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चीन को भारत से ऐसे करारे झटके की नहीं थी उम्मीद : पूर्व सचिव

चीन को भारत से ऐसे करारे झटके की नहीं थी उम्मीद : पूर्व सचिव
पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग सो और देपसांग पर भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध पर दोनों देशों के बीच बुधवार को हुई वार्ता करीब 15 घंटे तक चली। इस बैठक में दोनों देशों की सेनाओं के अधिकारी मौजूद थे। इस बैठक में दोनों देशों नें अहम फैसले लिये, जिनके बारे में अधिकारिक जानकारी फिलहाल नहीं दी गई है। इस बीच खबर है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे 17 जुलाई को लद्दाख और 18 जुलाई को श्रीनगर का दौरा करेंगे। हालांकि, एलएसी पर चीनी सेना की गतिविधियों से जुड़े पूरे घटनाक्रम पर विशेषज्ञों की राय यही है कि चीन को भारत से ऐसे झटके की उम्मीद कतई नहीं थी।
चीन का इस तरह से मान जाना और पीछे जाना किस तरफ इशारा करता है। और आने वाले समय में चीन ऐसी हिमाकत नहीं करे, इसके लिए भारत को प्रभावी कमद उठाने चाहिए। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय में पूर्व सचिव रहे पिनाक रंजन चक्रवर्ती कहतें हैं कि यह भारत के दृढ़ विश्वास का नतीजा है कि वो चीन के आगे अडिग रहा। इसके अलावा सरकार ने अपनी नीतियों से और आर्मी डिप्लॉयमेंट के जरिए कड़ा संदेश दिया कि अगर वो इस तरह से घुसने की कोशिश करेंगे तो भारत उससे दो-दो हाथ करने के लिए तैयार है। इसका उदाहरण उन्हें 15 जून को मिल भी गया जब भारतीय सेना ने उन्हें जवाब दिया और इसी का नतीजा है कि चीन को कड़े शब्दों में जवाब मिल भी गया है।
भारत के आर्मी और इकोनॉमी जवाब से हिला चीन
गलवान में 15 जून को झड़प हुई वो कहीं न कहीं पीएएलए की सोची समझी चाल थी। ये किसी लोकल कंमाडर या जनरल का प्लान नहीं था। पीएलए कम्युनिस्ट पार्टी का हिस्सा है और जो भी हुआ वह वहां के राजनीति दिशा निर्देश पर हुआ। लेकिन चीन ने ये नहीं सोचा था कि भारतीय सेना उनको इस तरह से तगड़ा जवाब देगी। इसके अलावा उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि भारत उन पर इकोनॉमी अटैक करेगा। चीन का हमारे देश से 50-60 मिलियन डॉलर का ट्रेड बैलेंस है यानी भारत से फायदा उठा रहा है। लेकिन अब सरकार ने जब 59 ऐप पर बैन लगाया और निवेश में भी नए विकल्प खोजने के नए विकल्‍पों की तलाश शुरू की तो चीन को समझ आ गया कि उसकी चाल उलटी पड़ सकती है। हमें देखना होगा जहां चीन हमारे देश में टेलीकॉम सेक्टर में हावी है, वहां विकल्प तलाशने की जरूरत है।

स्टेटस को एंटी जरूरी

पिनाक रंजन चक्रवर्ती मानते हैं कि इस वक्त जो भी कंमाडर या आर्मी डिप्लॉयमेंट के जरिए बातचीत हो रही उसके सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं। लेकिन इस बात को भी ध्यान रखना है कि जबतक स्टेटस को एंटी यानी यथापूर्व स्थिति न हो जाए यानी अगर वो दो कदम आगे आएं हैं और केवल एक कदम पीछे जाएंगे तो इसका फायदा नहीं है। इसलिए ही सरकार भी इस पर नजर रखने सतर्क रहने को कह रही है। एक तरह से जब तक पूरा वेरिफिकेशन न हो जाए कि चीनी सैनिक पीछे हट गए हैं तब तक, चीन पर विश्वास नहीं कर सकते। जो भी स्थिति बनी है उसे पहले की यथा स्थिति तक नहीं चले जाते तब तक उसे पूरी तरह से सामान्य नहीं मान सकते हैं।
पाकिस्तान-चीन नहीं चाहते बॉर्डर एलाइनमेंट
वहीं दोनों देशों के बीच सीमांकन करना यानी बार्डर पर एक निश्चित एलाइनमेंट करना कितना जरूरी है इस पर पिनाक रंजन मानते हैं कि भारत हमेशा से ऐसा चाहता है भारत ने बाग्लादेश के साथ लाइन बॉउंड्री एग्रीमेंट कर लिया है। लेकिन चीन ऐसा नहीं चाहता क्योंकि चीन उस हिस्से को कहीं न कहीं अपना अधिपत्य रखना चाहता है। इसके अलावा पाकिस्तान भी नहीं चाहता कि एलाइनमेंट हो। वो सीमा के एक टूल के रूप में प्रयोग कर रहा है कि भारत पर दबाव बनाया जा सकता है। लेकिन चीन सिर्फ भारत को ही नहीं बल्कि अपनी सीमा से जुड़े सभी देशों को तंग कर रहा है। चीन ऐसा रवैया कोविड की वजह से कर रहा है या इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है ये, अभी साफ नहीं हो पाया है। लेकिन भारत को फिलहाल उनके पीछे जाने के साथ ही उनकी की हरकत पर नजर बनाए रखना जरूरी है।

बता दें कि दोनों देशों के कोर कमांडर स्तर की 30 जून को हुई बैठक में भारत और चीन के बीच बनी सहमति के आधार पर सेना के पीछे जाने के 2 जुलाई से शुरू हुए इस अभियान में एक हफ्ते के भीतर तीन विवादित जगहों गलवान, गोगरा और हॉट स्प्रिंग से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट चुकी हैं। गोगरा पोस्ट यानी पेट्रोलिंग प्वाइंट-17ए के पास से गुरुवार को भारतीय और चीनी सैनिक करीब डेढ़-दो किलोमीटर पीछे हटे हैं लेकिन अभी यहां वेरिफिकेशन होना बाकी है। पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 और 15 से दोनों सेनाओं के पीछे जाने का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है, जिसका सत्यापन भी स्थानीय कमांडर स्तर पर किया जा चुका है। यहां से भारतीय और चीनी सैनिक अपने भारी हथियारों और बख्तरबंद वाहनों को लगभग 1 से 2 किमी. दूर वापस ले गए हैं।

इस तरह देखा जाए तो तीन विवादित जगहों गलवान में पीपी-14, हॉट स्प्रिंग में पीपी-15 और गोगरा में पीपी-17ए से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट गई हैं। यहां बफर जोन बनने के बाद दोनों देशों के सैनिक अब एक दूसरे से करीब 2-3 किलोमीटर दूर हो गए हैं।

 


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