अमेठी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी केरल की इस सीट से भी लड़ सकते हैं चुनाव

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए पहली बार दूसरी सुरक्षित सीट की तलाश में है. संभावना जताई जा रही है कि वह अमेठी के साथ केरल की कांग्रेस की सबसे सुरक्षित वायनाड संसदीय सीट से भी लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं. केरल कांग्रेस अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन के शनिवार को दिए बयान से इसकी संभावना बढ़ गई है. रामचंद्रन का दावा है कि कांग्रेस अध्यक्ष इस बात के लिए तैयार हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी फिलहाल उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से सांसद हैं, जहां आगामी लोकसभा चुनाव में उनका सामना भारतीय जनता पार्टी की नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से होगा. स्मृति ने ही 2014 के लोकसभा चुनावों में भी राहुल गांधी को तगड़ी टक्कर दी थी.
वायनाड सीट के बारे में बताते हुए केरल कांग्रेस अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन कहते हैं, ‘इसके लिए एक महीने से बात चल रही थी. पहले राहुल गांधी दो सीटों के लिए तैयार नहीं थे. बाद में तैयार हो गए.’
वहीं, कांग्रेस नेता ओमान चांडी ने भी ऐसा दावा किया है. उन्होंने कहा, ‘केरल कांग्रेस कमेटी ने राहुल गांधी से निवेदन किया है कि वह केरल की एक सीट से चुनाव लड़ें. वह सीट वायनाड है. राहुल गांधी का जवाब कभी भी आ सकता है.’
कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख दिनेश गुंडु राव ने राहुल से अपने राज्य से चुनाव लड़ने के लिए कहा. वहीं, केरल कांग्रेस भी वायनाड निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए गांधी की चुनावी रणनीति को समझाने की कोशिश कर रही है.
लोकसभा का परिसीमन होने के बाद साल 2008 में वायनाड लोकसभा सीट अस्तित्व में आई थी. ये कन्नूर, मलाप्पुरम और वायनाड संसदीय क्षेत्र को मिलाकर बनी है. परिसीमन के बाद से ही इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा है.

All India Congress Committee General secretary Oommen Chandy: Karnataka Pradesh Congress Committee (KPCC) has requested Congress President Rahul Gandhi to contest from one of the seats in Kerala. The seat on offer is Wayanad. Rahul Gandhi’s response is expected anytime today pic.twitter.com/ImlBRvlS6v

यदि राहुल केरल की इस सीट से भी चुनाव लड़ने के लिए तैयार होते हैं तो इस सीट पर उनका मुकाबला माकपा के पीपी सुनीर से होगा. पहले इस सीट से टी सिद्दीकी के चुनाव लड़ने की खबर थी लेकिन ऐसा कहा जाता है कि राहुल के समर्थन में उन्होंने खुद का नाम पीछे कर लिया.
गौरतलब है कि साल 2014 में कांग्रेस के गढ़ अमेठी में स्मृति इरानी ने राहुल गांधी को कड़ी टक्कर दी थी. स्मृति ने उनके जीत के अंतर को कम कर दिया था. मतगणना के दौरान शुरुआती दौर में स्मृति के आगे निकलने की सूचनाओं से कांग्रेस में सिहरन दौड़ चुकी थी. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को अमेठी में 408,651 वोट मिले थे. जबकि बीजेपी की उम्मीदवार स्मृति ईरानी को 300,74 वोट मिले थे. इस तरह जीत का अंतर 1,07,000 वोटों का ही रह गया था. जबकि 2009 में कांग्रेस अध्यक्ष की जीत का अंतर 3,50,000 से भी ज्यादा का रहा था.
स्मृति ईरानी चुनाव हारने के बाद भी पिछले पांच वर्षों से लगातार अमेठी में सक्रिय हैं. वह अक्सर सार्वजनिक समारोहों और उद्घाटन कार्यक्रमों में पहुंचती रही हैं. इसके अलावा दीपावली के दौरान उनका साड़ी वितरण कार्यक्रम और पिछली कुछ गरमियों में होने वाली अगलगी की घटनाओं और बाढ़ के दौरान गरीबों के बीच मदद के रूप में चलाए गए कार्यक्रमों ने उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष के प्रबल प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने खड़ा कर दिया है.

 

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