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#CPI, #TMC और #NCP की #EC से गुहार- राष्ट्रीय पार्टी के दर्जा के लिए लोकसभा चुनाव नतीजों को न बनाएं आधार, दें और मोहलत

#CPI, #TMC और #NCP की #EC से गुहार- राष्ट्रीय पार्टी के दर्जा के लिए लोकसभा चुनाव नतीजों को न बनाएं आधार, दें और मोहलत
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
मई 2019 में आए लोकसभा चुनाव के नतीजों से कई पार्टियों के राष्ट्रीय दर्जे को बचाना भारी पड़ रहा है. निर्वाचन आयोग के नोटिस के जवाब में  CPI, TMC और NCP ने सोमवार को चुनाव आयोग (ECI) से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा न छीनने की गुहार लगाई है. तीनों पार्टियों के नेताओं ने आयोग से आग्रह करते हुए कहा कि यह निर्णय हाल के चुनावों में खराब नतीजों पर आधारित नहीं होना चाहिए और लोकतंत्र में खुद को साबित करने के लिए नया दिया जाा चाहिए. तीनों ने आयोग को बताया कि वे पुराने दल हैं जिन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाई थी. लोकसभा चुनाव के खराब नतीजों के आधार पर राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छीना जाना उचित नहीं होगा. गौरतलब है कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर तीनों पार्टियों को एक सिंबल मिलने में मुसीबत खड़ी हो जाएगी.
इससे पहले, कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए तीनों ने चुनाव आयोग से कहा था कि इस साल लोकसभा चुनाव में उनके प्रदर्शन के आधार पर उनकी राष्ट्रीय पार्टी की स्थिति को रद्द नहीं किया जाना चाहिए. चुनाव आयोग ने पहले उन्हें नोटिस जारी करके पूछा था कि लोकसभा चुनाव में उनके प्रदर्शन के बाद उनकी ’राष्ट्रीय पार्टी’ की स्थिति क्यों नहीं रद्द की जानी चाहिए. सीपीआई ने कहा कि कांग्रेस के बाद वह देश की सबसे पुरानी पार्टी है जो लोकसभा में प्रमुख विपक्षी पार्टी थी.
वाम दल ने राष्ट्रीय दर्जा बचाने के लिए तर्क दिया है कि हाल के लोकसभा चुनावों में इसका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, लेकिन वह कई राज्यों की सत्ता में रह चुकी है और इसने संविधान को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. सीपीआई के महासचिव डी. राजा ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि हमने चुनाव आयोग से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखने की अनुमति देने का अनुरोध किया है. हमने चुनाव आयोग से कहा कि हम देश के सबसे पुराने राजनीतिक दलों में से एक हैं जो स्वतंत्रता संग्राम में सबसे आगे थे.
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कहा कि उसे 2014 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिया गया था और उसे कम से कम 2024 तक इसे जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए. “2016 में नियमों को बदल दिया गया था जो चुनाव आयोग को दो चुनाव चक्रों के बाद स्थिति की समीक्षा करने की अनुमति देता है. टीएमसी के कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह सिद्धांत हम पर लागू नहीं किया गया है. अब वे दीवाली  के बाद दूसरी सुनवाई के लिए हमें फिर से बुलाएंगे.
गौरतलब है कि सीपीआई, बीएसपी और एनसीपी को 2014 के लोकसभा चुनावों में उनके निराशाजनक प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खोने की संभावना का सामना करना पड़ रहा था. हालांकि, उन्हें एक झटका तब मिला जब 2016 में चुनाव आयोग ने अपने नियमों में संशोधन किया, जिसके तहत राजनीतिक दलों की राष्ट्रीय और राज्य की स्थिति की समीक्षा पांच के बजाय हर 10 साल में की जानी थी. गौरतलब है कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 2019 के संसदीय चुनावों में 10 लोकसभा और कुछ विधानसभा सीटें जीती थीं, को अब अपनी राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खोने की संभावना नहीं है.
एनसीपी नेता माजिद मेमन ने पीटीआई को बताया कि उन्होंने पोल पैनल से कहा कि यह “यार्ड स्टिक लगाने का सही समय नहीं था.” “राकांपा महाराष्ट्र में 15 वर्षों से सत्ता में थी और यह एक असाधारण पार्टी है जिसने अपने गठन से ही एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी बनने के लिए अर्हता प्राप्त की. गठन के तुरंत बाद यह चुनावों में गई और राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी की परिभाषा की आवश्यकता को पूरा किया, लेकिन 2014 (महाराष्ट्र विधानसभा) चुनाव में इस झटका के बाद भी हमने लोगों के बीच अपनी मान्यता और स्वीकार्यता बनाए रखी है. उन्होंने कहा कि एक विफलता के लिए हम अपनी स्थिति नहीं खो सकते. उन्होंने उम्मीद जताई कि हम आने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में वापसी करेंगे. हम इस अवसर के लायक हैं.
चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के अनुसार एक राजनीतिक दल को एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में तभी मान्यता दी जा सकती है, यदि उसके उम्मीदवार लोकसभा या विधानसभा चुनावों में चार या अधिक राज्यों में कम से कम छह प्रतिशत वोट सुरक्षित रखते हैं. इसके अलावा लोकसभा में इसके कम से कम चार सदस्य होेने चाहिए. अभी तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC), BJP, BSP, CPI, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), TMC, NCP और नेशनल पीपुल्स पार्टी ऑफ मेघालय को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त है लेकिन यदि चुनाव आयोग ने तीनों पार्टियों के तर्कों को नियमों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया तो चार पार्टियां ही राष्ट्रीय पार्टी के रूप में रह जाएंगी.

 

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