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सचिन तेंदुलकर के ‘क्रिकेट का भगवान’ बनने में इस एक खिलाड़ी की चोट और पूर्व कप्तान की जिद की बड़ी भूमिका

सचिन तेंदुलकर के ‘क्रिकेट का भगवान’ बनने में इस एक खिलाड़ी की चोट और पूर्व कप्तान की जिद की बड़ी भूमिका

दुनिया के महानतम बल्लेबाजों में शुमार भारत के कोहीनूर कहे जाने वालेल मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने भले ही क्रिकेट को अलविदा कह दिया हो लेकिन उनके नाम की गूंज आज भी स्टेडियम में मैच के दौरान गूंजती है। सचिन को क्रिकेट का भगवान कहा जाता है और इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उनकी लगन, मेहनत के साथ दो खास शख्स का हाथ रहा है।

भारतीय टीम के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर आज अपना 48वां जन्मदिन मना रहे हैं। बॉम्बे (अब मुंबई) में जन्मे सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान कहा जाता है, लेकिन अगर एक खिलाड़ी चोटिल नहीं होता तो शायद ही उनको ये उपाधि मिल पाती, क्योंकि एक खिलाड़ी के चोटिल होने के बाद वे शीर्ष क्रम में खेलने लगे और इतिहास पर इतिहास रचते चले गए।दरअसल, 15 नवंबर 1989 को सचिन तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था, लेकिन डेब्यू के कई साल तक वे अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाए थे। सचिन तेंदुलकर अपने करियर के शुरुआती दिनों में निचले क्रम में बल्लेबाजी करते थे और अपनी लेग ब्रेक गेंदबाजी के लिए जाने जाते थे। हालांकि, सचिन तेंदुलकर के कैलिवर को ये पसंद नहीं था कि वे निचले क्रम में नंबर 5 से 8 तक बल्लेबाजी करें। ऐसे में उन्होंने शीर्ष क्रम में खेलने का प्लान बनाया।

करीब 6 साल तक सचिन तेंदुलकर चौथे और पांचवें नंबर पर खेले, लेकिन एक बार जब नवजोत सिंह सिद्धू चोटिल हो गए तो कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन से सचिन तेंदुलकर ने निवेदन किया था कि वे पारी की शुरुआत करना चाहते हैं। कप्तान अजहर ने भी सचिन तेंदुलकर की इस बात को स्वीकार कर लिया वे ओपनर के तौर पर खेलने लगे। हालांकि, वे ज्यादातर समय पारी की पहली गेंद को नहीं खेलते थे। वे हमेशा नॉन स्ट्राइक पर जाना पसंद करते थे।

जैसे ही सचिन तेंदुलकर ने वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में ओपनिंग शुरू की। वैसे ही उन्होंने रिकॉर्ड्स की झड़ी लगानी शुरू कर दी। ओपनर के तौर पर खेलते हुए वह अच्छी पारियां तो खेल पा रहे थे, लेकिन वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में शतक का सूखा वे आधा दर्जन पारियों से ज्यादा खेलने के बाद पूरा कर सके। वनडे क्रिकेट में उन्होंने पहला शतक ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 9 सितंबर 1994 को जड़ा था। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट में 1990 में ही उन्होंने शतक जड़ा था।

पूर्व महान ओपनर सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान कहा जाता है, क्योंकि उनके नाम आज भी कई ऐसे रिकॉर्ड दर्ज हैं, जो कम से कम इस दशक में टूटने वाले नहीं हैं।

1989 से लेकर 2012 तक अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट सचिन तेंदुलकर ने खेली और इस बीच उन्होंने सबसे ज्यादा रन, सबसे ज्यादा शतक और सबसे ज्यादा अर्धशतक जड़ने का विश्व रिकॉर्ड बनाया। टेस्ट क्रिकेट में भी यही हाल था। सचिन ने सबसे ज्यादा रन, सबसे ज्यादा शतक, सबसे ज्यादा मैच और सबसे ज्यादा अर्धशतक जड़ने का विश्व रिकॉर्ड कायम किया था। इसके अलावा भी वे कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम रखते हैं।

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