NationalWheels

क्या आप जानते हैं कि प्रत्येक वर्ष होते हैं चार नवरात्र, घर-घर घट स्थापना

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
प्रत्येक साल में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीनों में चार बार नवरात्र आते हैं ,लेकिन चैत्र और आश्विन माह की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाले नवरात्र ही ज्यादा लोकप्रिय हैं जिन्हें पूरे देश में व्यापक स्तर पर मां भगवती की आराधना के लिये श्रेष्ठ माना जाता है। धर्म ग्रंथों, पुराणों के अनुसार चैत्र नवरात्रों का समय बहुत ही भाग्यशाली बताया गया है। इसका एक कारण यह भी है कि प्रकृति में इस समय हर और नये जीवन का, एक नई उम्मीद का बीज अंकुरित होने लगता है। जनमानस में भी एक नई उर्जा का संचार हो रहा होता है। लहलहाती फसलों से उम्मीदें जुड़ी होती हैं। सूर्य अपने उत्तरायण की गति में होते है। ऐसे समय में मां भगवती की पूजा कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करना बहुत शुभ माना गया है। क्योंकि बसंत ऋतु अपने चरम पर होती है इसलिये इन्हें वासंती नवरात्र भी कहा जाता है।
चैत्र नवरात्र की शुरुआत शनिवार से हो गई। अगले आठ दिनों तक दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना होगी। घर-घर घट स्थापना और पूजा शुरू हो गई है। चैत्र नवरात्र को बहुत ही भाग्यशाली माना जाता है। यह नवरात्र उस वक्त पड़ता है जबकि सूर्य देवता उत्तरायण की गति में होते हैं। ऐसे समय में मां भगवती की पूजा कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करना ही शुभ माना गया है।
नवरात्र के समय जहां मां के नौ रुपों की पूजा की जाती है वहीं चैत्र नवरात्र के दौरान मां की पूजा के साथ-साथ अपने-अपने कुल देवी-देवताओं की भी पूजा अर्चना की जाती है जिससे ये नवरात्र विशेष हो जाता है।
ज्योतिषियों के अनुसार वर्ष 2019 में चैत्र नवरात्र 06 अप्रैल से प्रारम्भ होकर 14 अप्रैल 2019 दिन रविवार को प्रातः 6 बजे तक नवमी तत्पश्चात दशमी तिथि तक होगा। संवत्सराम्भ एवं पक्षारम्भ 6 अप्रैल 2019 दिन शनिवार को ही प्रतिपदा तिथि सूर्योदय से दोपहर 02:58 बजे तक होगा। 06 अप्रैल से ही वासन्तिक नवरात्र की शुरुआत होगी। 05 अप्रैल दिन शुक्रवार को दोपहर 01 बजकर 36 मिनट पर  प्रतिपदा तिथि लग रही है जो अगले दिन 6 अप्रैल को दोपहर 02:58 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि लग जायेगी । अतः उदया तिथि के कारण नवरात्र का आरम्भ 06अप्रैल दिन शनिवार से ही माना जायेगा। धर्मशास्त्रों के अनुसार कलश स्थापना प्रतिपदा को अर्थात पहले दिन।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त लाभ एवं अमृत चौघड़िया तथा शुभ अभिजीत मुहुर्त्त में किया जाना अति उत्तम होता है। इस वर्ष प्रातःकाल 07:20 बजे से 08:53 बजे तक शुभ चौघड़िया में सर्वोत्तम है। यदि किसी कारण नही कर पाए तो अभिजीत मुहूर्त्त एवं मध्यान्ह 11:30 से 12:18 बजे तक किया जाना उत्तम होगा। वैसे इस वर्ष घटस्थापना सुबह सूर्योदय से दोपहर 02:58 से पूर्व प्रतिपदा तिथि में किया जा सकता है।
इस प्रकार प्रतिपदा 6 अप्रैल 2019 को सूर्योदय 5 बजकर 47 मिनट से शुरु होगी। जो 12 अप्रैल 2019 दिन शुक्रवार को सुबह 10:18 बजे से 13 अप्रैल दिन शनिवार को सुबह दिन में 08:16 बजे तक अष्टमी तिथि होगी उसके बाद नवमी तिथि लग जायेगा। 13 अप्रैल दिन शनिवार को महानवमी का व्रत होगा क्योंकि 13 अप्रैल को सुबह 08:16 बजे के बाद ही नवमी तिथि लग जायेगी जो 14 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक ही विद्यमान रहेगी अतः नवमी तिथि में ही नवरात्र सम्बंधित हवन -पूजन 14अप्रैल को प्रातः 06:00 बजे के पूर्व किसी भी समय किया जा सकता है । नवरात्र का पारण दशमी तिथि 14 अप्रैल दिन रविवार को प्रातः काल 6 बजे के बाद किया जाएगा*। साथ ही 13 अप्रैल दिन शनिवार को मध्यान्ह नवमी तिथि होने के कारण प्रभु श्री राम की जयतीं यानी रामनवमी का पुण्य पर्व भी मनाया जायेगा।

 

Nationalwheels India News YouTube channel is now active. Please subscribe here

(आप हमें फेसबुकट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंकडिन पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

 

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

NationalWheels will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.