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देश के 75वें वर्ष का जश्न 2022 में, देश को मिल सकता है नया संसद भवन

देश के 75वें वर्ष का जश्न 2022 में, देश को मिल सकता है नया संसद भवन
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि 2022 जब देश अपनी आजादी के 75वें वर्ष का जश्न मनाएगा तब तक नए संसद भवन का निर्माण किया जा सकता है. प्रधानमंत्री यहां सांसदों के लिए नवनिर्मित द्वैध अपार्टमेंट के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे.
पीएम मोदी ने मध्य दिल्ली के नार्थ एवन्यू में 36 डुप्लेक्स फ्लैटों का उद्घाटन किा या. पहले भी यहां सांसदों के आवास थे, जिनका निर्माण 1951-52 में निर्मित हुआ था. उनकी जर्जर हालत के कारण ध्वस्त कर नए फ्लैट्स का निर्माण दो साल की निर्धारित पूर्णता तिथि से पहले पूरा हो गया.
उन्होंने कहा कि यह महसूस किया जा रहा है कि संसद भवन को अपनी भव्यता दिखाने के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक नया रूप देने की आवश्यकता है या भारत के आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक नई इमारत का निर्माण किया जा सकता है.
नए डुप्लेक्स फ्लैटों की आधारशिला तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने रखी थी. संयोग से चार साल पहले महाजन ने पहली बार भारतीय संसद के लिए एक नई इमारत के लिए प्रस्ताव रखा था. दिसंबर 2015 में महाजन ने तत्कालीन केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू को पत्र लिखा था कि वे एक नए संसद भवन के निर्माण के लिए उपाय शुरू करें. अपने पत्र में उन्होंने कहा था कि मौजूदा इमारत संकट में है और आने वाले वर्षों में बढ़ती मांगों को संभालने में सक्षम नहीं होगी.
महाजन ने तर्क दिया था कि मौजूदा संसद भवन के भीतर कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों, मीडिया आगंतुकों और संसदीय गतिविधियों की संख्या 1927 में कमीशन होने के बाद कई गुना बढ़ गई है. उन्होंने दो साइटों – संसद परिसर के भीतर और राजपथ के भीतर नई इमारत निर्माण के लिए सुझाव दिया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी इस महीने की शुरुआत में एक नए संसद भवन की आवश्यकता के बारे में बात की थी.

वर्तमान संसद भवन के वास्तुकार थे एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर

10 अगस्त को यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि एक नए संसद भवन के निर्माण पर विचार किया जा रहा है, लेकिन इस मामले पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है. मौजूदा संसद भवन को ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने डिजाइन किया था. भवन का निर्माण 1921 में शुरू हुआ था और छह साल बाद 1927 में पूरा हुआ. भारत की स्वतंत्रता से पहले इमारत का इस्तेमाल इंपीरियल विधान परिषद के लिए किया गया था. सरकार द्वारा भवन को हेरिटेज ग्रेड-1 संरचना के रूप में घोषित किया गया है.
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