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लाॅकडाउन में दिहाड़ी मजदूरों को भोजन के लाले

लाॅकडाउन में दिहाड़ी मजदूरों को भोजन के लाले

प्रशासन की राहत सामग्री से ये कोसों दूर, स्वयं सेवी संस्थाओं ने भी नहीं जाना दर्द

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
प्रशासन की राहत सामग्री से ये कोसों दूर, स्वयं सेवी संस्थाओं ने भी नहीं जाना दर्द
शशिकांत तिवारी
बलिया : कोरोना के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए पूरे भारत में 14 अप्रैल तक 21 दिनों का लॉक डाउन है जिसके चलते दिहाड़ी मजदूरों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। जनपद के कोने-कोने या गैर जनपदों से आकर दिहाड़ी मजदूर यहां परमंदापुर में अपने परिवार के साथ रहते हैं। लाॅक डाउन के चलते काम-धंधा बंद हो जाने से खाने के भी लाले पड़ गए हैं। जिला प्रशासन द्वारा गरीबों तक राहत सामग्री पहुंचाई जरूर जा रही है लेकिन इन्हें आज भी सरकारी राहत का इंतजार है। विडंबना यह है कि स्वयं सेवी संस्थाएं भी इन तक नहीं पहुंच सकी हैं।
कहने को तो अन्नपूर्णा पुलिस – पब्लिक बैंक भी इन्हीं जैसे लोगों के लिए काम कर रहा है। पुलिस की पीआरवी टीमें लगातार गरीब बस्तियों में भोजन के पैकेट व अन्य सामान सुलभ करा रही हैं लेकिन इन्हें उनका भी इंतजार है।
असंगठित क्षेत्र के इन मजदूरों में राहुल, गोपाल, अवधेश, मंजू देवी, रानी देवी, इंद्रासन यादव, प्रमोद केसरी, सूरज कुमार, अभिषेक, शाकिर अंसारी, शबनम बानो आदि ने बताया कि दिन भर मेहनत करने के बाद शाम को जो भी पैसे कमाते हैं उससे ही एक किलो चावल, सौ ग्राम दाल, पचास ग्राम सरसों तेल और पाव भर आलू लेकर घर लौटते हैं ये सिलसिला एक दिन नहीं , रोजाना का है। अब तो पूरा दिन प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बीत जाता है। छोटे बच्चों का हाल इन्हें देखा नहीं जाता। बाहर निकलने की आजादी पर भी पहरा। ऐसे में हम लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि अपना दर्द किसे सुनाएं।

 


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