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श्रीराम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला सुनाने वाले पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई मनोनीत हो पहुंचे राज्यसभा

श्रीराम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला सुनाने वाले पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई मनोनीत हो पहुंचे राज्यसभा

श्रीराम जन्मभूमि विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई राज्यसभा पहुंच गए हैं

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
श्रीराम जन्मभूमि विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई राज्यसभा पहुंच गए हैं.  पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई को राष्टपति रामनाथ कोविंद ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है. जस्टिस रंजन गोगोई सीजेआई बनने वाले पूर्वोत्तर भारत के पहले व्यक्ति हैं. जस्टिस गोगोई ने अपने कार्यकाल में कई मुद्दों पर अहम फैसले सुनाए हैं. इसमें सबरीमाला मंदिर का मुद्दा भी है.

रंजन गोगोई (जन्म 18 नवम्बर 1954)  भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने के पहले पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं. वह 2012 से 2018 तक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रहे. जस्टिस रजंन गोगोई ने 3 अक्टूबर 2018 को भारत के 46वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लिया. गौरतलब है कि उनके पिता केशव चंद्र गोगोई 1982 में असम के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. वह कांग्रेस के बड़े नेताओं में गिने जाते रहे हैं.

वे भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने वाले पूर्वोत्तर भारत के पहले व्यक्ति और पहले असमी भी हैं. इन्होंने 9 नबंवर को श्रीराम जन्मभूमि पर ऐतिहासिक फैसला दिया. 5 सदस्यीय पीठ के वह प्रधान न्यायाधीश थे. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो सका है. इस फैसले के जरिए उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के बाद कोई विवाद न हो, इसके लिए केंद्र सरकार को ट्रस्ट बनाने का भी आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन में ही केंद्र सरकार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन कर मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है. इनका कार्यकाल 17 नबंवर 2019 को समाप्त हो गया था.
गोगोई ने 1978 में बार में दाखिला लिया और गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अभ्यास किया, जहाँ उन्हें 28 फरवरी 2001 को स्थायी न्यायाधीश बना दिया गया. 9 सितंबर 2010 को उन्हें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया. 12 फरवरी 2011 को उन्हें यहीं का मुख्य न्यायाधीश बना दिया गया. 23 अप्रैल 2012 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था.
2018 भारत के सर्वोच्च न्यायालय संकट
12 जनवरी 2018 को न्यायमूर्ति जे चेलेश्वर, एमबी लोकुर और कूरियन जोसेफ के साथ मिलकर न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने भारत के उच्चतम न्यायालय के इतिहास में पहली बार उच्चतम न्यायालय के न्याय वितरण प्रणाली में विफलता और मामलों के आवंटन के मामलें में एक प्रेस वार्ता आयोजित किया. प्रेस बैठक के दौरान, चारो न्यायाधीशों ने पत्रकारों से कहा कि विशेष सीबीआई न्यायाधीश बृजगोपाल हरकिशन लोया की मौत के मामले को न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा को आवंटित करने से प्रेरित होकर उन्होंने प्रेस वार्ता की है. लोया, एक विशेष सीबीआई न्यायाधीश थे. जिनका दिसंबर 2014 में निधन हो गया था. न्यायमूर्ति लोया 2004 के सोहराबुद्दीन शेख मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें पुलिस अधिकारी और मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह का नाम सामने आया था. बाद में न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया. 

 


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