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#Chandrayan-2: 3.84 किमी का सफर कर चंद्रमा की सतह तक पहुंचेगा `बाहुबली`

#Chandrayan-2: 3.84 किमी का सफर कर चंद्रमा की सतह तक पहुंचेगा `बाहुबली`
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
इसरो का चंद्रयान-2 मिशन थोड़ी देर में दुनियाभर में भारत का सिर ऊंचा करने के लिए उड़ान भरने को तैयार है. 2.43 बजे रवाना होने वाला बाहुबली कहा जा रहा यह मिशन सितंबर के पहले सप्ताह में अपनी कक्षा में पहुंचेगा. तमाम खूबियों से लैस यह मिशन चंद्रमा के उस हिस्से पर जाएगा जहां अब तक कोई भी देश अपना लैंडर नहीं पहुंचा सका है. इसरो ने बताया है कि पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी लगभग 384000 किमी है. चंद्रयान-2 के साथ रवाना होने वाला लैंडर विक्रम 48दिनों की यात्रा करने के बाद चंद्रमा की सतह पर पहुंचेगा.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अंतरिक्ष में इतिहास रचने से बच चंद घंटे दूर है. इसरो के प्रमुख के सिवन ने बताया कि  चंद्रयान-2 की लैंडिंग के अखिरी के 15 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होंगे, जब लैंडर विक्रम चांद की सतह पर उतरने वाला होगा. उन्होंने कहा कि मिशन पूरी तरह से कामयाब सबित होगा और चंद्रमा पर नई चीजों की खोज करने में सफल रहेगा.
लॉन्च देखने के लिए देशभर से हजारों लोग श्री हरिकोटा पहुंच रहे हैं. इसरो के अधिकारी के मुताबिक रॉकेट के प्रक्षेपण को देखने के लिए कुल 7,500 लोगों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है. इसरो ने हाल ही में लॉन्च को देखने के लिए आम जनता को अनुमति दी है. लोगों के लिए इसरो ने लगभग 10 हजार लोगों की क्षमता वाली एक गैलरी बनाई है.
चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने की जिम्मेदारी इसरो ने अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच व्हीकल- मार्क 3 (जीएसएलवी-एमके 3) को दी है. 640 टन वजनी रॉकेट की लागत 375 करोड़ रुपये है.
यह रॉकेट 3.8 टन वजन वाले चंद्रयान-2 को लेकर उड़ान भरेगा. चंद्रयान-2 की कुल लागत 603 करोड़ रुपये है. अलग-अलग चरणों में सफर पूरा करते हुए यान सात सितंबर को चांद के दक्षिणी धु्रव की निर्धारित जगह पर उतरेगा. अब तक विश्व के केवल तीन देशों अमेरिका, रूस व चीन ने चांद पर अपना यान उतारा है.
इसरो का सबसे मुश्किल मिशन
इसे इसरो का सबसे मुश्किल अभियान माना जा रहा है. सफर के आखिरी दिन जिस वक्त रोवर समेत यान का लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा, वह वक्त भारतीय वैज्ञानिकों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होगा. खुद इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने इसे सबसे मुश्किल 15 मिनट कहा है. इस अभियान की महत्ता को इससे भी समझा जा सकता है कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी अपना एक पेलोड इसके साथ लगाया है.
तीन हिस्सों में बंटा है चंद्रयान-2
चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं-ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर. अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के सम्मान में लैंडर का नाम विक्रम रखा गया है. वहीं, रोवर का नाम प्रज्ञान है, जो संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञान. चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद लैंडर-रोवर अपने ऑर्बिटर से अलग हो जाएंगे. लैंडर विक्रम सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव के नजदीक उतरेगा. लैंडर उतरने के बाद रोवर उससे अलग होकर अन्य प्रयोगों को अंजाम देगा. लैंडर और रोवर के काम करने की कुल अवधि 14 दिन की है. चांद के हिसाब से यह एक दिन की अवधि होगी. वहीं ऑर्बिटर सालभर चांद की परिक्रमा करते हुए विभिन्न प्रयोगों को अंजाम देगा.

 

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