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चित्रकूटः कोरोना संकट के दौरान खदानों में नाबालिग लड़कियों को बेचनी पड़ी देह?

चित्रकूटः कोरोना संकट के दौरान खदानों में नाबालिग लड़कियों को बेचनी पड़ी देह?
कोरोना संकट के दौरान भूख, बेरोजगारी, उत्पीड़न जैसी कहानियां तो तमाम सामने आईँ लेकिन उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से अब जिस किस्म की सूचनाएं सामने आ रही हैं, मानवता शर्मशार हो जाएगी। एक निजी टीवी चैनल ने की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना संकट के दौर में चित्रकूट की खदानों में नाबालिग लड़कियों का शारीरिक शोषण किया गया है। रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि लॉकडाउन के दौरान भी चालू रहीं खदानों में नाबालिग लड़कियों की देह 150-200 रुपये में खरीदी-बेची गई।
आरोप है कि गरीबी की आड़ लेकर यह घृड़ित काम खदानों के ठेकेदार और बिचौलिये कर रहे हैं। गरीबी सबसे बड़ा अभिषाप है, ये तो सर्वविदित है। दो जून की रोटी के जुगाड़ के लिए हड्डियां गला देने वाली मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन जिस्म के सौदागरों को लड़कियों की गरीबी ही सौदेबाजी के लिए ललचाती है।
बताया गया है कि बुंदेलखंड के चित्रकूट में जहां गरीबों की नाबालिग बेटियां खदानों में काम करने के लिए मजबूर हैं, लेकिन ठेकेदार और बिचौलिये उन्हें काम की मजदूरी नहीं देते. मजदूरी पाने के लिए इन गरीब बेटियों को अपने जिस्म का सौदा करना पड़ता है।
रिपोर्ट के अनुसार गरीबी और बेबसी ने खेलने और स्कूल जाने की उम्र वाली मासूम लड़कियों को मजदूरी के धंधे में धकेल दिया जाता है। परिवार को पालने का जिम्मा इनके कंधों पर भी रहता है। इसके कारण 12-14 साल की बेटियां खदानों में काम करने जाती हैं, जहां 200-300 रुपये के लिए उनके जिस्म की बोली लगती है।
कर्वी निवासी एक किशोरी के हवाले से कहा गया है कि ‘जाते हैं और काम पता करते हैं तो वो (ठेकेदार) बोलते हैं कि अपना शरीर दो तभी काम पर लगाएंगे, हम मजबूरी में ऐसा करते हैं। फिरभी पैसे नहीं मिलता। मना करते हैं तो बोलते हैं कि काम पर नहीं लगाएंगे। मजबूरन हमें यह सब करना पड़ता है।’
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर इस प्रकरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया कि अनियोजित लॉकडाउन में भूख से मरता परिवार… इन बच्चियों ने ज़िंदा रहने की ये भयावह क़ीमत चुकाई है। क्या ये ही हमारे सपनों का भारत है?
फिलहाल, इंडिया टुडे ने रिपोर्ट में दावा किया है कि अब इस मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। ग्राम प्रधान और सत्ताधारी दल के नेता व कार्यकर्ता स्थानीय महिलाओं को लेकर प्रभावित परिवारों को ऐसे किसी भी तरह के बयान न देने के लिए दबाव डाल रहे हैं। गांवों में पुलिस भी तैनात कर दी गई है।
इस मामले को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने जिला मजिस्ट्रेट को एक प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा है और अपनी राज्य शाखा को एक टीम को स्थान पर भेजने का आदेश दिया है। तीन सदस्यीय टीम शुक्रवार को दोपहर तक पहुंच जाएगी और पीड़ितों से मुलाकात करेगी।
दूसरी तरफ नेशनल व्हील्स के सामने आई जानकारी के अनुसार नाबालिग किशोरियों, महिलाओं के शारीरिक शोषण की कहानी दशकों पुरानी है। ईंट-भट्ठों, खदानों में काम करने वाली लड़कियों को ठेकेदार और कंपनी के कर्मचारी मजदूरी के बदले शिकार बनाते रहे हैं। कोरोना संकट के दौरान भी यह जारी है।

 


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