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6 दिसंबरः पाकिस्तान में गिराए गए थे दर्जनों मंदिर लेकिन इस मंदिर को जिसने भी क्षति पहुंचाई उसे भी हुआ नुकसान

आज छह दिसंबर है. युवा पीढ़ी में बहुतों को याद भी नहीं होगा, भारत के इतिहास में प्रत्येक वर्ष आखिर क्यों फोर्स को चौकन्ना कर दिया जाता है. अयोध्या में अलर्ट रहता है. लगभग पूरे उत्तर प्रदेश में आधिकारिक तौर पर चौकसी का तामझाम भी रहता है. यह वही दिन है जबकि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद का ढांचा कारसेवकों ने ढहा दिया था. इसके आरोप में भाजपा, विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और शिवसेना के कई नेताओं पर वर्षों केस चला है. मंदिर/मस्जिद को लेकर विवाद अब भी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. इसे लेकर आरएसएस और विहिप सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग लगा रहे हैं. साथ ही केंद्र सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वह कानून के जरिए राम मंदिर का निर्माण कराए. 
फिलहाल, 06 दिसंबर 1992 और उसके पहले 1990 में हुए कारसेवकों के आंदोलन को लेकर भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी भारी बवाल हुआ था. पाकिस्तान और और बांग्लादेश में तमाम मंदिरों को बदले की आग में ढहा दिया गया. दर्जनों को क्षतिग्रस्त भी किया गया. 
पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी हिन्दुओं की छोटी आबादी रहती है. दोनों देशों में तमाम प्राचीन मंदिर भी हैं जिनमें लोग श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं लेकिन तब, अयोध्या में विवादित ढांचा के ध्वंस के बाद जो प्रतिक्रिया पाकिस्तान में हुई उसके दंश अब भी ताजा हैं. अयोध्या में विवादित ढांचा, जहां हिन्दू मतावलंबी मानते हैं कि यहां आराध्या भगवान राम का जन्म हुआ था, जन्मस्थान के मंदिर को तोड़कर बाबर के सेनापति ने मस्जिद का निर्माण करा दिया.
                                 captionलाहौर के जैन मंदिर की मौजूदा स्थिति
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार बाबरी मस्जिद प्रकरण के बाद पाकिस्तान में तक़रीबन 100 मंदिर या तो ज़मींदोज़ कर दिए गए या फिर उन्हें भारी नुकसान पहुँचाया गया. हालांकि, इनमें से ज़्यादातर मंदिर आबाद नहीं थे. यानी यहां नियमित तौर पर पूजा-अर्चना नहीं होती थी. इनमें से कुछ मंदिरों में 1947 में हुए बंटवारे के बाद पाकिस्तान आए लोगों ने शरण ले रखी थी. आठ दिसंबर, 1992 को लाहौर के एक जैन मंदिर को उन्मादियों ने ढहा दिया. जहां अब केवल इसके धूल फांकते खंडहर बाकी रह गए हैं.
                                 captionरावलपिंडी के कृष्ण मंदिर का गुंबद, इस मंदिर का शिखर बाबरी विध्वंस के बाद तोड़ दिया गया था
मंदिर परिसरों में रहने वालों बताया कि साल 1992 के दिसंबर में मंदिरों को बर्बाद करने आई भीड़ से उन्होंने ये गुज़ारिश की थी कि इन मंदिरों को छोड़ दें. उस मंजर को याद करते हुए लोगों ने बताया, “हमने उन्हें कहा… ये हमारे घर हैं, हम पर हमला मत करो.” रावलपिंडी के कृष्ण मंदिर में आज भी हिंदू पूजा-पाठ करने आते हैं. इस मंदिर का शिखर बाबरी विध्वंस के बाद तोड़ दिया गया था, जो अब भी वैसे पड़ा है.
                                 captionरावलपिंडी का कल्याण दास मंदिर
ये तस्वीर रावलपिंडी के कल्याण दास मंदिर की है. फ़िलहाल इसमें नेत्रहीन बच्चों के लिए एक सरकारी स्कूल चलता है. स्कूल के अधिकारियों ने बताया कि 1992 में एक भीड़ ने इस जगह पर हमला कर दिया था, लेकिन वे इसकी इमारत को बचाने में किसी तरह कामयाब रहे.
                                captionझेलम का एक वीरान मंदिर पाकिस्तान के झेलम शहर के एक वीरान मंदिर का दृश्य.
स्थानीय लोगों का दावा है कि पाकिस्तान के झेलम शहर के इस मंदिर को जिस किसी ने भी बर्बाद करने की कोशिश की, उसे खुद इसका नुक़सान उठाना पड़ा. कभी हमलावर घायल हुआ तो कभी उसकी मौत हो गई. साल 1992 में कुछ लोगों ने इसे तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वे इसके ऊपरी सिरे से गिर गए. इसके बाद फिर किसी ने मंदिर को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश नहीं की.
                                  captionलाहौर का बंसीधर मंदिर
लाहौर के अनारकली बाज़ार के बंसीधर मंदिर को 1992 में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया गया था.
                                 captionलाहौर का शीतला देवी मंदिर
ये तस्वीर लाहौर के ही शीतला देवी मंदिर की है. बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पाकिस्तान में उन्मादियों के ग़ुस्से का शिकार बनने वाले मंदिरों में ये भी एक है. उनके हमले में मंदिर को आंशिक रूप से थोड़ा नुक़सान पहुंचा था. इन दिनों यहां बंटवारे के बाद भारत से आए शरणार्थी परिवार रहते हैं.

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