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#राफेल सौदे पर मोदी सरकार को बड़ी राहत, #राहुल गांधी को भी मिला चैन, #सबरीमाला मंदिर मामले की सुनवाई करेगी 7 जजों की संविधान पीठ

#राफेल सौदे पर मोदी सरकार को बड़ी राहत, #राहुल गांधी को भी मिला चैन, #सबरीमाला मंदिर मामले की सुनवाई करेगी 7 जजों की संविधान पीठ
न्यूज डेस्क, नेशनलव्हील्स
सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदा मामले में मोदी सरकार को बड़ी राहत प्रदान कर दी है. सेवानिवृत्ति से पहले मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने राफेल सौदे पर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है. साथ ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी चेतावनी के साथ आपराधिक अवमानना याचिका मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छोड़ दिया है. तीसरे सबसे बड़े सबरीमाला अयप्पा मंदिर में 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश स जुड़ी पुनर्विचार याचिका को 3-2 के फैसले से 7 जजों की बड़ी संविधान पीठ को केस स्थानांतरित कर दिया है. अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की बृहद पीठ करेगी.
राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा और लोकसभा चुनावों के पहले बड़ी रार के रूप में सामने आए राफेल सौदा मामले को सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह से बंद कर दिया है. भाजपा के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा समेत अन्य ने सुप्रीम कोर्ट के राफेल सौदा मामले में 14 दिसंबर 2018 को दिए गए फैसले को लेकर पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी. याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने गलत तथ्य प्रस्तुत किए हैं. इससे पूरा न्याय नहीं मिल सका. सुप्रीम कोर्ट का फैसला सरकार के गलत तथ्यों पर आ गया है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 14 राफेल जेट की खरीद सौदे को बरकरार रखते हुए 14 दिसंबर, 2018 के फैसले को बरकरार रखते हुए समीक्षा याचिकाओं को खारिज कर दिया.
यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ गलत तरीके से अदालत में शिकायत करने के लिए दायर याचिका को #Raleale मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ “चौकीदार चोर है” नारे के लिए बंद कर दिया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी भी की है “राहुल गांधी को अपनी टिप्पणी के लिए भविष्य में अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है.”

तीसरे मामले में सबरीमाला मंदिर प्रकरण को सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ ने 7 सदस्यीय बृहद पीठ को संदर्भित कर दिया है. 7 सदस्यीय पीठ इस मामले में छोटी पीठ के फैसले की समीक्षा करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर, 2018 के फैसले में 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं को भी मंदिर में प्रवेश की इजाजत दे दी थी. इसके खिलाफ केरल में व्यापक आंदोलन भी चला है. गुरुवार को 3-2 से सुनाए गए फैसले में जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पिछले फैसले को ही बरकरार रखा है लेकिन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई समेत तीन सदस्यों ने इस मामले को बृहद पीठ के पास भेजने का निर्णय सुनाया.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में #SabarimalaTemple समीक्षा याचिका पर फैसला सुनाते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “पूजा स्थलों में महिलाओं का प्रवेश इस मंदिर तक सीमित नहीं है. यह मस्जिदों और पारसी मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश में शामिल है.”

 


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