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cbiVScbi_खुफिया एजेंसी रॉ द्वारा पकड़ी गई टेलीफोन कॉल ने कर दी आलोक वर्मा की छुट्टी

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स       
सीबीआई के निदेशक पद की गरिमामयी कुर्सी का ताज आलोक वर्मा के सिर से छिनने के पीछे एक नया खुलासा भी सामने आ रहा है. कहा जा रहा है कि सीबीआई बनाम सीबीआई के झगड़े में विदेशों में भारत के लिए काम करने वाली खुफिया एजेंसी रॉ ने आलोक वर्मा की कुछ कॉल को इंटरसेप्ट किया है. सीवीसी की रिपोर्ट में इस कॉल डिटेल का भी महत्वपूर्ण भूमिका है. इसमें सतीश बाबू सना और आलोक वर्मा के बीच हुई बातचीत का खुलासा किया गया है. सीवीसी की जांच रिपोर्ट में खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ द्वारा की गई ‘टेलीफोन निगरानी’ का हवाला भी दिया गया है.
गौरतलब है कि मांस कारोबारी मोईन कुरैशी के बिचौलिये के रूप में करने वाला हैदराबाद का कारोबारी सतीश बाबू सना ही वह आरोपी है जिससे आलोक वर्मा पर दो करोड़ रुपये घूस लेने का आरोप है. सीवीसी की रिपोर्ट में कुरैशी के मामले का भी जिक्र किया गया है. टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार सीवीसी ने कहा है कि सतीश बाबू सना की गिरफ्तारी के लिए सीबीआई की एक टीम ने अनुमति मांगी थी लेकिन आलोक वर्मा ने इसकी इजाजत नहीं दी. इस मामले की जांच विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के नेतृत्व में की गई थी.
अधिकारियों ने कहा कि सीवीसी रिपोर्ट में बाहरी खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ द्वारा फोन पर पकड़ी गई बातचीत का भी जिक्र है. गौरतलब है कि सना, अस्थाना के खिलाफ दर्ज मामले में शिकायतकर्ता है. उसने इस मामले में अपने बिचौलियों को दी गई रिश्वत के बारे में जानकारी दी थी. उसने ‘रॉ’ के दूसरे शीर्ष अधिकारी सामंत गोयल के नाम का भी जिक्र किया जो बिचौलिये मनोज प्रसाद को बचाने में कथित रूप से शामिल थे.
एक अन्य मामला सीबीआई द्वारा गुड़गांव में भूमि अधिग्रहण के बारे में दर्ज शुरुआती जांच से संबंधित है. सीवीसी ने आरोप लगाया है कि इस मामले में वर्मा का नाम सामने आया था. सीवीसी ने इस मामले में विस्तृत जांच की सिफारिश की थी.
सीवीसी ने यह भी आरोप लगाया था कि वर्मा ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री लालू प्रसाद से जुड़े आईआरसीटीसी मामले के एक अधिकारी को बचाने का प्रयास भी किया था. आयेाग ने यह भी आरोप लगाया कि वर्मा सीबीआई में दागी अधिकारियों को लाने की कोशिश कर रहे हैं.
गौरतलब है कि गुरुवार को केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा उसकी जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोपों के कारण आलोक वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटना पड़ा.
केंद्रीय जांच एजेंसी के 50 साल से अधिक के इतिहास में यह अपनी तरीके का पहला मामला है, जिसमें निदेशक को सेवाकाल के पहले भ्रष्टाचार के आरोप में सरकार ने हटाया है.
अधिकारियों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत उच्च शक्ति प्राप्त सेलेक्ट कमेटी ने सीवीसी रिपोर्ट पर विचार किया. इस रिपोर्ट में वर्मा पर आठ आरोप लगाए गए हैं. वर्मा को उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को ही बहाल किया था. अधिकारियों ने कहा कि वर्मा को हटाने का समिति का फैसला 2:1 के बहुमत से किया गया. कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसका विरोध किया, जबकि न्यायमूर्ति एके सीकरी सरकार के साथ खड़े हुए.

 

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