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कांग्रेस नेता डॉ उदित राज ने अयोध्या राम मंदिर पर छेड़ा विवाद, कहा- खुदाई से सिद्ध हुआ ये बौद्ध स्थल था

कांग्रेस नेता डॉ उदित राज ने अयोध्या राम मंदिर पर छेड़ा विवाद, कहा- खुदाई से सिद्ध हुआ ये बौद्ध स्थल था

श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने `नेशनल व्हील्स` संवाददाता अजय सिन्हा से कहा कि मिले अवशेष 2000 वर्ष पुराने हो सकते हैं। इन पर भगवान की प्रतिमा का स्वरूप, चक्र, तीर, धनुष शिवलिंग स्तंभ पर विभिन्न आकृतियां बनी हैं। यह सिद्ध होता है कि इस स्थल पर मंदिर को तोड़ा गया था।

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर में समतलीकरण और टीलों की खुदाई के दौरान मिले धार्मिक पुरातात्विक साक्ष्यों को लेकर कांग्रेस नेता व आंबेडकरबादी डॉ उदित राज ने नया विवाद छेड़ दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बाबरी मस्जिद के ढांचे से मिली मुक्ति के बाद अब कांग्रेस नेता ने कहा है कि अयोध्या में खुदाई से सिद्ध हुआ कि यह एक बौद्ध स्थल था। मीडिया द्वारा इस निष्कर्ष पर पहुंचना कि यहां राम मंदिर था, जल्दबाजी होगी। फिलहाल, डॉ उदित राज के के बयान से इस मुद्दे को लेकर नए सिरे से विवाद भी छिड़ सकता है। इतिहासकारों का एक तबका इसे परिसर को बौद्धकालीन साबित करने के लिए नए सिरे से प्रयासों में जुट सकता है। सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मुद्दे पर बहस के दौरान भी बाबरी पक्षकारों ने इसे बौद्ध धर्म से जुड़ा क्षेत्र बताकर ट्वीस्ट करने की कोशिश की थी।
प्रयागराज के मेजा निवासी और दिल्ली से कांग्रेस नेता डॉ उदित राज ने शुक्रवार को एक ट्वीट कर इस प्रकरण को नया विवाद देने की कोशिश की है। डॉ उदित राज ने लिखा कि अयोध्या में खुदाई से सिद्ध हुआ कि यह एक बौद्ध स्थल था। पूरा एरिया पुरातत्व विभाग की निगरानी में अध्ययन किया जाना चाहिए। बौद्ध स्तूपों में मिले धम्म चक्र &अयोध्या में मिले धम्म चक्र में समानता देखने को मिलेगी।मीडिया द्वारा निष्कर्ष पर पहुँचना की यहाँ राम मंदिर था जल्दबाज़ी होगी।

कांग्रेस नेता डॉ उदितराज ने 2014 के आम चुनाव के पहले अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया था। इसके बाद हुए चुनाव में वह लोकसभा में पहुंचे थे। बाद में उन्होंने भाजपा छोड़ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर लिया। 2019 के आम चुनाव में वह भाजपा प्रत्याशी गौतम गंभीर से चुनाव हार गए थे।
बता दें कि अयोध्या के 67.77 एकड़ क्षेत्रफल और श्रीराम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट से 9 नवंबर 2019 को पक्ष में फैसला आने के बाद परिसर में मंदिर निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गई थी। पंरुत, लॉकडाउन के कारण निर्माण कार्य पिछड़ गया। 11 मई से 3 जेसीबी, ट्रैक्टर और श्रमिकों की मदद से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए परिसर के समतलीकरण का कार्य सुरू हुआ। इस दौरान परिसर से आमलक, शिवलिंग, कलश, पाषाण के खंभे, देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां, प्राचीन कुआं और चौखट आदि पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए हैं। खुदाई के दौरान मिलीं यह मूर्तियां करीब 2000 वर्ष पुरानी हिन्दुओं में किवदंती बन चुके राजा विक्रमादित्य काल की मानी जा रही हैं।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट समेत अयोध्या के साधु-संतों ने दावा किया है कि समतलीकरण के दौरान मिले अवशेष भव्य मंदिर के हैं। इसमें आमलक, शिवलिंग, कलश, पाषाण के खंभे, देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां, प्राचीन कुआं और चौखट आदि शामिल हैं। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय ने मीडिया को जानकारी दी कि समतलीकरण के काम में तीन जेसीबी, एक क्रेन, दो ट्रैक्टर और 10 मजदूर लगाए गए हैं।
चंपत राय के मुताबिक लॉकडाउन हटते ही ट्रस्ट की बैठक होगी जिसमें मंदिर निर्माण की तिथि की घोषणा की जाएगी। इसके पहले मंदिर निर्माण के लिए पूरे परिसर को साफ करा दिया जाएगा। जमीन समतल हो जाएगी ताकि जल्द काम शुरू हो सके। मंदिर परिसर के अंदर कुछ संरक्षित मंदिर भी हैं जिनमें सुग्रीव टीला आदि शामिल हैं।
रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने कहा कि मूर्तियों का मिलना यह बताता है कि पहले से ही भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर उस स्थान पर था। मंदिर तोड़कर मस्जिद का निर्माण हुआ, इससे यह भी साबित होता है।
श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने नेशनल व्हील्स संवाददाता को बताया कि मिले अवशेष 2000 वर्ष पुराने हो सकते हैं। इन पर भगवान की प्रतिमा का स्वरूप, चक्र, तीर, धनुष शिवलिंग स्तंभ पर विभिन्न आकृतियां बनी हैं। यह सिद्ध होता है कि इस स्थल पर मंदिर को तोड़ा गया था।

यह मिला परिसर से

देवी देवताओं की खंडित मूर्तियां
पुष्प कलश, अम्लक, दोरजाम्ब आदि कलाकृतियां
मेहराब के पत्थर, 7 ब्लैक टच स्टोन के स्तंभ
6 रेड सैंड स्टोन के स्तंभ
5 फुट की नक्काशीयुक्त शिवलिंग की आकृति
क्या कहना है संतों का

 


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