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ताइवान को एफ -16 लड़ाकू जेट बेचने के खिलाफ चीन ने अमेरिका को दी चेतावनी

ताइवान को एफ -16 लड़ाकू जेट बेचने के खिलाफ चीन ने अमेरिका को दी चेतावनी
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
जैश-ए-मोहम्मद सरगना के खिलाफ चीन के वीटो को लेकर दिखी अमेरिकी तनातनी अब और बढ़ने के आसार हैं. अमेरिका ने ताईवान को एफ-16 लड़ाकू विमानों को बेचने का प्रस्ताव दिया है. इसे लेकर चीन ने नाक-भौं सिकोड़ना शुरू कर दिया है. चीन ने अमेरिका को द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचने की चेतावनी दी है. चीन ने वाशिंगटन से द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने से बचने के लिए उसकी संप्रभुता का सम्मान करने की अपील की है.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, “चीन ने ताइवान के लिए अमेरिकी हथियारों की बिक्री का विरोध किया. यह स्थिति लगातार बनी हुई है.”  उन्होंने कहा कि द्वीप को हथियारों की बिक्री चीन-अमेरिकी संबधों को “गंभीर रूप से नुकसान” पहुंचा सकती है.
बीजिंग ने अमेरिका से “ताइवान के साथ हथियारों की बिक्री और सैन्य संपर्क को रोकने” का आग्रह किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ताइवान के राष्ट्रपति के समर्थन और द्वीप के साथ संबंधों को गहरा करने के संकेत के बाद से क्षेत्र में ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक बन गया है.
हालांकि, चीन के विरोध को देखते हुए अब यह दिखना शेष है कि ट्रम्प एशियाई दिग्गज की दोस्ताना सलाह का पालन करेंगे या नहीं. ब्लूमबर्ग का तर्क है कि ट्रम्प संभवतः चल रही व्यापार वार्ता में सौदेबाजी चिप के रूप में एफ-16 बिक्री का उपयोग कर सकते हैं. अभी के लिए अमेरिकी प्रशासन ने कथित तौर पर अमेरिकी जेट खरीदने के लिए ताइवान के अनुरोध को “मौन स्वीकृति” दी है.
इस मामले से परिचित लोगों ने रूसी न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग को बताया है कि लड़ाकू विमानों की बिक्री करने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव अमेरिका द्वारा जारी किया जाना है. कांग्रेस के अनुमोदन के लिए जाने से पहले इस प्रस्ताव को पेंटागन की अनुमति लिया जाना जरूरी है.
गौरतलब है कि चीन ने भारतीय कंपनियों की ओर से ताईवान के गहरे समुद्र में तेल कुओं की खुदाई का भी विरोध किया गया था. हालांकि, भारतीय कंपनियों ने चीन के इस अनुरोध को ज्यादा तवज्जो नहीं दी. चीन ने इसे लेकर कारोबारी संबंधों में खटास होने जैसी चेतावनी दी थी. चीन ताईवान को अपना हिस्सा बताता रहा है. वह चीन की सरकार को भी मान्यता नहीं देता है.

 

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