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एक्जिट पोल के पहले ही गूगल ट्रेंड ने बता दिया था चुनावी रुझान, ऐसे समझिए किसका पलड़ा हो सकता है भारी

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में जीत-हार की चर्चा अब सबसे ज्यादा जोर पकड़ चुकी है. चीन के बाद सबसे ज्यादा इंटरनेट का इस्तेमाल भारत में होता है. एक रिपोर्ट का आकलन है कि 48.1 करोड़ लोग भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. यही वजह है कि चुनावों में टिकट बांटने से लेकर प्रचार करने तक के लिए राजनैतिक पार्टियां सोशल मीडिया का खूब इस्तेमाल करती हैं. इंटरनेट के जरिए मतदाताओं को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए तरह-तरह के इंतजाम करती हैं. हालांकि, गुजरात चुनाव के बाद इसे लेकर हंगामा भी मच चुका है.
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम में मतदान हो चुका है. इन चुनावों को 2019 में होने वाले आम चुनाव का सेमीफाइनल भी माना जा रहा है. लिहाजा इस चुनाव के नतीजे महत्वपूर्ण हो गए हैं. चुनाव के आखिरी नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे, लेकिन इससे पहले ही एक्जिट पोल के जरिए न्यूज चैनल हार-जीत की संभावनाएं-आशंकाएं जताने में एक दूसरे को पीछे छोड़ रहे हैं. ऐसे में यह जानना भी दिलचस्प है कि इंटरनेट की दुनिया में किस पार्टी और किस नेता का जलवा रहा और कौन सी पार्टी और नेता फिसड्डी रहे. चुनावों के दौरान ‘गूगल ट्रेंड्स’ पर कौन छाया रहा और कितना छाया रहा.
ये जानने से पहले जानिए कि गूगल ट्रेंड्स कैसे काम करता है. यह तो हम सभी जानते ही हैं कि गूगल दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन है. मतलब अगर आपको किसी सवाल का जवाब चाहिए तो आप गूगल पर उसे सर्च करते हैं. अगर आपको किसी व्यक्ति का भाषण सुनना-देखना है तो आप गूगल पर सर्च करते हैं. हर रास्ता गूगल दिखाता है. ‘गूगल ट्रेंड्स’ दुनिया भर में सर्च किए जा रहे शब्दों, सवालों और विषयों का हिसाब रखता है और हमें बताता है कि किस दिन, किस जगह, कितने लोगों ने क्या सर्च किया यानि उनकी दिलचस्पी क्या जानने में रही.
हालांकि, गूगल ट्रेंड्स से मिले आंकड़ों के आधार पर भी कोई नतीजा निकालना ठीक नहीं होगा लेकिन तय समय में, तय जगह के इंटरनेट इस्तेमालकर्ताओं के व्यवहार को आसानी से समझा जा सकता है. पांच राज्यों में हुए चुनाव को लेकर नेशनल व्हील्स ने भी यही समझने की कोशिश की है.
चुनाव आयोग ने 7 अक्टूबर को पांच राज्यों के चुनाव की घोषणा की थी. मध्य प्रदेश और मिजोरम में 28 नवंबर को वोट डाले गए. छत्तीसगढ़ में दो चरणों में 12 नवंबर और 20 नवंबर को वोटिंग हुई. वहीं राजस्थान और तेलंगाना में 7 दिसंबर को वोट डाले गए. चुनाव के घोषणा की तारीख से लेकर मतदान के दिन की तारीख के बीच दर्ज हुए सर्च ट्रेंड्स क्या कहते हैं, इन्हें हर राज्य के हिसाब से समझा जा सकता है.
