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थम नहीं रहा है CAA का विरोध, भ्रम में है भारत, कहीं समर्थ में तो कहीं विरोध में हो रहा है प्रदर्शन

थम नहीं रहा है CAA का विरोध, भ्रम में है भारत, कहीं समर्थ में तो कहीं विरोध में हो रहा है प्रदर्शन

लोगों में इस कानून को लेकर इतना भ्रम फैला है, कि उनको मानो ऐसा दूंगा विश्वास हो गया है

न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
ज्ञानेन्द्र तिवारी
9 दिसंबर को लोकसभा से पारित और 12 दिसंबर को राज्यसभा से पारित नागरिक संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद, जब इस बिल ने नागरिक संशोधन कानून का रूप ग्रहण कर लिया, तो इसका विरोध करने वाले लोगों में वृद्धि हुई । भारी जनसंख्या में लोग इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने लगे, लगभग पूरा भारत इस हिंसात्मक विरोध प्रदर्शन में जलने लगा, जगह-जगह हिंसात्मक विरोधियों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ । कहीं पुलिस पर किसी ने आरोप लगा कि पुलिस छात्रों के साथ गलत बर्ताव कर रही है, तू किसी ने इस को जायज ठहराया, और इस बिल के समर्थन में जुलूस निकाले। मामला इतना पेचीदा हो चुका था कि, लोग सीएए को भूल एनआरसी और एनपीआर के मुद्दे पर बवाल करने लगे, मानो उनका असली मकसद एनआरसी का का ही विरोध करना है, सीएए तो मात्र बस एक बहाना था । बात यहां तक भी जायज थी लेकिन जब प्रदर्शनकारियों से सीएए के बारे में पूछा गया कि सीएए करता है, तू लगभग दो तिहाई लोगों का यही जवाब आया कि उन्हें मालूम ही नहीं, कि सीएए क्या है ? कुछ नहीं तो सीए के बारे में पूछे जाने पर एनआरसी और एनपीआर का जिक्र किया, यहां तक भी ठीक था लेकिन जब उनसे गहराई से एनआरसी और एनपीआर के बारे में पूछा गया तो वह इसका भी मतलब बताने में असमर्थ रहे ।
लोगों में इस कानून को लेकर इतना भ्रम फैला है, कि उनको मानो ऐसा दूंगा विश्वास हो गया है, कि यह कानून उनकी नागरिकता खत्म कर सकता है, उन्हें देश से बाहर निकाल सकता है , लेकिन इस भ्रम के बीच उन्होंने इस कानून की पहली लाइन पढ़ना भी मुनासिब नहीं समझा, कि इस कानून का असली मकसद क्या है, यह कानून क्या कहता है । कुछ ऐसे लोग इस कानून के खिलाफ लोगों को भड़काने का काम कर रहे हैं, वे कानून के बारे में लोगों को सही जानकारी नहीं मुहैया करा रहे हैं, बल्कि लोगो के अंदर यह भावना पैदा कर रहे हैं कि यह कानून उनके लिए खतरा साबित हो सकता है ।
सबको पता है कि भारत का संविधान सबको अपना विरोध प्रकट करने की आजादी देता है लेकिन विरोध भी उस हद तक करना सीमित है, जिससे आपके विरोध से किसी दूसरे को नुकसान ना हो, या कोई दूसरा आपके विरोध से आहत ना हो, आप के विरोध की आग में किसी की जान न जाए । कई लोगों को इस विरोध की आग में अपनी जान गंवानी पड़ी, क्या ऐसा विरोध करना उचित था ? विरोध करिए लेकिन विरोध करने के नियम और कानून पड़ के विरोध करें । विरोध करना सीखना है तो, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी से सीखिए, कि विरोध कैसे किया जाता है, हिंसा के रास्ते पर चल कर विरोध करना उचित है, या अहिंसा के रास्ते पर चल कर विरोध करना उचित है । अगर आपमें तनिक से भी तार्किक क्षमता है तो आप अहिंसक के रास्ते पर चल के विरोध करना उचित समझेगें । विरोध करना सीखना है, तो भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व: अटल बिहारी वाजपेई से सीखिए की कैसे विरोध क्या कर वह अपने विरोधियों का दिल जीत लिया करते थे ।
CAA के विरोध की आग में जलने से पहले आप इस कानून का गहराई से अध्ययन करिए फिर जिस भी जगह आपको उचित ना लगे उस बिंदु को उठाकर सरकार से सीधा सवाल करिए, तब अगर सरकार आपकी बात का जवाब नहीं देती, तब दूसरा रास्ता चुनिए, लोकतंत्र है, आपके पास सरकार बदलने की छमता है,आप आपना वोट देकर अपनी मनपसंद सरकार बना सकतें हैं । बाकी की चीजें बाद में अपना ख्याल रखिए, दूसरों को तकलीफ ना पहुंचाएं, । इस लेख को पड़ने के बाद मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप विरोध करना के तरीके को समझ गए होगे कि कैसे विरोध उचित है ।
लेख पड़ने के लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद ।

 


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