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#Chinavirus सन्नाटे को चीरती पुलिस और एम्बुलेंस की सायरन ही सुनाई पड़ रही थी

#Chinavirus सन्नाटे को चीरती पुलिस और एम्बुलेंस की सायरन ही सुनाई पड़ रही थी

रात के 8 बजे थे। प्रयागराज के बमरौली से चौफटका तक करीब 7.5 किलोमीटर की दूरी फर्राटा भरते हुए पूरी हो गई

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

 आलोक श्रीवास्तव

रात के 8 बजे थे। प्रयागराज के बमरौली से चौफटका तक करीब 7.5 किलोमीटर की दूरी फर्राटा भरते हुए पूरी हो गई। कभी यह दूरी आधे घंटे से ज्यादा समय में पूरी होती थी। क्योंकि यह काफी व्यस्त मार्ग है। यह प्रयागराज को कानपुर से जोड़ने वाला रास्ता है। बगल का जिला कौशाम्बी के लोग भी इसी रास्ते से आना जाना करते हैं। एयर फोर्स के सेंट्रल कमांड का हेडक्वार्टर इसी मार्ग पर है। हवाईअड्डे को जाने वाला रास्ता यही है। सब्जी मंडी और ट्रांसपोर्ट नगर भी यहीं हैं। आरटीओ आफिस इसी मार्ग पर होने के कारण गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन , रिनीवल और ड्राइविंग लाइसेंस के लिए भीड़ अक्सर रहती है। उत्तर-मध्य रेलवे के मुख्यालय आने-जाने का यही मुख्य मार्ग है। यूं कहें कि प्रयागराज को पश्चिम दिशा से जोड़ने वाला यही मुख्य रास्ता है। बीच में बमरौली , मुंडेरा , प्रीतमनगर , सुलेमसराय सरीखे बड़े बाजार हैं। भीड़ का आलम ये रहता है कि इस मार्ग पर गाड़ियां रेंगती हैं , अक्सर जाम की समस्या से दो चार होना पड़ता है। लेकिन जब इस संवाददाता ने सूरते हाल का जायजा लिया तो सड़क वीरान थी , इक्का-दुक्का लोग ही बाइक से आते हुए दिख रहे थे , ये आवश्यक सेवा के लोग और दूधिए थे। सड़क के किनारे कुछ मेडिकल स्टोर और किराने की दुकानें ही खुली थीं। बाकी सभी दुकानें बंद थीं। चारो ओर सन्नाटा छाया था। इस सन्नाटे को तोड़ने का काम पुलिस और एम्बुलेंस के सायरन कर रहे थे । रास्ते पर गाड़ी ड्राइव करना भयभीत करने वाला था। मैं सोच रहा था कि क्या मैं उसी रास्ते पर चल रहा हूं जिस पर चलना किसी वक्त काफी मुश्किल होता था।

पुलिस भी सतर्क दिखी

पुलिस सतर्क दिखी लेकिन फालतू घूमने वाले युवाओं से परेशान भी। बार-बार की चेतावनी के बाद भी ये बेवजह सड़क पर घूमने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे युवाओं की खबर भी पुलिस ठीक से ले रही थी। कुछ युवा तो पुलिस को देखते ही बाइक मोड़कर भाग जा रहे थे। सब्जी और किराने की दुकानों पर सामाजिक दूरी का पालन होता न देखकर पुलिस वाले उन्हें समझा भी रहे थे। देखने में यह भी आया कि सरकारी तंत्र और मीडिया द्वारा कोरोना वायरस से बचने के सारे उपाय बताने के बाद भी लोग सुरक्षा घेरे को तोड़ने से बाज नहीं आ रहे हैं। यह चिंता का विषय है। अपनी सुरक्षा अपने हाथ में होती है , छोटी सी बात लोग समझ नहीं पा रहे हैं। जबतक जनता का सहयोग नहीं होगा , किसी भी समस्या से पार पाना मुश्किल काम है। एक स्थान पर वर्ग विशेष के तीन लोग बाइक से जाते दिखे। इसमें एक महिला थी जो छोटे बच्चे को गोद में लिए हुए थी। सोशल डिस्टनसिंग का फार्मूला यहां तार-तार हो रहा था। यही नहीं तीन लोगों को बैठाकर बाइक चलाना भी कानूनन अपराध है। पुलिस वाले ने अपनी बाइक की रफ्तार बढ़ा कर उन्हें रोका , डांटा और एक व्यक्ति को बाइक से उतारकर महिला को ही बाइक पर बैठकर जाने की इजाजत दी। तीसरे सदस्य को पैदल जाने को कहा। इस तरह मैंने देखा कि पुलिस अपनी भूमिका में है , सिर्फ जनता को अपनी हरकत सुधारनी होगी , तभी परिणाम निकल पाएगा।

दुकानदार ऐसे काट रहे समय

दूध , सब्जी , किराना और मेडिकल स्टोर की दुकान को छोड़कर कोई भी दुकान खुली हुई नहीं दिखी। इन दुकानों के मालिक दुकान की शटर बंद करके उदास हाल में दुकान के बाहर अकेले बैठे थे। किसी परिचित के आने पर दूर से ही बात कर अपना दुखड़ा बता रहे थे। जिन दुकानों पर अच्छी खासी भीड़ रहती थी आज वीरान हैं और पिछले 15 दिन से बोहनी तक नहीं हुई है। बचत किए हुए पैसे से घर का खर्च चल रहा है।

 


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