Swami Chinmayanand, उचित फैसला, चिन्मयानंद संत समाज से बहिष्कृत

उचित फैसला, चिन्मयानंद संत समाज से बहिष्कृत

Swami Chinmayanand, उचित फैसला, चिन्मयानंद संत समाज से बहिष्कृत
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

प्रयागराज में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा – मुहर हरिद्वार में लगेगा, कृत्य अक्षम्य

न मान बचा न सम्मान , बचा खुचा स्वाभिमान भी चला गया। नाम चिन्मयानंद है , नाम के आगे स्वामी भी लगा है , जो कभी सम्मानसूचक का द्योतक था। जिस आरोप ( दुष्कर्म ) में वह शाहजहांपुर की जेल की कोठरी में पहुंच चुके हैं , वहां पहुंचने के बाद नाम के आगे स्वामी लगाने का अधिकार तो उन्होंने नैतिक रूप से खो दिया है। कभी ( अटल विहारी वाजपेयी सरकार ) देश के केंद्रीय गृह राज्य मंत्री थे , रुतबा था , पुलिस की गजब की सुरक्षा थी , करनी के कारण उसी पुलिस ने उन्हें जेल की सलाखों में पहुंचा दिया है। चिन्मयानंद का वस्त्र गेरुआ था , संत की उपाधि प्राप्त थी , उन्होंने वस्त्र और उपाधि दोनों को कलंकित कर दिया। जिस पद पर कभी केंद्र की सरकार में विराजमान थे , उसकी मर्यादा को भी ठेस पहुंचाया है। साधु-संतों को भारत की जनता काफी इज्जत देती है , उन पर विश्वास करती है , चिन्मयानंद ने जनता के साथ भी विश्वासघात किया है। कुछ संतों ने जैसे आशाराम , रामरहीम , रामकृपाल , नारायणस्वामी आदि ने तो न सिर्फ संत समाज को कलुषित किया है बल्कि देश के नाम को भी बट्टा लगाया है। ऐसे भी साधु-संत हैं जो फरार हैं , पुलिस उन्हें तलाश रही है। कुछ ऐसे भी होंगे जिनका कारनामा उजागर नहीं हो पाया है। धर्मात्माओं , महात्माओं के देश में ये संत कलंक हैं।

अखाड़ा परिषद का कठोर निर्णय

प्रयागराज में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि चिन्मयानंद को संत समाज से बहिष्कृत किया जाएगा। 10 अक्टूबर को हरिद्वार में प्रस्तावित अखाड़ा परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया जा सकता है। नरेंद्र गिरि का कहना है कि 2021 में हरिद्वार में लगने वाले कुंभ के मद्देनजर यह बैठक होनी है। आमतौर पर यह निर्णय लिया जाता है कि आरोप लगे रहने तक संत समाज से बहिष्कृत नहीं किया जाता। लेकिन इस पर अब अंतिम निर्णय परिषद की बैठक में होगा। परिषद जल्द ही उनके खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। नरेंद्र गिरि का यह कहना उचित ही है कि चिन्मयानंद का कृत्य निंदनीय ही नहीं अक्षम्य है। हालांकि वह संत परम्परा से आते हैं लेकिन उनके इस कृत्य के बाद उन्हें संत कहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। उनका यह कारनामा संत समाज की प्रतिष्ठा , छवि , मर्यादा को धूमिल करता है। संत समाज इस घटना से आहत हैं। ऐसे ही बाबाओं से संत समाज अपमानित हो रहा है।

कड़े फैसले लेना जरूरी

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का मानना है कि ऐसे मामले जिनमें संतों के आचरण पर सवाल उठे उसमें कड़ा और निर्णायक फैसला लेना जरूरी है। परिषद ने फर्जी संतों पर नकेल कसने की तैयारी की थी। प्रयागराज में लगे कुंभ के दौरान फर्जी महात्माओं की सूची जारी की गई थी। संतों से कहा गया था कि तमाम ढोंगी और बहुरुपिए अपने नाम के आगे बाबा या महात्मा लिखकर संत समाज को बदनाम कर रहे हैं। आम जनमानस को भी ऐसे बाबाओं से दूर रहने का आग्रह किया गया है।

 


 

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