल के हिंदू राष्ट के पक्षधर हैं. यह अलग बात है कि नेपाली कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शेखर कोइराला पार्टी लेवल पर हिंदू राष्ट की मांग को खारिज कर चुके हैं. हिन्दू राष्ट्र के समर्थकों की अच्छी खासी संख्या को देखते हुए पूर्व नेपाल नरेश का इसके पक्ष में सामने आना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है. औली सरकार की चिंता का यह एक बड़ा कारण है.

 


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1 Comment

  • Mahfuz ansari , November 30, 2019 @ 10:33 pm

    Ye sab RSS aour BJP ke dalal hain jab janta ne inko nkar diya to bhes badalkar logon ko thagna chahte hain aour BJP in ka nmuna hai ki janta bevquf hai is tarah bahkaya jasakta hai . Lekin ye bhul hai .
    Khun sabka hai yahan ki mmitti me

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