मध्य प्रदेश
राज्य के चुनाव में मुख्य रूप से कांग्रेस और सत्ता में बैठी बीजेपी आमने-सामने हैं. गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक राज्य में कांग्रेस और बीजेपी लगभग समान रूप से लोकप्रिय हैं. इन 52 दिन (7 अक्टूबर-29 नवंबर) में दोनों पार्टियों में लोकप्रियता के लिए भी कड़ी टक्कर हुई है. दो तारीखें ऐसी हैं जब दोनों ही पार्टियों की लोकप्रियता में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है. 2 नवंबर को बीजेपी के पास 83 प्वाइंट थे, वहीं कांग्रेस के पास 59 प्वांट्स थे. अगले ही दिन 3 नवंबर को जिस दिन बीजेपी ने राज्य में अपने कैंडिडेट्स की पहली सूची जारी की थी, कांग्रेस के पास 100 और बीजेपी के पास 40 प्वांइट थे. ये प्वाइंट इस बात को इंगित करते हैं कि लोकप्रियता कितनी है. 100 प्वाइंट का मतलब है कि उस समय सबसे ज्यादा लोकप्रिय. अब बात करते हैं, चुनाव से एक दिन पहले की. इस दिन दोनों ही पार्टियों की लोकप्रियता आधे से भी कम थी. 27 नवंबर को कांग्रेस के पास 39 और बीजेपी के पास 35 प्वाइंट थे. कहने का मतलब कि इंटरनेट पर कांटे की टक्कर है लेकिन कांग्रेस, बीजेपी से आगे है. दोनों ही पार्टियों के बारे में जो सवाल सबसे ज्यादा पूछे गए उसमें उम्मीदवारों की लिस्ट थी.
प्रमुख राजनीतिक चेहरों की बात करें तो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, सांसद और राज्य में कांग्रेस का एक प्रमुख चेहरा ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा वर्तमान मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान के बीच कड़ी टक्कर दिखती है लेकिन एक ऐसा चेहरा भी है जो इनसभी नेताओं की तुलना में खासा लोकप्रिय है. देश के प्रधानमंत्री और बीजेपी नेता नरेंद्र मोदी दूसरे सभी नेताओं के मुकाबले खासे लोकप्रिय हैं. हां, 30 अक्टूबर को राहुल गांधी ने पीएम मोदी को चुनौती दी लेकिन इसके बाद वो फिर से आगे निकल गए.
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में दो चरणों (12 नवंबर और 20 नवंबर) को वोट डाले गए. यहां बीजेपी सत्ता में है. रमन सिंह राज्य के मुख्यमंत्री हैं. बीजेपी, कांग्रेस, अजीत जोगी की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ और बहुजन समाज पार्टी चुनावी मैदान में हैं. अजीत जोगी और बहुजन समाज पार्टी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. राजनीति के जानकार मानते हैं कि इस चुनाव में अजीत जोगी खुद तो सत्ता में नहीं आ पाएंगे लेकिन सत्ता दिलाने में अहम भूमिका निभाएंगे. ‘गूगल ट्रेंड्स’  के मुताबिक बीजेपी और कांग्रेस में मुख्य मुकाबला है और ये मुकाबला कांटे का है. दोनों पार्टियों की लोकप्रियता में औसतन 1 प्वाइंट का अंतर है. 16 प्वाइंट के साथ बीजेपी पहले नंबर पर है, 15 प्वाइंट लेकर कांग्रेस दूसरे पायदान पर है, वहीं बहुजन समाज पार्टी के पास 5 प्वाइंट हैं. किंगमेकर माने जा रहे अजीत जोगी की पार्टी आखिरी पायदान पर खड़ी है. जोगी को 2 प्वाइंट मिले हैं. राज्य में पहले चरण की वोटिंग 12 नवंबर को थी और इस दिन 15 प्वाइंट के साथ बीजेपी पहले नंबर पर थी. वहीं 11 प्वाइंट लेकर कांग्रेस दूसरे नंबर पर थी. 4 प्वाइंट का अंतर था. 20 नवंबर को राज्य में दूसरे और आखिरी चरण का मतदान था. इस दिन 30 प्वाइंट के साथ कांग्रेस पहले नंबर पर पहुंच गई और 23 प्वाइंट के साथ बीजेपी काफी नीचे खिसक गई. मतलब पहले और दूसरे चरण के मतदान के बीच कांग्रेस की लोकप्रियता बढ़ी.
छत्तीसगढ़ चुनाव में सक्रिय राजनीतिक चेहरों की बात करें तो वर्तमान मुख्यमंत्री रमन सिंह, राज्य में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस बाबा, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, पीएम मोदी और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी काफी सक्रिय थे. गूगल ट्रेंड्स पर इनकी लोकप्रियता देखें तो यहां भी पीएम मोदी पहले नंबर पर हैं. दूसरे नंबर पर राहुल गांधी हैं. रमन सिंह और अजीत जोगी तीसरे नंबर पर हैं. इस दौरान नेताओं की लोकप्रियता में कमी-बढ़ोत्तरी देखी जा सकती है लेकिन कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. पीएम मोदी पहले दिन से आखिरी दिन तक बड़े अंतर के साथ पहले नंबर पर बने रहे.
