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प्रयागराज और वाराणसी में सरकारी वकीलों की नियुक्ति में गड़बड़झाला?

प्रयागराज और वाराणसी में सरकारी वकीलों की नियुक्ति में गड़बड़झाला?
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
आयकर विभाग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और प्रयागराज के सरकारी अभियोजकों की नियुक्ति भी विवादों से अछूती नहीं रह सकी. न्यायालय में सरकारी अभियोजकों की नियुक्ति के लिए सरकार और सेंट्रल बोर्ड ऑप डाइरेक्ट टैक्सेज की ओर से साफ-सुथरे निर्देश हैं. सरकार की मंशा है कि अभियोजकों के चयन में पूरी पारदर्शिता बरती जाए लेकिन प्रयागराज में कुछ ऐसा हुआ जिससे विवाद खड़ा हो गया है. यह विवाद जिला अधिवक्ता संघ के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट जितेंद्र सिंह उर्फ जीतू यादव के एक पत्र से बढ़ा है.
जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी जितेंद्र यादव ने सीबीडीटी को 10 अक्टूबर को ही पत्र लिखकर पब्लिक प्रोसेक्यूसर यानि लोक अभियोजक के चयन में गड़बड़ी का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि लोक अभियोजक के चयन को लेकर बनी सरकार की गाइड लाइन का पालन नहीं किया गया है. उनका आरोप है कि इस चयन में पारदर्शिता नहीं अपनाई गई. उनकी शिकायत है कि लखनऊ से प्रकाशित सिर्फ एक अंग्रेजी अखबार में ही इस नियुक्ति का विज्ञापन प्रकाशित किया गया. स्थानीय अखबारों और जिला बार एसोसिएशन प्रयागराज में इसके बारे में कोई सूचना नहीं दी गई.
जितेंद्र यादव ने नेशनल व्हील्स से बातचीत में कहा कि प्रयागराज में हिन्दी अखबार ज्यादा प्रसारित हैं. जिला बार के ज्यादातर अधिवक्ता हिन्दी अखबार ही पढ़ते हैं. साथ ही बार एसोसिएशन के बोर्ड पर भी सूचना न होने से ज्यादातर अधिवक्ताओं को इस चयन की जानकारी ही नहीं हो सकी. यदि इस चयन की जानकारी होती तो दावेदारों की संख्या बढ़ती और पारदर्शिता के साथ चयन होता. उनका कहना है कि केवल प्रयागराज में ही नहीं, वाराणसी से भी इसी तरह का चयन किया गया है. वाराणसी में पिता-पुत्र ही लोक अभियोजक पद के आवेदनकर्ता हैं. यही नहीं, चयन कमेटी में कानून मंत्रालय के मेंबर सेक्रेटरी का होना भी अनिवार्य है लेकिन चयन के दिन वह भी मौजूद नहीं थे. इसलिए यह चयन प्रक्रिया दोषपूर्ण है.
उधर, प्रयागराज सीसीआईटी कार्यालय के आईटीओ मुख्यालय आरके तिवारी ने कहा कि लोक अभियोजकों के चयन के लिए कमेटी का गठन कर पूरी पारदर्शिता बरती गई है. कानून मंत्रालय के मेंबर सेक्रेटरी ने चयन में न पहुंच पाने की सूचना स्क्रीनिंग कमेटी को दी थी. वाराणसी के मामले की जानकारी उन्हें नहीं है.

 


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