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आपके नौनिहालों को अपराध करने और बचने का तरीका सिखाते हैं क्राइम सीरियल?

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
रणविजय सिंह
दिसंबर-जनवरी की कड़ाती ठंड की शाम में तीन नौजवान दिल्ली की सड़कों पर बेचैन दिखे. वे ‘आपराधिक मंथन’ के लिए अपने सामान्य अड्डे में इकट्ठा हुए थे. युवक फर्जी कॉल करके तेजी से रुपये चाहते थे, लेकिन वे यह नहीं जानते थे कि इसके बारे में ‘शातिराना चाल’ कैसे चलें. शार्टकट ‘सुराग’ के लिए उन्होंने उन सर्वोत्कृष्ट टीवी धारावाहिकों को देखने का फैसला किया जो कि आपराधिक तौर-तरीकों को विस्तार बताते और करते हैं. साथ ही पुलिस जांच के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं. टीवी धारावाहिक से मिले सुराग के आधार पर उन्होंने करीने से अपना लक्ष्य चुन लिया.
एक कॉल ‘एलआईसी एजेंट’ के नाम से पड़ोस के एक धनी व्यापारी की पत्नी के पास गई. अब तीनों के पास ‘बीमा पॉलिसी’ की अपडेट पर चर्चा करने के लिए लक्ष्य मिल गया. तीनों युवाओं ने एक नया फोन और एक सिम कार्ड खरीदा. उन्होंने फोन किया और 30 लाख रुपये तक खर्च कराने का लक्ष्य रखा.
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पूर्व) के अनुसार मीठापुर के विजेंद्र सिंह (22), जैतपुर के रितिक श्रीवास्तव (19) और फरीदाबाद के अमित कुमार यादव (23) नाम के ये युवा इस तरह के कॉल करते रहे. फोन और सिम खरीदने और नष्ट करने, फर्जी तरीके से बीमा बेचने का यह सिलसिला तब तक चला जब तक फरवरी 2019 में पुलिस ने उन्हें पकड़ नहीं लिया.
यह असली-नकली रील का एक उदाहरण नहीं है. दिल्ली पुलिस के पास पहली बार टीवी शो देखकर अपराधियों द्वारा हत्याओं, अपहरण और जबरन वसूली से प्रेरित होने और इनसे बचने के रास्तों के मामलों की भरमार हो गई है. पुलिस ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में लगभग 50 ऐसे बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने अपराध करने और गिरफ्तारी से बचने के लिए सीरियल मोडस ऑपरेंडी का इस्तेमाल किया था. उन्होंने कहा कि 2018 में ही लगभग 20 मामले ऐसे सामने आए हैं.
पुलिस उपायुक्त (उत्तर) नूपुर प्रसाद ने कहा, “कई जांच और पूछताछ के दौरान यह पता चला कि आरोपी अपराध करने की योजना बना रहे थे, लेकिन पकड़े जाने से डरते थे. परंतु, इन धारावाहिकों को देखने के बाद उन्हें अपराध के लिए प्रोत्साहन और प्रशिक्षण मिला.” पुलिस का दावा है कि ऐसे ज्यादातर मामलों में आरोपी पहली बार के अपराधी पाए गए हैं.
इन घटनाओं के उजागर होने के बाद दिल्ली पुलिस ने अब इस तरह के धारावाहिकों की सूची तैयार की है. पुलिस ने चैनलों से कहा है कि वे ऐसे सीरियल को रोकें या सामग्री को फ़िल्टर करें या उनका समय ऐसा रखें जबकि उन्हें नियमित तौर पर देखना संभव न हो. कुछ धारावाहिकों का प्रसारण चौबीसों घंटे होता है. पुलिस नए दिशानिर्देशों पर भी जोर देना चाहती है.
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मधुर वर्मा ने कहा, “हम इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं और ऐसे शो पर प्रतिबंध लगाने की सलाह दे सकते हैं या चैनलों को अपनी सामग्री को फ़िल्टर करने का निर्देश दे सकते हैं. इसके अलावा दिल्ली पुलिस धारावाहिक के निर्माताओं से रात में एपिसोड प्रसारित करने के लिए कह सकती है.  प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है और हम ऐसे सभी मामलों का विवरण एकत्र कर रहे हैं.”
एक साप्ताहिक पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार सर गंगाराम अस्पताल में मनोरोग विभाग के वाइस चेयरपर्सन डॉ. राजीव मेहता ने कहा कि इस तरह के शो किसी व्यक्ति के दिमाग पर एक बड़ा प्रभाव डालते हैं, जिनके पास पहले से ही किसी के खिलाफ बदला लेने की योजना है.”अपराध ने हमेशा लोगों को आकर्षित किया है और ऐसे शो उन्हें परेशान करते हैं. हर किसी को कोई न कोई समस्या होती है और इस तरह के शो में दिखाई जाने वाली सामग्री बहुत अधिक भरोसेमंद होती है. ये शो ऐसे लोगों को योजना बनाने में मदद करते हैं.”
दिल्ली पुलिस का कहना है कि अधिकांश निर्माता और चैनल सरकारी मानदंडों का पालन कर रहे हैं. साथ ही ऐसी एजेंसियां भी ​​हैं जो इन शो की निगरानी कर रही हैं. एक अधिकारी ने कहा, “अगर कुछ क्राइम शो लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं, तो हम उन पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते हैं, लेकिन हाँ, हम कुछ दिशानिर्देश जोड़ सकते हैं जो लोगों को मूर्खतापूर्ण अपराध सीखने के लिए सीखने से रोक सकते हैं.” हालांकि, उनका कहना है कि इन शो के कारण बहुत जागरूकता पैदा हो रही है और किसी को इस मुद्दे पर भी गौर करना होगा.

 

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