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#डुमरियागंज LS सीटः अपना दल-एस को इस सीट की पेशकश कुछ कहता है, आप भी जानिए

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

यशोदा श्रीवास्तव

सिद्धार्थनगर। जिले की एक मात्र संसदीय सीट डुमरियागंज को लेकर गजब का सस्पेंश बना हुआ है। यहां से भाजपा सांसद जगदंबिका पाल के टिकट को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। जिले की विधानसभा की एक सीट पर अपना दल एस के विधायक हैं। शेष चार पर भाजपा का कब्जा है। कई बार ऐसे उदाहरण पेश आए हैं जिससे पता चलता है कि भाजपा के विधायक ही सांसद पाल के फेवर में नहीं हैं वहीं अपना दल एस के विधायक चैधरी अमर सिंह ने खुला एलान कर रखा है कि यदि भाजपा ने पाल को टिकट  दिया तो वे उनका खुला विरोध करेंगे। टिकट से पहले पाल को अपने क्षेत्र में अपनों से निपटना बड़ी चुनौती है।
अब जहां तक टिकट की बात है तो पाल को यहां भी घेरने की पूरी तैयरी है। पिछले दिनों अपना दल एस के राष्टीय अध्यक्ष आशीष पटेल और अनुप्रिया पटेल की भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मुलाकात के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। शाह पटेल की मुलाकात में अपना दल एस के टिकटों को लेकर फैसला हुआ है। इस पार्टी को दो सीटें दी जा रही हैं। एक मिर्जापुर की है ही दूसरी डुमरियागंज सहित दो तीन अन्य सीटों में से किसी एक की पेशकश की गई है। निश्चय ही पाल के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है। हालाकि बातचीत के दौरान पाल ने अपने टिकट को लेकर आश्वस्तता जताई है लेकिन अंदूरूनी विरोध को चुनौती मान रहे हैं।
दूसरी ओर अपनादल एस ने इस सीट पर अपना दावा ठोंक दिया है। इस दल के युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत चैधरी नं कहा है कि डुमरियागंज सीट से अपना दल एस का टिकट लगभग फाइनल है। कुछ टीवी चैनलों ने तो बाकयदा खबर तक चला दी है कि यह सीट अपना दल के हिस्से में चली गई। मजे की बात है कि ऐसी खबरांे के बीच डुमरियागंज क्षेत्र में भाजपा खेमें में भगदड़ की भी स्थित है। भाजपा के कई कार्यकर्ता अपनादल नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिए हैं। भाजपा के एक नेता ने ही डुमरियागंज सीट पर भाजपा उम्मीदवार को लेकर चल रही आंख मिचोली पर कहा कि टिकट की लिस्ट जारी होने के बाद भाजपा के चैकीदारों की असलियत सामने आएगी। साफा का रंग ऐसे बदलेगा कि भाजपा सोच भी नहीं सकती है।
दरअसल, पाल के टिकट कटने के कयास के पीछे पार्टी में वर्चस्व की जंग भी मानी जा रही है। साथ ही 2019 का चुनाव 2014 के चुनाव से भिन्न है। पाकिस्तान के अंदरूनी हिस्से बालाकोट में भारतीय वायु सेना के हमले से लेकर चौकीदार अभियान से सत्ता में वापसी होगी या नहीं, यह साफ नहीं है। यह संभावना भी जताई जा रही है कि एनडीए गठबंधन सत्ता के करीब तक पंहुच सकता है। भाजपा इस चुनाव में यदि सत्ता बचाने में कामयाब हो गई तो प्रधानमंत्री पद के लिए उठापटक हो सकती है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत कई नेताओं ने खुले मंच से बयान दिया है कि वह इस रेस में नहीं हैं। अगली सरकार भी नरेंद्र मोदी की अगुवाई में ही बनेगी। हालांकि, राजनीति में जो दिखता है ज्यादातर मौकों पर वह होता नहीं है। परदे के पीछे तमाम ऐसी गोटियां फिट हो रही होती हैं जो जनता के सामने सबसे अंत में आती हैं। जैसीकि आशंका है यदि पीएम पद को लेकर कोई खींचतान की स्थिति बनती है तो सांसदों का संख्याबल ही यह तय करेगा कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा। कई अन्य नेताओं के साथ जगदंबिका पाल भी कांग्रेस से भाजपा में पहुंचे थे। इस सूची में कांग्रेस के करीब 80 नेता हैं जो भाजपा सांसद बने हैं। यह भी माना जाता है कि मौजूदा भाजपा नेतृत्व इन सांसदों को विश्वनीय नहीं मानता।
इस बार टिकटों के बंटवारे में नेतृत्व के प्रति वफाई पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। पता चला है कि पार्टी  अध्यक्ष अमित शाह द्वारा बहुत ही गोपनीय ढंग से कराए स्क्रीनिंग में सौ से अधिक सांसद डाउटफुल उभर कर सामने आए हैं। पार्टी ऐसे लोगों को किनारे करने की कोशिश में हैै।कुछ को सीधे निपटाएगी तो कुछ को गठबंधन की सीटों के बहाने किनारे करेगी। बिहार से इसकी शुरूआत हो गई है। अब शाह की गोपनीय स्क्रीनिंग में पाल कहां है यह पता नहीं लेकिन अपना दल एस को डुमरियागंज की सीट की पेशकश के पीछे कुछ तो है।

 

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