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#COVID-19 व्यंग्यः बाहर लॉकडाउन, घर में कर्फ्यू, जाएं तो जाएं कहां?

#COVID-19 व्यंग्यः बाहर लॉकडाउन, घर में कर्फ्यू, जाएं तो जाएं कहां?

व्यंग्य : एक साथ में रखते नहीं , दूसरे के पास है नहीं , ये क्या जानें पीर पराई , करो ना तो झेलना ही होगा

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
व्यंग्य : एक साथ में रखते नहीं , दूसरे के पास है नहीं , ये क्या जानें पीर पराई , करो ना तो झेलना ही होगा

आलोक श्रीवास्तव

चीन से चले कॅरोना नाम के वायरस को लेकर पूरे देश में दहशत है। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले लॉक डाउन हैं। देश के अन्य राज्यों की भी यही स्थिति है। सरकार कह रही है कि यदि उसकी बातों को जनता ने पालन नहीं किया तो कर्फ्यू लगाना पड़ेगा। पंजाब , महाराष्ट्र ,पुण्डिचेरी ने तो कर्फ्यू लगा भी दिया है। जनाब डरा क्यों रहे हो, बाहर में भले लॉक डाउन हो लेकिन घर में तो पूरी तरह कर्फ्यू है। घर के अंदर दहशत कम नहीं है। बाहर से कहीं ज्यादा ही है।
लॉक डाउन में तो कुछ छूट भी मिलती है लेकिन घर के कर्फ्यू में कोई मरउअत नहीं। सुबह के 7 बज रहे थे , नींद भी नहीं खुली थी , अचानक झनझनाती हुई आवाज कानों में पड़ी। सुन रहे हो – उठ कर जल्दी से बिस्तर क्यों नहीं ठीक करते , जल्दी करो ना। कॅरोना का नाम सुनते ही तपाक से बिस्तर छोड़ा और काम में लग गया। डर था , कहीं करो ना की चपेट में आ गया तो…। अभी इस काम से निवृत होकर अखबार के पन्नों को पलट ही रह था कि फिर एक आवाज गूंजी। बैठे-बैठे कर क्या रहे हो, अखबार दिनभर यहीं रहेगा, भागेगा नहीं, बैठे-बैठे सब्जी काटने का भी काम करो ना।
करो ना का डर था, मरता क्या न करता, काम में जुटना पड़ा। कुछ देर सुस्ताया ही था कि मेरा आराम करना रास नहीं आया। आवाज आई कुछ खाना बनाना ही सीख लो, खिलाया करो, निठल्ले बैठे हो। अपने सूबे के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से ही कुछ सीख लो, किचेन में कैसे बढ़िया ढंग से खाना बना रहे हैं, उनसे बड़े नहीं हो तुम? वो कर सकते हैं तुम क्यों नहीं।
चलो अभी तो बना दिया है। कुछ ही देर में कर्कशता और मधुरता का मिश्रण लिए हुए एक ध्वनि सुनाई पड़ी, सर्दी खत्म हो गई है, गर्म कपड़े चपेत कर बक्से में रखने का भी काम करो ना। करो ना का भय इतना था कि सबकुछ कहे अनुसार करता चला गया। यह सब करते – करते शाम हो गई। अभी तो पूरी रात और जबतक लॉक डाउन खत्म न हो जाए करो ना की चपेट में हूं, भगवान जल्दी कॅरोना से मुक्ति दिलाओ।
मोदी जी और योगी जी बार-बार धमकी दे रहे हैं कि बाहर निकले तो एफआईआर कराके जेल भेज देंगे। अरे महाशय , शौक से थोड़े न कोई बाहर निकल कर इधर-उधर घूम रहा है, पीड़ा तो समझने की कोशिश कीजिए हुजूर , आपके पास …। एक महोदय साथ में रखते नहीं हैं और दूसरे के पास है ही नहीं। ये दर्द, दिक्कत कैसे महसूस कर सकते हैं?
कहावत है – जाके पैर न फ़टी बेवाई , वो क्या जाने पीर पराई। खैर हालत घर और घाट वाले कुत्ते की तरह हो गई है, बाहर निकलो तो लॉक डाउन व घर पहुंचो तो कठोर कर्फ्यू को झेलना तो अब नियति ही बन गई है।
खैर , यह तो हंसी मजाक की बातें हैं । सरकार हम सभी की सेहत के लिए ही कठोर से कठोर कदम उठा रही है। हम सब की नैतिक जिम्मेदारी है कि सरकार के बताए निर्देशों का पालन करें , तभी हम कॅरोना जैसी विपदा से छुटकारा पा सकते हैं। संकल्प और संयम का परिचय दीजिए और एक जिम्मेदार नागरिक बनिए।

 


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