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गर्भ के दौरान माताओं में सूंघने की शक्ति ज्यादा बढ़ जाती है

गर्भ के दौरान माताओं में सूंघने की शक्ति ज्यादा बढ़ जाती है
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
इलाहाबाद: गर्भावस्था महिलाओं के लिए खुशी के साथ अजन्मे शिशु के स्वास्थ्य को लेकर चिंता का सबब भी बनी रहती है. गर्भस्थ शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए कई किस्म के उपाय हैं जिससे इस समस्या को दूर किया जा सकता है. एरोमाथेरेपी भी माताओं के लिए इसी तरह लाभदायी साबित हो सकती है.
गर्भ के दौरान एरोमाथेरेपी माताओं के लिए कितनी अच्छी होती है, इस बारे में हिमालया ड्रग कंपनी में आयुर्वेद विषेशज्ञ, शोध एवं विकास डाॅ. सुभाशिनी एनएस ने बताया कि गर्भ के दौरान माताओमें सूंघने की शक्ति ज्यादा हो जाती है. एरोमाथेरेपी लेने से शारीरिक व मनोवैज्ञानिक फायदे होते हैं.  मन व शरीर को आराम मिलता है. उन्होंने बताया कि एरोमाथेरेपी के फायदों का अनुभव घर पर ही एरोमाथेरेपी युक्त उत्पादों के द्वारा लिया जा सकता है.
डाॅ. सुभाशिनी ने माताओं को अपने गर्भावस्था के दौरान खुद की देखभाल करने के बारे में बताया और कहा कि एरोमाथेरेपी युक्त साबुन, जिसमें त्वचा को सुकून देने वाले तथा नम बनाकर रखने वाले प्राकृतिक माईस्चुराईज़र जैसे शुद्ध नारियल तेल, मैंगो बटर और कोको बटर होते हैं. उनकी खुशबू के साथ वो आपको शांति व सुकून प्रदान करते हैं. माईस्चरयुक्त साबुन नहाने के बाद का सूखापन कम कर त्वचा को नम बनाकर रखते हैं.
गुलाब और चमेली गर्भवती माताओं के लिए दो विकल्प हैं, क्योंकि ये त्वचा को आराम देकर उसे नवजीवन प्रदान करते हैं. गुलाब मूड को अच्छा बनाता है और चमेली मन एवं शरीर को तरोताजा कर देता है. डाॅ. सुभाशिनी ने कहा कि नई एवं भावी माताओं को एरोमाथेरेपी का इस्तेमाल करने से पहले डाॅक्टर से परामर्श ले लेना चाहिए, क्योंकि गर्भ के विभिन्न चरणों में उनके प्रभाव के बारे में जानना बहुत जरूरी है.

 

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