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#Chinavirus आज रात दीया जलाइए, फैसले की विवेचना तो हम कल भी कर सकते हैं

#Chinavirus आज रात दीया जलाइए, फैसले की विवेचना तो हम कल भी कर सकते हैं

समूह में किसी भी अच्छे काम को करने से ताकत का एहसास होता है , इससे सकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है जो किसी भी समस्या के समाधान में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स

समूह में किसी भी अच्छे काम को करने से ताकत का एहसास होता है , इससे सकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है जो किसी भी समस्या के समाधान में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

 आलोक श्रीवास्तव
मेडिकल साइंस रोग की दो वजह मानता है। Psychosomatic यानी psychological (मानसिक) + somatic (शारीरिक)। मेडिकल साइंस यह भी मानता है कि रोग के लिए 60 फीसदी ज़िम्मेदार मानसिक स्थिति होती है। सिर्फ़ 40 प्रतिशत ही व्याधि का हिस्सा होता है रोगी बनाने में। अब आते हैं इलाज पर। डॉक्टर रोग के 40 फीसदी कारण को दूर करने का उपाय करता है। दवा वग़ैरह देता है। इसमें भी शरीर द्वारा स्वयं किए गए उपाय शामिल हैं। मसलन शरीर में बनी एंटीबाडीज़, रोग प्रतिरोधक क्षमता आदि। बचता है रोग का 60% भाग । इसका संबंध होता है रोगी की मानसिक स्थिति , आत्मविश्वास , जिजीविषा से। बड़े डॉक्टर के इलाज से रोगी इसलिए भी ठीक हो जाता है कि उसके मन में डॉक्टर पर पूरा विश्वास पैदा हो जाता है। हकीकत में तो लगभग-लगभग ट्रेड नेम बदलता है , दवा में साल्ट वही होता है। कहने का आशय है कि कमोवेश दवा तो सभी डॉक्टर एक जैसी ही देते हैं। झाड़-फूंक, टोना-टोटका आदि , जिसे हम अवैज्ञानिक तरीक़ा कहते हैं, से इलाज में भी यही डायनामिक्स काम करता है।
कोरोना वैश्विक महामारी तो है लेकिन यह दुनिया के सभी इंसानों को नहीं मार डालेगी , जिनमें आत्मविश्वास होगा कि कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा, सचमुच उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। आत्मविश्वास का मतलब यह नहीं है कि आप सुरक्षा के मानकों को तोड़ें। आपको डॉक्टर और सरकार द्वारा बताए सभी नियमों का पालन करते हुए आत्मबल , आत्मविश्वास बढ़ाना होगा। मीडिया में लगातार खबरें आ रहीं हैं कि 100 साल और 80 वर्ष से ऊपर के उम्र के मरीज भी कोरोना से ठीक हुए हैं। यह उनके आत्मबल का ही परिणाम है कि आज वे स्वस्थ्य हैं।

दीया जलाना, ताली बजाना आत्मबल बढ़ाने का तरीका है

22 मार्च को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना को हराने के लिए जनता कर्फ्यू की घोषणा कि और शाम को 5 बजे अपने घर के बाहर , बालकनी या छत पर डॉक्टरों , पुलिस वालों और कोरोना को हराने में जितने भी लोग भाग ले रहे हैं , उनके लिए एक साथ 5 मिनट तक ताली या थाली बजाने को कहा था। कुछ लोग इसका मजाक उड़ा रहे हैं। शायद वह मनोविज्ञान को समझते नहीं हैं। देश की जनता द्वारा एक साथ ऐसा करने से कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे लोगों में सकारात्मक ऊर्जा पैदा होगी , जो उत्साह को बढ़ाएगी , जिम्मेदारियों का एहसास कराएगी और ये सभी तत्व मिलकर काम को बेहतर अंजाम देंगे।
इससे कोरोना पीड़ित जल्द से जल्द ठीक होंगे। आज 5 अप्रैल , 2020 को रात 9 बजे 9 मिनट के लिए घर के बाहर , बालकनी या छत पर दीया , मोमबती या मोबाइल की लाइट जलाने के लिए प्रधानमंत्री ने कहा है , ध्यान रहे इस दौरान प्रधानमंत्री ने घर की सभी लाइट बुझाने ( फ्रिज , एसी , पंखे आदि नहीं ) की अपील की है। इसका मनोवैज्ञानिक पक्ष यह है कि घुप अंधेरे में भी एक छोटा सा दीया रोशनी करके राह दिखा सकता है। इसका यह भी अर्थ है कि जब हम एक साथ प्रदर्शन करते हैं तो ताकत का एहसास होता है और सकारात्मक ऊर्जा निकलती है जो किसी भी समस्या के समाधान में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। कोरोना का वैक्सीन नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में हम विकसित देशों की तुलना में कहां खड़े हैं, किसी से छिपा नहीं है। यह वैश्विक महामारी से जंग का दौर है। इसमें सेनापति पीएम मोदी हैं। हम सब सैनिक। जंग का सबसे बड़ा उसूल है सेनापति के फ़ैसलों पर सवाल नहीं उठाना , फ़ैसलों को अक्षरशः मानना। फ़ैसलों की विवेचना तो जंग जीतने के बाद भी हो सकती है। तो आइए दीया जलाएं , अंधेरा भगाएं।

सिर्फ बत्ती बंद करना है , बाकी नहीं

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घरों की बत्तियां बंद करने की अपील की है। टीवी , फ्रिज , पंखे , कम्प्यूटर , एसी चलते रह सकते हैं। अस्पतालों , पुलिस थानों , स्ट्रीट लाइट समेत अन्य जरूरी सेवाओं में बिजली जलती रहेगी।

सैनिटाइजर लगाकर दीया न जलाएं

सेना ने सलाह दी है कि दीया जलाने से पहले सुनिश्चित कर लें कि हाथ पर सैनिटाइजर ना लगा हो । अगर सैनिटाइजर लगा है तो साबुन से हाथ अवश्य धो लें। इसमें अल्कोहल होने से आग पकड़ने का खतरा होता है ।

ग्रिड फेल होने की बात अफवाह

9 मिनट बत्ती बंद होने से देश में बिजली खपत 12 से 15 गीगाबाइट तक घट सकती है । यूपी में ही 3000 मेगावाट कमी का अनुमान है । ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि इससे निपटने की पूरी तैयारी कर ली गई है। ग्रिड फेल होने की बात अफवाह मात्र है।

सोशल डिस्टनसिंग का पालन अवश्य करें

प्रधानमंत्री ने स्पष्टतौर से कहा है कि इसके लिए घर से बाहर जाने की जरूरत नहीं है। घर में जो उपलब्ध है उसे ही जलाएं। दीया , मोमबत्ती भले न हो मोबाइल तो अमूमन सबके पास है। उसकी लाइट का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके साथ सामाजिक दूरी का भी हर हाल में ध्यान रखें लक्ष्मण रेखा को कतई न लांघें।

 


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