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आज़म पर चुनाव आयोग का प्रतिबंध ऊँट के मुँह में जीरे जैसा, फिर मिला नोटिस

आज़म पर चुनाव आयोग का प्रतिबंध ऊँट के मुँह में जीरे जैसा, फिर मिला नोटिस
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

अरविंद कुमार चौधरी

समाजवादी पार्टी नेता व रामपुर लोकसभा से प्रत्याशी आज़म खान द्वारा भाजपा उम्मीदवार जयाप्रदा पर दिए गए आपत्तिजनक बयान को संज्ञान में लेते हुए चुनाव आयोग ने आज़म खान पर 72 घटे के लिए चुनाव प्रचार नहीं करने का प्रतिबंध लगाया हैं। हालांकि, आयोग का कड़ा कदम आजम खान पर बेअसर साबित हो रहा है। नए मामले में उनके खिलाफ जिला निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया है। चुनाव आयोग ने भी उन्हें नोटिस देकर 24 घंटे में जवाब मांगा है।
हालांकि, इस प्रकार की अभद्र टिप्पणी आज़म ने आज पहली बार नहीं की है। जानकार बताते हैं कि न जाने कितनी बार वह इस तरह बोल चुके है। मगर, ऐसे मामलों में अब तक सजा या प्रतिबंध  न होने या नहीं के बराबर होने से आजम खान का हौसला बढ़ाने का काम करता रहा हैं। यह अकेले आजम खान का मामला नहीं है। सभी पार्टियों में ऐसे बदजुबान नेताओं की भरमार है जो गाहे-बेगाहे कटुता, अमर्यादित, असंसदीय और अपशब्दों का इस्तेमाल करते रहते हैं। फिलहाल, वर्तमान में आजम खान के अलावा बसपा प्रमुख मायावती, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी निर्वाचन आयोग के प्रतिबंध का सामना कर रहे हैं.
ऐसा माना जाता है कि ऐसे नेता खुद को सुर्खियों में लाने के लिए सामने वाले प्रत्याशी पर उस वक्त ऐसी टिप्पणी करते हैं। जब सामने वाला प्रत्याशी इनसे मजबूत स्थिति में होता है। ऐसी टिप्पणी कर यह खुद को सोशल मिडिया में स्टार की तरह पेश करते हैं। मिडिया भी ऐसे नेताओं को हाथों हाथ लेता है। वह भी अपनी टीआरपी के गुना भाग में लग जाता है।
इस बार भी वही हुआ। मिडिया के सभी प्रारूपों में सिर्फ एक विवादित बयान से आज़म खान छा गए। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि क्या ऐसे में  चुनाव आयोग द्वारा 72घटे का प्रतिबंध अभद्र भाषी नेताओं के लिए सबक हो सकता है या फिर चुनाव आयोग की एक खानापूर्ति मात्र बन कर रह जाएगा। फिलहाल, सीएम योगी आदित्यनाथ सार्वजनिक तौर पर भाषणबाजी करने के बजाए बजरंग बली और रामलला के दर्शन कर अपना संदेश देने के प्रयासों में लगे हैं।
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