राजस्थान
राज्य की 200 में से 199 सीटों के लिए 7 दिसंबर को वोट डाले गए. राज्य में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस के बीच है. वसुंधरा राजे सिंधिया मुख्यमंत्री हैं. कहा जा रहा है कि राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रति लोगों में बहुत गुस्सा है. नारे भी लगते रहे हैं, ‘बीजेपी से बैर नहीं, वसुंधरा तेरी खैर नहीं. जमीन पर चीजें कैसे बदलीं और कितना बदलीं इसके लिए तो 11 दिसंबर तक इंतज़ार करना होगा लेकिन राज्य में चुनाव की घोषणा होने से लेकर मतदान की तारीख तक के इंटरनेटी बदलावों पर नजर डालने से पता चलता है कि राजस्थान में सत्तारूढ़ बीजेपी की तुलना में कांग्रेस ज्यादा लोकप्रिय है. हालांकि दोनों पार्टियों की लोकप्रियता में कोई बड़ा अंतर नहीं है. औसतन 4 अंकों का अंतर है. सबसे दिलचस्प बदलाव 10 नवंबर के बाद दिखते हैं. 10 नवंबर तक दोनों ही पार्टियों की लोकप्रियता राज्य में लगभग एक जैसी रही लेकिन इसके बाद दोनों की ही लोकप्रियता में बड़ा बदलाव दिखा. गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक 15 नवंबर को 100 प्वाइंट्स के साथ कांग्रेस लोकप्रियता के शीर्ष पर थी तो इस दिन बीजेपी के पास मात्र 28 नंबर थे लेकिन 18 नवंबर तक कांग्रेस की लोकप्रियता में भारी कमी दिखती है और 20 नवंबर को दोनों ही पार्टियां फिर से एक-एक के अंतर वाली स्थिति में पहुंच जाती हैं. 4 दिसंबर को एक प्वाइंट के अंतर के साथ बीजेपी, कांग्रेस से आगे है.
राहुल गांधी, सचिन पायलट, वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत और नरेंद्र मोदी राजस्थान चुनाव के प्रमुख चेहरे रहे. बाकि राज्यों की ही तरह नरेंद्र मोदी राजस्थान में भी खासे लोकप्रिय हैं. कोई भी दिन ऐसा नहीं है जब राहुल गांधी उनके करीब पहुंचे हों. अंतर भी 20-22 प्वाइंट का है. लेकिन दिलचस्प ये है कि राज्य में कांग्रेस के युवा नेता सचिन पायलट वसुंधरा राजे के मुकाबले ज्यादा लोकप्रिय हैं. 7 अक्टूबर से 13 नवंबर तक सचिन और वसुंधरा के पास लोकप्रियता के एक-एक नंबर हैं लेकिन 14 नवंबर के बाद से सचिन आगे निकलते दिख रहे हैं. अंतर भी बढ़ता जा रहा है. 4 दिसंबर को सचिन पायलट के पास 13 प्वाइंट हैं वहीं वसुंधरा राजे के पास मात्र 5 प्वाइंट हैं. मतलब 8 प्वाइंट का अंतर है. इसका मतलब ये हुआ कि अगर चुनाव कांग्रेस बनाम बीजेपी या वसुंधरा बनाम सचिन हुआ है तो कांग्रेस आगे निकल सकती है. लेकिन अगर मतदाताओं ने नरेंद्र मोदी के नाम पर मतदान किया तो बीजेपी आगे रहेगी.
तेलंगाना
विधानसभा की 119 सीटों के लिए 7 दिसंबर को वोट डाले गए. राज्य में बीजेपी, कांग्रेस, तेलुगू देशम पार्टी और तेलंगाना राष्ट्र समिति सक्रिय हैं. गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक चुनावी मौसम में कांग्रेस राज्य में लोकप्रियता के मामले में सबसे आगे है. इन दो महीनों में कांग्रेस के पास 35 प्वाइंट हैं, बीजेपी के पास 26 प्वाइंट हैं. वहीं तेलुगू देशम पार्टी और तेलंगाना राष्ट्र समिति के पास क्रमश: 17 और 15 प्वाइंट हैं.

 

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