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#Chinavirus की जंग में राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री, राज्य़पालों, मंत्रियों और सांसदों का महादान, वेतन से कटाएंगे 30 फीसदी रकम

#Chinavirus की जंग में राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री, राज्य़पालों, मंत्रियों और सांसदों का महादान, वेतन से कटाएंगे 30 फीसदी रकम

चीनी वायरस यानि कोरोना के खिलाफ जारी जंग में केवल सांसद निधि से एक करोड़ रुपये और एक माह का वेतन आमजन को अच्छा नहीं लग रहा था

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
चीनी वायरस यानि कोरोना के खिलाफ जारी जंग में केवल सांसद निधि से एक करोड़ रुपये और एक माह का वेतन आमजन को अच्छा नहीं लग रहा था। अब सरकार ने एक फैसले के जरिए आमजन को खुश कर दिया है। दरअसल, केंद्रीय कैबिनेट ने तय किया है कि अगले दो साल तक सांसदों को निधि की रकम नहीं मिलेगी। साथ ही राष्ट्रपति से लेकर उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय और केंद्र सरकार के राज्य मंत्री के साथ ही लोकसभा और राज्यसभा के सभी 790 सदस्यों के वेतन में 30 फीसदी की कटौती की जाएगी। देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों और दोनों सदनों के सांसदों का कोरोना के खिलाफ चल रही जंग में खुले दिल से योगदान होगा।
एक साल तक सभी सांसदों के वेतन से तीस फीसद धनराशि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जाएगी। हर साल हर सांसद को मिलने वाली पांच करोड़ रुपये की सांसद निधि भी दो साल तक सरकार के कंसोलिडेटेड फंड में जाएगी।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट ने इस आशय के अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। यह अध्यादेश एक अप्रैल, 2020 से एक साल के लिए अमल में आ रहा है। इस फैसले के तत्काल बाद ही राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपालों ने भी स्वेच्छा से सालभर तक तीस फीसद कम वेतन लेने का एलान किया है।
कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सोमवार को बताया कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हर किसी का योगदान चाहिए। ऐसे मे अगर दो साल तक सांसद निधि रुकती है तो सरकार के खाते में 7900 करोड़ रुपये आएंगे।
जावडेकर ने बताया कि सांसदों के अलावा, प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के वेतन का 30 फीसद वेतन कम होगा। ध्यान रहे कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों का वेतन का ढांचा सांसदों के वेतन से अलग होता है। सांसदों का मासिक वेतन एक लाख रुपये और संसदीय क्षेत्र का मासिक भत्ता 70 हजार रुपये के अलावा अन्य भत्ते भी होते हैं। सांसदों का वेतन संसद के तय कानून से ही निर्धारित होता है। ऐसे में इनमें कटौती का फैसला भी कानून में बदलाव के जरिये ही होगा। इसलिए अध्यादेश को संसद सत्र में लाया जाएगा।
संसद सदस्य अधिनियम, 1954 के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन का अध्यादेश मंजूर किया गया है जो इसी महीने की शुरुआत से लागू हो गया है। जावडेकर ने बताया कि कोरोना संकट को देखते हुए राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और सभी राज्यपालों ने भी स्वेच्छा से साल भर तक तीस फीसद कम वेतन लेने का निर्णय लिया है।
कोरोना में सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न सिर्फ आगाह कर रहे हैं। बल्कि खुद ही उदाहरण भी पेश कर रहे हैं। इस क्रम में सोमवार को उन्होंने वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए ही कैबिनेट की बैठक ही। प्रधानमंत्री आवास में उनके साथ सिर्फ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह साथ थे।
बाकी से सभी मंत्री अपने-अपने घरों से लिंक से जुड़े थे। पिछली कैबिनेट बैठक मे भी सामाजिक दूरी के लिए ही मंत्रियों को दूर-दूर बिठाया गया था। बीच से टेबल गायब था और मंत्रियों को एक-एक मीटर की दूरी पर आगे पीछे कर बिठाया गया था।
केंद्रीय कैबिनेट के इस फैसले का असर जल्द ही भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों में भी दिख सकता है। सभी मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और विधायकों की तरफ से इसके ऐलान हो सकते हैं।

 


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